• January 19, 2026

वैश्विक तनाव की तपिश से पिघला बाजार: चांदी ने पहली बार छुआ 3 लाख का जादुई आंकड़ा, सोने ने भी रचा नया इतिहास

नई दिल्ली: वैश्विक अर्थव्यवस्था में छाई अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय सर्राफा बाजार में एक ऐसी सुनामी ला दी है, जिसकी कल्पना कुछ समय पहले तक असंभव जान पड़ती थी। सुरक्षित निवेश के तौर पर निवेशकों की पहली पसंद माने जाने वाले सोने और चांदी ने सोमवार को कारोबार की शुरुआत होते ही उन तमाम कयासों को धता बता दिया, जिनमें कीमतों के गिरने या स्थिर होने की उम्मीद जताई जा रही थी। सोमवार का दिन भारतीय कमोडिटी मार्केट (MCX) के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया, क्योंकि पहली बार चांदी की कीमतों ने 3 लाख रुपये प्रति किलो के मनोवैज्ञानिक और ऐतिहासिक स्तर को पार कर लिया।

बाजार के जानकारों का मानना था कि ऊंचे भावों पर मुनाफावसूली हावी होगी, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों ने इन अनुमानों को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है। वर्तमान में जिस तरह की तेजी देखी जा रही है, वह न केवल निवेशकों को हैरान कर रही है बल्कि आम उपभोक्ताओं के लिए भी चिंता का विषय बन गई है। चांदी का मार्च वायदा एमसीएक्स पर देखते ही देखते ₹13,550 यानी लगभग 5 फीसदी से ज्यादा के उछाल के साथ ₹3,01,315 प्रति किलो के अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। यह उछाल इतना तीव्र था कि कारोबारियों को अपनी स्क्रीन पर बदलते आंकड़ों पर यकीन करना मुश्किल हो रहा था।

चांदी की रिकॉर्ड तोड़ दौड़ और जनवरी का ऐतिहासिक प्रदर्शन

अगर हम चांदी की कीमतों के सफर पर नजर डालें, तो साल 2025 में आई जोरदार तेजी के बाद ऐसा लग रहा था कि 2026 में बाजार थोड़ा शांत रहेगा, लेकिन वास्तविकता इसके ठीक उलट रही। चांदी ने नए साल की शुरुआत किसी रॉकेट की तरह की है। सिर्फ जनवरी के शुरुआती 19 दिनों के भीतर ही चांदी की कीमतों में जो वृद्धि हुई है, वह किसी भी वित्तीय वर्ष के पूरे औसत से कहीं अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक, इस एक महीने में अब तक चांदी के दाम ₹65,614 प्रति किलो तक बढ़ चुके हैं।

यदि हम पिछले साल के आखिरी दिन यानी 31 दिसंबर 2025 की स्थिति को देखें, तो उस समय एक किलो चांदी का भाव ₹2,35,701 के करीब था। महज दो से तीन हफ्तों के अंतराल में यह उछलकर ₹3,01,315 के पार पहुंच जाना इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर चांदी की औद्योगिक मांग और निवेश मांग दोनों ही अपने चरम पर हैं। चांदी की इस तेजी ने बाजार के उन विश्लेषकों को भी खामोश कर दिया है जो इसे एक अस्थिर धातु मान रहे थे।

सोने की चमक ने भी फीका किया पिछला हर रिकॉर्ड

चांदी की इस ऐतिहासिक दौड़ के बीच सोने ने भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पीली धातु, जिसे दुनिया भर में संकट का साथी माना जाता है, ने सोमवार को एक बार फिर अपनी उपयोगिता और ताकत को साबित किया। एमसीएक्स पर फरवरी वायदा सोना, जो पिछले शुक्रवार को ₹1,42,517 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ था, सोमवार को बाजार खुलते ही एक बड़े ‘गैप-अप’ के साथ ₹1,45,500 प्रति 10 ग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर जा पहुंचा। एक ही कारोबारी सत्र में करीब ₹2,983 की यह भारी बढ़त दर्शाती है कि बाजार में इस समय किस कदर ‘फोमो’ (छूट जाने का डर) का माहौल बना हुआ है।

