• March 20, 2026

मिशन 2026 का आगाज़: इसरो अध्यक्ष ने तिरुपति में टेका माथा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अपने नए साल के पहले बड़े मिशन के लिए पूरी तरह तैयार है। शनिवार को इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन ने आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर का दौरा किया। यह दौरा केवल एक व्यक्तिगत यात्रा नहीं थी, बल्कि आगामी पीएसएलवी-सी62 मिशन की सफलता के लिए एक आध्यात्मिक प्रार्थना थी। भारतीय अंतरिक्ष अभियानों की यह एक अनूठी परंपरा रही है कि किसी भी बड़े प्रक्षेपण से पहले इसरो प्रमुख मंदिर जाकर आशीर्वाद लेते हैं। नारायणन के साथ इसरो के वरिष्ठ अधिकारियों का एक दल भी मौजूद था। मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान, उन्होंने पीएसएलवी-सी62 प्रक्षेपण यान की एक छोटी प्रतिकृति (मिनिएचर मॉडल) को भगवान के चरणों में रखा, जो वैज्ञानिक पुरुषार्थ और आध्यात्मिक विश्वास के सुंदर संगम को दर्शाता है। यह मिशन न केवल इसरो के लिए वर्ष का पहला प्रक्षेपण है, बल्कि यह अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की वैश्विक स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

पीएसएलवी-सी62 मिशन का विवरण: 12 जनवरी को भरेगा उड़ान

मंदिर दर्शन के उपरांत पत्रकारों से औपचारिक बातचीत करते हुए इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन ने मिशन के महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने घोषणा की कि पीएसएलवी-सी62 मिशन 12 जनवरी को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन का प्राथमिक उद्देश्य ईओएस-एन1 (EOS-N1) नामक ‘पृथ्वी अवलोकन उपग्रह’ को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित करना है।

अध्यक्ष ने बताया कि इस महत्वपूर्ण उपग्रह के साथ 14 अन्य छोटे पेलोड्स (उपग्रह) भी अंतरिक्ष की यात्रा पर जाएंगे। मिशन की जटिलता को देखते हुए, वैज्ञानिकों ने इसे ध्रुवीय सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा (Polar Sun-Synchronous Orbit) में स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। यह कक्षा पृथ्वी के अवलोकन के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है क्योंकि यह उपग्रह को हर बार एक ही सौर समय पर पृथ्वी के विशिष्ट हिस्सों के ऊपर से गुजरने की अनुमति देती है, जिससे डेटा का सटीक मिलान हो पाता है।

उलटी गिनती और प्रक्षेपण की प्रक्रिया

अंतरिक्ष विज्ञान में ‘काउंटडाउन’ या उलटी गिनती का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। वी. नारायणन ने बताया कि इस मिशन के लिए 25 घंटे की उलटी गिनती 11 जनवरी से शुरू हो जाएगी। इस दौरान रॉकेट के सभी इंजनों, ईंधन प्रणालियों और नियंत्रण प्रणालियों की अंतिम जांच की जाएगी। पीएसएलवी-सी62 का प्रक्षेपण इसरो के ‘वर्कहॉर्स’ कहे जाने वाले पीएसएलवी रॉकेट की 64वीं उड़ान होगी।

योजना के अनुसार, रॉकेट के उड़ान भरने के लगभग 17 मिनट बाद, ईओएस-एन1 और उसके साथ जा रहे अन्य सह-यात्री उपग्रहों को उनकी लक्षित कक्षा में तैनात कर दिया जाएगा। यह 17 मिनट का समय इसरो के वैज्ञानिकों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि इसी दौरान रॉकेट के विभिन्न चरण अलग होते हैं और उपग्रह अपनी स्वतंत्र यात्रा शुरू करते हैं।

ईओएस-एन1 पेलोड और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

इस मिशन की एक बड़ी विशेषता इसका अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप है। पीएसएलवी-सी62 का मुख्य पेलोड, ईओएस-एन1, थाईलैंड और यूनाइटेड किंगडम (UK) के सहयोग से निर्मित एक अत्याधुनिक ‘पृथ्वी अवलोकन उपग्रह’ है। यह उपग्रह उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली तस्वीरें और डेटा प्रदान करने में सक्षम है, जिसका उपयोग कृषि, आपदा प्रबंधन, वन सर्वेक्षण और शहरी नियोजन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाएगा।

इसरो अध्यक्ष ने गर्व के साथ साझा किया कि इस मिशन के सफल होने के साथ ही भारतीय धरती से प्रक्षेपित किए गए विदेशी उपग्रहों की कुल संख्या 442 हो जाएगी। यह आंकड़ा भारत की उस बढ़ती क्षमता का प्रमाण है, जहां दुनिया के विकसित देश भी कम लागत और उच्च सटीकता के लिए भारतीय प्रक्षेपण यानों पर भरोसा कर रहे हैं। भारत अब केवल एक अंतरिक्ष अन्वेषण देश नहीं, बल्कि एक प्रमुख वैश्विक अंतरिक्ष सेवा प्रदाता बन चुका है।

पीएसएलवी की गौरवशाली विरासत: 63 सफल उड़ानों का सफर

पीएसएलवी (Polar Satellite Launch Vehicle) ने भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है। अब तक पूरी की गई 63 उड़ानों में इस रॉकेट ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित मिशनों को अंजाम दिया है। नारायणन ने याद दिलाया कि पीएसएलवी ने ही भारत के पहले चंद्रमा मिशन चंद्रयान-1, मंगल ग्रह के लिए ऐतिहासिक मंगल ऑर्बिटर मिशन (MOM) और सूर्य का अध्ययन करने वाले पहले भारतीय मिशन आदित्य-एल1 को उनकी कक्षाओं तक पहुँचाया था।

पीएसएलवी की सफलता की दर और इसकी विश्वसनीयता इसे दुनिया के सबसे भरोसेमंद रॉकेटों की श्रेणी में खड़ा करती है। पीएसएलवी-सी62 की सफलता इस गौरवशाली श्रृंखला को और आगे बढ़ाएगी और भविष्य के ‘गगनयान’ जैसे मानव मिशनों के लिए वैज्ञानिकों के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई प्रदान करेगी।

नए साल के पहले प्रक्षेपण का महत्व

वर्ष 2026 का यह पहला मिशन इसरो के आगामी कैलेंडर के लिए टोन सेट करेगा। पीएसएलवी-सी62 की सफलता से न केवल तकनीकी अनुभव प्राप्त होगा, बल्कि यह विदेशी मुद्रा अर्जन और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इसरो इस वर्ष कई अन्य महत्वपूर्ण मिशनों की योजना बना रहा है, जिसमें स्वदेशी संचार उपग्रह और अंतरिक्ष स्टेशन की दिशा में प्रारंभिक परीक्षण शामिल हैं।

इसरो अध्यक्ष ने अंत में विश्वास जताया कि पूरी टीम की मेहनत और ईश्वर के आशीर्वाद से 12 जनवरी का प्रक्षेपण पूरी तरह सफल रहेगा। पूरी दुनिया की नजरें एक बार फिर श्रीहरिकोटा की ओर होंगी, जब पीएसएलवी का शक्तिशाली इंजन भारतीय सपनों को लेकर अंतरिक्ष की गहराइयों में गर्जना करेगा।

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