प्लास्टिक प्रदूषण से नदियों की भयावह स्थिति, विभागीय अधिकारियों की टूटी नींद
उत्तर प्रदेश में नदियों की स्वच्छता के दावे करने वाले सिंचाई व जलसंसाधन विभाग के प्लास्टिक प्रदूषण पर सारे दावों की पोल खुल जाती है। प्लास्टिक प्रदूषण से नदियों की स्थिति भयावह हो चुकी है। अब विभागीय अधिकारियों की प्लास्टिक प्रदूषण पर नींद टूटी है।
उत्तर प्रदेश से लगे हुए पहाड़ी क्षेत्र में बारिश के बाद गंगा, घाघरा नदियों में जल प्रवाह तेज है। इसके कारण छोटी नदियों में भी जल भराव की स्थिति है। नदियों में जल की मात्रा बढ़ने पर उसमें पड़ी गंदगियां और प्लास्टिक के टुकड़े ऊपर आ गये है। नदियों के किनारे एकत्रित होते मिल रहे हैं। गोरखपुर में राप्ति नदी में जल बढ़ा हुआ है और उसके कारण नदी किनारे मिट्टी में दबी हुई प्लास्टिक की थैलियां, पुरानी बोतलें तैरती हुई ऊपर आ गयी है।
लखनऊ में गोमती नदी में प्लास्टिक प्रदूषण ही है कि पक्का पुल से डालीगंज पुल के बीच नदी में प्लास्टिक तैरती हुई दिख जाती है। प्लास्टिक से फैलने वाले प्रदूषण को दूर करने के लिए सामाजिक संगठन बार बार अपील करते रहे हैं, बावजूद आजतक गोमती नदी में प्लास्टिक प्रदूषण रोकने पर ठोस कार्य नहीं हो सका। गोमती नदी की स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब उसमें प्राइवेट नर्सिंग होम के संचालकों द्वारा चोरी छुपे मेडिकल में उपयोग की गयी वस्तुओं को बहाया जाता है। जो नदी के जल में रहने वाले जीव जन्तुओं को खासा नुकसान पहुंचाता है।
जलशक्ति विभाग के मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने बीते दिनों सिंचाई व जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ नदियों के प्रदूषण को लेकर चिंतन बैठक की थी। जलशक्ति विभाग के मंत्री ने अधिकारियों को मशीनरी के उपयोग से प्लास्टिक प्रदूषण को दूर करने की तकनीक बतायी थी।
सिंचाई व जलसंसाधन विभाग के विभागाध्यक्ष अनिल कुमार सहित अधिकारियों की अब प्लास्टिक प्रदूषण को लेकर नींद टूटी है। विभाग अपने स्तर पर प्लास्टिक प्रदूषण रोकने के लिए प्रचार प्रसार शुरु कर दिया है। नदियों के निकट बने विभागीय खंडों के अधिकारियों को नदी प्रदूषण करने वालों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कानूनी रुप से कार्यवाही करने के निर्देश भी दे रहे हैं।




