भारत-जर्मनी संबंधों में नई ऊर्जा: प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने साबरमती आश्रम में गांधी को दी श्रद्धांजलि, पतंग महोत्सव का किया आगाज
अहमदाबाद: भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों के इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज अपनी दो दिवसीय आधिकारिक भारत यात्रा के पहले चरण में सोमवार को ऐतिहासिक शहर अहमदाबाद पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष निमंत्रण पर 12 और 13 जनवरी 2026 को हो रही यह यात्रा चांसलर मर्ज की पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनके आगमन के साथ ही इस उच्च-स्तरीय दौरे की शुरुआत हुई, जिसमें भारतीय संस्कृति की झलक और कूटनीतिक गंभीरता का अद्भुत संतुलन देखने को मिला। प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज ने दिन की शुरुआत साबरमती के तट से की, जहाँ शांति, अहिंसा और उत्सव का संगम दिखाई दिया।
साबरमती आश्रम में गांधीवादी दर्शन को नमन और अटूट शांति का संदेश
सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज साबरमती आश्रम पहुंचे। साबरमती आश्रम, जो महात्मा गांधी की कर्मस्थली और भारत के स्वतंत्रता संग्राम का हृदय रहा है, आज दो वैश्विक नेताओं की मुलाक़ात का साक्षी बना। प्रधानमंत्री मोदी ने चांसलर मर्ज का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें आश्रम के ऐतिहासिक महत्व से रूबरू कराया। दोनों नेताओं ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और पूरी श्रद्धा के साथ उन्हें नमन किया। इस दौरान एक विशेष क्षण तब आया जब चांसलर मर्ज ने महात्मा गांधी की तस्वीर पर पारंपरिक सूत चढ़ाकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जो गांधीवादी मूल्यों के प्रति उनके गहरे सम्मान को दर्शाता है।
आश्रम के शांत वातावरण में भ्रमण करने के बाद चांसलर मर्ज ने आगंतुक पुस्तिका (गेस्ट बुक) में एक बेहद मर्मस्पर्शी संदेश लिखा। उन्होंने गांधीजी के दर्शन की वैश्विक प्रासंगिकता पर जोर देते हुए दर्ज किया कि महात्मा गांधी की अहिंसा की अवधारणा, स्वतंत्रता की शक्ति में उनका अडिग विश्वास और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा में उनकी अटूट आस्था आज भी दुनिया भर के लोगों को प्रेरित करती है। चांसलर ने आगे लिखा कि यह मानसिकता न केवल न्याय और संवाद को बढ़ावा देती है, बल्कि संघर्षों से जूझती दुनिया में आशा की एक नई किरण भी जगाती है। उनके अनुसार, वर्तमान वैश्विक उथल-पुथल के दौर में गांधीजी के आदर्शों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है।
साबरमती रिवरफ्रंट पर अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026 का भव्य उद्घाटन
साबरमती आश्रम के आध्यात्मिक अनुभव के बाद, सुबह 10:00 बजे दोनों नेता साबरमती रिवरफ्रंट पहुंचे, जहाँ उन्होंने ‘अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026’ का आधिकारिक उद्घाटन किया। गुजरात का यह प्रसिद्ध महोत्सव इस बार जर्मन चांसलर की उपस्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी अधिक चर्चा में रहा। प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज ने जब एक साथ रिवरफ्रंट पर प्रवेश किया, तो वहां मौजूद जनता ने उनका जोरदार उत्साह के साथ स्वागत किया। दोनों नेताओं ने हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन स्वीकार किया और आसमान में तैरती हजारों रंग-बिरंगी पतंगों का आनंद लिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि यह पतंग महोत्सव केवल एक खेल नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध और जीवंत सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि इस वर्ष के महोत्सव में न केवल भारत के विभिन्न राज्यों से बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया है, जो इसे एक वैश्विक मंच प्रदान करता है। चांसलर मर्ज ने पतंगों की विविध आकृतियों और रंगों को देखकर भारतीय कारीगरी की सराहना की। यह आयोजन इस बात का प्रमाण था कि भारत अपनी कूटनीति को केवल बंद कमरों की बैठकों तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे लोक उत्सवों के माध्यम से जनता तक ले जाता है।
