• June 29, 2026

’90 के दशक में स्टार एक्टर्स उड़ाते थे मजाक’, रवि किशन ने बयां किया 34 साल के संघर्ष का सफर

नई दिल्ली: भोजपुरी सिनेमा से लेकर बॉलीवुड और ओटीटी तक अपनी दमदार पहचान बनाने वाले अभिनेता रवि किशन ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बड़ा खुलासा किया है। प्राइम वीडियो के रियलिटी शो ‘The Alliance’ में बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि 1990 के दशक में जब कई अभिनेता स्टार बन रहे थे, तब उन्हें अक्सर नजरअंदाज किया जाता था और उनका मजाक उड़ाया जाता था।

‘मैं पूरी तरह तैयार था, फिर भी पीछे रह गया’

शो के दौरान साथी प्रतियोगियों से बातचीत में रवि किशन ने कहा कि उन्होंने अभिनय की दुनिया में खुद को स्थापित करने के लिए वर्षों तक मेहनत की। उन्होंने थिएटर किया, डांस सीखा, घुड़सवारी का प्रशिक्षण लिया और हिंदी-उर्दू के साथ अपनी आवाज पर भी लगातार काम किया। रवि किशन ने कहा, “मैं पूरी तरह तैयार था। मेरे पास एक अभिनेता के लिए जरूरी लगभग हर हुनर था, लेकिन इसके बावजूद मैं पीछे रह गया, जबकि दूसरे कलाकार आगे बढ़ते गए। तब मैं खुद से यही कहता था कि अगर उनका समय आया है तो एक दिन मेरा भी आएगा। हालांकि मुझे यह नहीं पता था कि उस दिन का इंतजार 34 साल लंबा होगा।”

34 साल बाद मिला पहचान का मुकाम

अभिनेता ने बताया कि लंबे संघर्ष के बाद आखिरकार उन्हें वह सम्मान मिला, जिसका वे वर्षों से इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब उन्हें बड़े अवॉर्ड समारोहों में भी नहीं बुलाया जाता था, लेकिन बाद में उनकी परफॉर्मेंस को जबरदस्त सराहना मिली और उन्होंने ‘बेस्ट एक्टर’ समेत कई सम्मान अपने नाम किए। रवि किशन के अनुसार, “जिस मंच पर कभी मुझे बुलाया नहीं जाता था, उसी मंच पर बाद में मुझे सम्मानित किया गया। लोगों को भरोसा नहीं था कि मैं इतना आगे जा पाऊंगा, लेकिन आज मैं यहां तक पहुंचा हूं।” उनकी संघर्ष और धैर्य से भरी कहानी सुनकर शो के अन्य प्रतियोगी भी भावुक हो गए और उन्होंने रवि किशन के सफर की सराहना की।

90 के दशक में की थी करियर की शुरुआत

रवि किशन ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1990 के दशक में ‘पीतांबर’, ‘आतंक’, ‘आर्मी’ और ‘जख्मी दिल’ जैसी हिंदी फिल्मों से की थी। हालांकि शुरुआती दौर में उन्हें बॉलीवुड में सीमित सफलता मिली, लेकिन बाद में भोजपुरी सिनेमा ने उन्हें नई पहचान दिलाई। ‘सैंया हमार’, ‘पंडित जी बताई ना बियाह कब होई’ जैसी सुपरहिट फिल्मों के जरिए वे भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे लोकप्रिय सितारों में शामिल हो गए।

बॉलीवुड और ओटीटी पर भी छोड़ी मजबूत छाप

हाल के वर्षों में रवि किशन ने हिंदी फिल्मों और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया है। ‘लापता लेडीज’ में उनकी अदाकारी को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा, जबकि ‘खाकी: द बिहार चैप्टर’ जैसी वेब सीरीज में उनके प्रदर्शन ने उन्हें एक सशक्त और बहुमुखी अभिनेता के रूप में स्थापित किया। आज रवि किशन का सफर इस बात का उदाहरण माना जाता है कि लगातार मेहनत, धैर्य और अपने हुनर पर भरोसा रखने से सफलता देर से ही सही, लेकिन जरूर मिलती है।

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