शिवमंदिरों में सावन के सोमवार के साथ ही मनाया नाग पंचमी का पर्व
सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी पर सोमवार को नाग पंचमी श्रद्धापूर्वक मनाई गई। आज सावन का सातवां सोमवार व नाग पंचमी का संयोग होने पर श्रद्धालुओं ने कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान कर पूजा अर्चना की। शहर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं ने दूध से शिवलिंग का अभिषेक किया। वहीं कुछ लोगों ने इस पावन पर्व पर रुद्राभिषेक का भी आयोजन किया।
सावन का सोमवार व नाग पंचमी के पर्व पर श्रद्धालुओं ने शिव मंदिरों व शिवालयों में पूजा-पाठ व जलाभिषेक किया। नाग देवता को लोगों ने दूध और उससे बनी मिठाइयों का प्रसाद चढ़ाया। भगवान शिव के साथ ही नाग देवता की पूजा की गई। इस पर्व पर नाग को दूध पिलाने की भी परंपरा है। ऐसे में लोगों ने दूध से बनी मिठाइयां नाग देवता को अर्पित की और प्रसाद वितरण किया। मान्यता है कि नागपंचमी पर सर्प पूजा करने से सर्पदंश का भय खत्म होता है। नाग पूजन से उनकी कृपा प्राप्त होती है जिससे धन धान्य भी मिलता है। हमारे देश में नाग पूजा का व्यवहारिक महत्व भी है। नागपंचमी के आसपास सर्प बहुत निकलते हैं क्योंकि बरसात का पानी गिरने से वह उनके बिलों में भर जाता है। ये सांप घरों में भी पहुंच जाते है। इनसे सुरक्षा की भावना लिए लोग सांपों-नागों की पूजा करते हैं। खास बात यह है कि सर्प चूहों को खा जाते हैं जिसके कारण खेतों में फसल की रक्षा होती है। इसलिए भी लोग नागों की पूजा करते हैं। आज के दिन मुख्यतरू वासुकी नाग, शेषनाग और तक्षक नाग की प्रमुख रूप से पूजा की गई।




