• March 7, 2026

धर्मांतरण सहित ये मुद्दें बदल सकती हैं छत्तीसगढ़ की चुनावी तस्वीर

 धर्मांतरण सहित ये मुद्दें बदल सकती हैं छत्तीसगढ़ की चुनावी तस्वीर

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 के तहत प्रदेश के 90 विधानसभा सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं। राज्य में राजनीतिक पार्टियां अपनी सत्ता स्थापित करने पूरी तरह से तैयारी में लगे हैं। इस बार की विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सत्त वापसी करने भूपेश सरकार के कथित धर्मांतरण, वन विभाग में 400 करोड़ की लूट, शिक्षा भर्ती और तबादला उद्योग जैसी मु्द्दों को लेकर सरकार को घेरना चाह रही हैै।

कांग्रेस सरकार आने के बाद तेजी से धर्मांतरण बढ़ रहा है। बस्तर के सुकमा के एसपी और बस्तर के ही कमिश्नर ने पत्र लिख कर धर्मांतरण के खतरे से आगाह किया, लेकिन कांग्रेस विधायक समेत सभी नेता मिशनरियों का समर्थन कर रहे हैं। सीएम भूपेश बघेल ने खुद दिल्ली में मुलाकात कर खुलेआम समर्थन का ऐलान किया। बस्तर के विधायक चन्दन कश्यप ने मिशनरियों को सहयोग देने का सार्वजनिक रूप से आश्वासन दिया, जबकि मिशनरियों के कारण बस्तर जल रहा है। स्थिति विस्फोटक है और कांग्रेस इसे हवा दे रही है। रोहिंग्या मुसलमानों के अवैध रूप से बसने के कारण कवर्धा में दंगे, बेमेतरा में लव जेहाद को बढ़ावा, नारायणपुर में आदिवासियों के बीच हिंसक झड़प, बिरनपुर में तेली समाज के युवक की हत्या के बाद तनाव, अम्बिकापुर में रोहिंग्या आदि को बसाया जाना, रायपुर में मिशनरी आतंक और तिरंगा जलाने की धमकी का साथ देना कांग्रेस के अपराध में शामिल है।

सांप्रदायिक हिंसा।

अक्टूबर 2021 में कबीरधाम जिले और इस साल अप्रैल में बेमेतरा जिले में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं के बाद भाजपा ने सरकार पर एक विशेष समुदाय के प्रति पक्षपात करने का आरोप लगाया. कांग्रेस ने भाजपा पर वास्तविक मुद्दों के अभाव में सांप्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगाया. राजनीति के जानकारों के मुताबिक यह घटनाएं मध्य छत्तीसगढ़ में मतदाताओं का ध्रुवीकरण कर सकती है। संविदा कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करना

यह 2018 के चुनावों में कांग्रेस द्वारा किया गया एक और प्रमुख वादा था जो अभी तक पूरा नहीं हुआ है. पिछले दो वर्षों में लगभग 1.50 लाख ‘संविदाÓ, दैनिक वेतनभोगी और आउटसोर्स कर्मचारियों ने इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया है. भाजपा ने संविदा कर्मचारियों की मांग को अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने का वादा किया है।

बुनियादी ढांचा।

भाजपा ने आरोप लगाया है कि पिछले पांच वर्षों में राज्य में बुनियादी ढांचे का विकास रुक गया है और सड़कों की हालत खराब हो गई है।

तबादला उद्योग।

प्रदेश में तबादला ने बाकायदा एक उद्योग का रूप लिया हुआ है। बाकायदा सभी पद के लिए रेट तय हैं। मलाईदार स्थानों के लिए करोड़ों में बोलियां लगाई जाती हैं, जिसमे मंथली रिचार्ज और टॉप-अप की भी सुविधाओं का जुगाड़ हो जाता है। सत्ता पक्ष से जुड़े विधायकों ने भी अनेक बार इस उद्योग की शिकायत की है।

प्रदेश में तबादला ने बाकायदा एक उद्योग का रूप लिया हुआ है। बाकायदा सभी पद के लिए रेट तय हैं। मलाईदार स्थानों के लिए करोड़ों में बोलियां लगाई जाती हैं, जिसमे मंथली रिचार्ज और टॉप-अप की भी सुविधाओं का जुगाड़ हो जाता है। सत्ता पक्ष से जुड़े विधायकों ने भी अनेक बार इस उद्योग की शिकायत की है।

16 लाख परिवारों को नहीं मिला पक्का आवास।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले 16 लाख से अधिक घरों को भूपेश बघेल ने बनने नहीं दिया। कांग्रेस सरकार की गरीबों का घर बनाने की कोई नियत नहीं थी, तभी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बहाना बनाया की इस योजना में ‘प्रधानमंत्री’ शब्द जुड़ा है, इसलिए वे घर नहीं बनने देंगे। कांग्रेस सरकार के उपमुख्यमंत्री टी एस सिंह देव ने तब इसी रवैये से त्रस्त होकर ग्रामीण विकास मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था। प्रदेश में अनेक स्थानों पर अपने आवास की प्रतीक्षा करते-करते गरीबों की मौत तक हो गयी। कांकेर में ऐसी ही एक हृदय विदारक घटना में एक ही परिवार के पांच लोगों की मृत्यु जर्जर घर के गिर जाने से हो गयी। वह परिवार भी आवास की प्रतीक्षा सूची में था और कांग्रेस सरकार के राज्यांश नहीं देने के कारण उसका घर नहीं बन पाया था।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं। 90 विधानसभा सीटों वाले प्रदेश में पहले चरण का मतदान 7 नवंबर और दूसरे चरण का मतदान 17 नवंबर को होगा। नतीजे 3 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे।

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