• January 2, 2026

भू धंसाव प्रभावित स्थानीय मूल निवासियों ने अपनी चिंता से शासन को कराया अवगत

 भू धंसाव प्रभावित स्थानीय मूल निवासियों ने अपनी चिंता से शासन को कराया अवगत

जोशीमठ भू-धंसाव प्रभावित स्थानीय मूल निवासियों ने विस्थापन को लेकर अपनी चिंताओं व समस्याओं से राज्य सरकार को अवगत कराते हुए यथाशीघ्र समाधान किए जाने की अपेक्षा की है।

जोशीमठ भू धंसाव आपदा को एक वर्ष का समय पूर्ण हो चुका है, और अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। एक वर्ष के लंबे इंतजार के बाद गत 20 जनवरी को उत्तराखंड सरकार के आपदा प्रबंधन सचिव ने प्रभावितों के साथ बैठक कर बारह सौ घरों को खाली कराने की मंशा जाहिर करते हुए विस्थापन के लिए प्रस्तावित चयनित स्थान का भी खुलासा कर दिया था।

इसी बैठक में प्रेजेंटेशन के माध्यम से जो हाई रिस्क जोन दिखाए गए हैं, उनमें जोशीमठ के सभी मूल गांवों को भी दर्शाया गया है,जबकि इनके आसपास सेना, आईटीबीपी, ग्रैफ व एनटीपीसी आदि सरकारी महकमों को सुरक्षित ग्रीन जोन में दिखाया गया है। ऐसे में स्थानीय मूल गांवों के निवासियों का चिंतित होना स्वाभाविक ही है।

इन्हीं सब चिंताओं व आशंकाओं को लेकर स्थानीय मूल निवासियों ने एक बैठक कर अपने भविष्य को सुरक्षित रखने हेतु विचार रखे और तय हुआ कि मूल/पुस्तैनी निवासियों की भविष्य को लेकर जो चिंताएं व शंकाए हैं, उनसे उत्तराखंड सरकार को अवगत कराया जाय।

इसी क्रम में गुरुवार को एक ज्ञापन उप जिलाधिकारी जोशीमठ के माध्यम से मुख्यमंत्री को प्रेषित किया गया, जिसमें कहा गया है कि मूल निवासी कहीं भी अन्यत्र विस्थापित नहीं होना चाहते क्योंकि मूल निवासियों के पास प्रभावित भूमि के अलावा मारवाड़ी से सुनील-औली-गौंख तथा होसी (रविग्राम) से लेकर मनोटी-औली तक पर निजी भूमि है और सुरक्षित क्षेत्र में है।

इन स्थानों पर मूलभूत सुविधाओं को विकसित कर मानकों के अनुसार आवासीय मकान एवं गौशाला निर्माण कर आवंटित किए जाने, जिन मूल/पुश्तैनी निवासियों को प्रभावित मकानों का भुगतान हो चुका है। उन्हें उनकी निजी सुरक्षित भूमि पर मकान व गौशाला निर्माण कर आवंटित करने और जिन प्रभावित मूल निवासियों के पास प्रभावित भूमि के अलावा अन्य भूमि नहीं है उन्हें राजस्व भूमि आवंटित कर मकान/गौशाला निर्माण कराने, प्रभावित होने वाले मूल/पुश्तैनी निवासी असुरक्षित भवनों की भूमि का मुआवजा नहीं लेंगें और जोशीमठ भू-धंसाव उपचार के बाद भूमि स्थिर होने पर उसी पैतृक भूमि पर मानकों के अनुसार बसावट करेंगे।

ज्ञापन में ट्रीटमेंट कार्यों को ऐरा पुल (खंचा) से मारवाड़ी तक धौली व अलकनंदा के बायीं ओर मजबूत तटबंध का निर्माण कराने, औली से शुरू करते हुए जोशीमठ के सभी वार्डों में सीवरेज एवं ड्रेनेज की समुचित करने, नगर में बहने वाले नालों का सुधारीकरण करने, भू-धंसाव प्रभावित जोशीमठ नगर क्षेत्र मे स्थित सामुदायिक भवन, मठ-मंदिर, गोचर, पनघट, घाट व पितृ विसर्जन गृह आदि को सुरक्षित करने, आपदा अधिनियम के तहत समस्त सरकारी व गैरसरकारी निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने, भूमि के क्रय-विक्रय पर प्रतिबंध लगाए जाने व जोशीमठ मे विस्थापन व पुनर्वास कार्यालय खोलने सहित कुल 13 सूत्री प्रमुख मांगें हैं।

ज्ञापन पर देवपूजाई समिति जोशीमठ, पूजा समिति रविग्राम, श्री नरसिंह नवदुर्गा सेवा समिति जोशीमठ, सांस्कृतिक परिषद रविग्राम, महिला मंगल दल अध्यक्ष नरसिंह मंदिर जोशीमठ, रविग्राम, डाडों, सिंहधार आदि के अध्यक्ष व पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं।

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