दृढ़ ध्यानाभ्यास से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव – स्वामी भगीरथ
संतमत के महान आचार्य 108 श्री महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज के पट शिष्य गुरु सेवी स्वामी भगीरथ जी महाराज ने कहा है कि दृढ़ ध्यानअभ्यास से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है।जिसके लिए सच्चे संत सतगुरु से युक्ति जानकर यतन करने की जरूरत है । मानस जप, मानस ध्यान तथा दृष्टि साधन की विधियों का वर्णन करते हुए कहा कि इंद्रियों को वश में कर इन क्रियाओं के माध्यम से कोई भी मनुष्य ईश्वर को पाकर सदा के लिए दुखों से छूट सकता है। वे नवादा के संत महर्षि मेही सत्संग आश्रम के स्थापना दिवस के दूसरे दिन गुरुवार को प्रवचन कर रहे थे ।
संत श्री भगीरथ दासजी महाराज ने ईश्वर स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा कि 14 इंद्रियों से अलग होकर ईश्वर को पाया जा सकता है ।जब तक जीव माया में लिपटा रहेगा। वह कभी भी ईश्वर को प्राप्त नहीं कर सकता ।जीव 84 लाख योनियों में भटक कर सदा दुख पाता रहेगा ।उन्होंने कहा कि निरंतर ध्यान अभ्यास से ही सत्संग के रास्ते पर चलकर इंसान आत्मा को परमात्मा में मिलाकर सदा दुखों से छूट सकता है ।
उन्होंने कहा कि जीव सदा सुखी रहना चाहता है लेकिन वह माया में फसकर जन्म जन्मांतर तक दुख में डूबा रहता है। माया में रहकर सुख की चाह ही जीव के दुखों का सबसे बड़ा कारण है। जिस दिन जीव माया से अलग होकर गुरु के बताए रास्ते पर चलकर ईश्वर भक्ति में लगेगा ।निश्चित तौर पर मुक्ति पाकर वह जीवन में सदा – सदा के लिए सुखी बन जाएगा ।स्वामी भगीरथ जी महाराज के साथ पहुंचे सहकर्मी स्वामी नरेशानंद जी महाराज ने कहा कि हम अपनी कुवृत्तियों को छोड़ कर ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं। सत्संग से ही ईश्वर प्राप्ति के रास्ते प्राप्त होते हैं ।इसके लिए इंसान को सदा सत्संग में प्रवृत्ति रखनी चाहिए ।सत्संग करने से ध्यान अभ्यास करने की युक्ति मिल जाती है। इस अवसर पर गुरु सभी भागीरथ स्वामी जी महाराज के शिष्य नाथू दास ने विनती ,प्रार्थना, आरती गायन किया। संतमत के कई साधुओं ने भी इस मन से ईश्वर प्राप्ति के रास्ते बताते हुए सभी ने दिल हत्या ध्यान अभ्यास को ही ईश्वर प्राप्ति का कारण बताया। इस अवसर पर नवल किशोर ,पत्रकार डॉक्टर साकेत बिहारी ,रविंद्र कुमार, दिलीप बाबा ,कृष्ण कुमार वर्मा, उमा पंडित ने सत्संग के संचालन में सहयोग किया।