सोने की कीमतों में आई इस तेजी का आकलन अगर नए साल की शुरुआत से किया जाए, तो 31 दिसंबर 2025 को सोना ₹1,35,804 प्रति 10 ग्राम पर था। वर्तमान स्तर को देखते हुए मात्र 20 दिनों के भीतर सोना ₹9,696 प्रति 10 ग्राम तक महंगा हो चुका है। यह तेजी मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ा झटका है, खासकर उनके लिए जिनके घरों में आने वाले महीनों में शादियां तय हैं। सर्राफा बाजारों में सन्नाटा तो नहीं है, लेकिन ग्राहकों की आंखों में कीमतों को लेकर एक अविश्वास और डर साफ देखा जा सकता है।

वैश्विक राजनीति और ट्रंप की धमकी का गहरा असर

इस अभूतपूर्व तेजी के पीछे के कारणों की जब पड़ताल की जाती है, तो सुई घूम-फिरकर वैश्विक राजनीति की बिसात पर आकर टिक जाती है। बाजार के वरिष्ठ विशेषज्ञों का विश्लेषण कहता है कि इस समय पूरी दुनिया की निगाहें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर टिकी हैं। हाल ही में ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर दी गई टैरिफ धमकी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों में बड़े बदलाव के संकेतों ने वैश्विक बाजारों में हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और कड़े व्यापारिक प्रतिबंधों की आशंका ने दुनिया भर की मुद्राओं में अस्थिरता पैदा की है, जिसके चलते डॉलर के मुकाबले अन्य संपत्तियों का आकर्षण बढ़ा है।

जब भी दुनिया में युद्ध जैसी स्थिति, व्यापारिक टकराव या राजनीतिक अस्थिरता पैदा होती है, तब निवेशक इक्विटी मार्केट या अन्य जोखिम भरे निवेश विकल्पों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकानों की तलाश करते हैं। सोना और चांदी सदियों से ‘सेफ हेवन’ यानी सुरक्षित निवेश के सबसे विश्वसनीय विकल्प रहे हैं। वर्तमान में ग्रीनलैंड को लेकर पैदा हुए नए भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को इस कदर आशंकित कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर सोना-चांदी खरीदने को तैयार हैं। यही कारण है कि मांग और आपूर्ति का संतुलन पूरी तरह से मांग के पक्ष में झुक गया है, जिससे कीमतों में यह अनियंत्रित उछाल देखने को मिल रहा है।

घरेलू बाजार पर प्रभाव और भविष्य की राह

भारतीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों का सीधा संबंध न केवल अंतरराष्ट्रीय भावों से है, बल्कि डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति से भी जुड़ा होता है। चूंकि भारत अपनी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाली कोई भी छोटी हलचल यहां बड़ा प्रभाव डालती है। वर्तमान में जिस तरह से कीमतें 3 लाख (चांदी) और 1.45 लाख (सोना) के पार निकली हैं, उससे स्थानीय ज्वेलर्स और छोटे व्यापारियों के लिए भी संकट खड़ा हो गया है। स्टॉक रखने की लागत बढ़ गई है और मांग में अचानक आई इस तेजी ने आपूर्ति श्रृंखला को भी प्रभावित किया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक तनाव इसी तरह जारी रहा और व्यापारिक युद्ध के बादल और गहरे हुए, तो आने वाले समय में ये कीमतें अभी और ऊंचे स्तरों को छू सकती हैं। हालांकि, इतनी बड़ी तेजी के बाद तकनीकी रूप से एक छोटे सुधार (करेक्शन) की उम्मीद हमेशा बनी रहती है, लेकिन बाजार का वर्तमान सेंटीमेंट इतना मजबूत है कि किसी भी गिरावट को तुरंत खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, 2026 का यह साल धातु बाजार के लिए एक ‘सुपर साइकिल’ की तरह साबित हो रहा है, जहां हर बीतता दिन एक नया इतिहास रच रहा है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की इस भारी अस्थिरता को देखते हुए अत्यंत सावधानी के साथ कदम उठाएं।

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