भोपालः गल्ला मंडियों में आज होगा वयस्क बीसीजी टीकाकरण
राजधानी भोपाल स्थित सब्जी मण्डी और गल्ला मंडी में आज (गुरुवार को) वयस्क बीसीजी टीकाकरण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इनमें गल्ला मंडी एवं सब्जी मंडी में काम करने वाले श्रमिकों एवं व्यापारियों को बीसीजी का टीका लगाया जाएगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि गल्ला मंडी प्रांगण में सुबह 11 बजे से 2.30 और सब्जी मंडी में सुबह 9 बजे से 12 बजे तक शिविर आयोजित होगा। उन्होंने बताया कि पूर्व में श्रमिक पीठों पर आयोजित शिविरों में 1851 लोगों को बीसीजी का टीका लगाया जा चुका है। रैन बसेरे में रहने वाले लोगों को भी बीसीजी का टीका लगाने के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
वयस्क बीसीजी टीकाकरण अभियान के तहत भोपाल जिले में लगभग 38 हजार लोगों को टीके लग चुके हैं। जिन लोगों को ये टीके लगें हैं, उन्हें टीबी बीमारी के लिए पर्याप्त सुरक्षा मिल सकेगी। कार्यक्रम के तहत 18 साल से अधिक उम्र के 6 विभिन्न श्रेणी के लोगों को बीसीजी का टीका लगाया जा रहा है।
वयस्क टीबी वैक्सीनेशन के लिए 6 विभिन्न श्रेणी के लोगों को सम्मिलित किया गया है। जिसमें ऐसे लोग जिन्हें पिछले 5 सालों में टीबी रही हो, रोगी परिजन जो टीबी रोगी के संपर्क में रहे हो, 60 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति, धूम्रपान करने वाला व्यक्ति, मधुमेह के मरीज, 18 से कम बीएमआई या कुपोषित व्यक्ति शामिल किए गए हैं। टीका लगवाने वालों को कोविन की तर्ज पर टीबी विन पोर्टल से टीकाकरण प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि बीसीजी पूरी तरह सुरक्षित टीका है। इस टीके के सुरक्षित होने का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि जन्म के तत्काल बाद भी बच्चे को यही टीका लगाया जाता है। बीसीजी का जो टीका वयस्कों को लगाया जा रहा है, वही टीका और वही मात्रा बच्चों को भी लगाई जाती है। यह वैक्सीन बच्चों को टीबी के गंभीर रूपों से बचाती है। वयस्कों में बीसीजी टीके की अतिरिक्त डोज उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर अगले 10 से 15 साल तक इस बीमारी से बचाव कर सकती है। मॉडल स्टडीज के अनुसार टीबी वैक्सीनेशन से हर साल टीबी के प्रकरणों को 17% तक कम किया जा सकता है।
दुनियाभर में संक्रमण रोगों से होने वाली मौतों में टीबी सबसे ज़्यादा जिम्मेदार है। टीबी के बोझ को कम करने के प्रभावी उपायों में से टीका एक ऐसा उपाय है जिससे टीबी के नए मामलों को रोका जा सकता है। डर टीके से नहीं, बीमारी का होना चाहिए। टीके की जानकारी और इसे लगवाने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ता अथवा स्वास्थ्य संस्था से जानकारी ली जा सकती है।