महात्मा मंदिर में द्विपक्षीय वार्ता और भविष्य की रणनीतिक साझेदारी
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संपन्न होने के बाद, कूटनीतिक गतिविधियों का केंद्र गांधीनगर स्थित ‘महात्मा मंदिर’ बन गया। सुबह 11:05 बजे प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज के बीच एक उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठक शुरू हुई। इस वार्ता में भारत और जर्मनी के बीच रक्षा सहयोग, हरित ऊर्जा, सेमीकंडक्टर निर्माण और व्यापारिक बाधाओं को दूर करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों देशों ने यूक्रेन संकट और मध्य पूर्व के तनावपूर्ण हालात सहित विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।
दोपहर 12:20 बजे दोनों नेताओं ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मनी को भारत का एक अत्यंत विश्वसनीय और महत्वपूर्ण भागीदार बताया, जबकि चांसलर मर्ज ने भारत की आर्थिक प्रगति और वैश्विक मंच पर इसकी बढ़ती भूमिका की प्रशंसा की। प्रेस संबोधन के दौरान चांसलर ने स्पष्ट किया कि जर्मनी भारत के साथ तकनीक हस्तांतरण और नवाचार के क्षेत्र में लंबी अवधि की साझेदारी के लिए प्रतिबद्ध है।
ऐतिहासिक धरोहरों का भ्रमण और कौशल विकास पर संवाद
अहमदाबाद के व्यस्त कूटनीतिक कार्यक्रम के बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने चांसलर मर्ज को गुजरात की स्थापत्य कला से परिचित कराने के लिए ऐतिहासिक ‘अडालज की बावड़ी’ के भ्रमण की योजना भी बनाई। दोपहर 2:20 बजे दोनों नेताओं ने इस प्राचीन जल प्रबंधन संरचना का दौरा किया। यहाँ की नक्काशी और वास्तुकला ने जर्मन प्रतिनिधिमंडल को काफी प्रभावित किया। यह दौरा भारत की प्राचीन इंजीनियरिंग और विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करने का एक प्रयास था।
दिन का अंतिम और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कार्यक्रम शाम 5:30 बजे ‘हाउस ऑफ एमजी’ में आयोजित किया गया। यहाँ दोनों नेताओं ने कौशल विकास (Skill Development) पर केंद्रित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। जर्मनी अपने ‘वोकेशनल ट्रेनिंग’ मॉडल के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, और भारत अपनी विशाल युवा आबादी को कुशल बनाने के लिए जर्मनी के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। इस कार्यक्रम में भारतीय छात्रों और उद्यमियों के लिए जर्मनी में अवसरों और भारत में जर्मन उद्योगों की जरूरतों पर सार्थक चर्चा हुई।
बंगलूरू की ओर प्रस्थान और तकनीकी सहयोग का भविष्य
अहमदाबाद का सफल दौरा पूरा करने के बाद, चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का अगला पड़ाव भारत की सिलिकॉन वैली, बंगलूरू है। तय कार्यक्रम के अनुसार, मंगलवार 13 जनवरी की सुबह 8:15 बजे वे बंगलूरू के लिए प्रस्थान करेंगे। वहां सुबह 10:20 बजे केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया जाएगा। बंगलूरू में चांसलर का ध्यान मुख्य रूप से ‘हाई-टेक’ सहयोग पर केंद्रित रहेगा।
बंगलूरू प्रवास के दौरान, चांसलर मर्ज सुबह 11:20 बजे प्रसिद्ध जर्मन इंजीनियरिंग कंपनी ‘बॉश’ (Bosch) के अडुगोडी कैंपस का दौरा करेंगे, जहाँ वे भारत में जर्मन तकनीकी नवाचारों की प्रगति का जायजा लेंगे। इसके बाद दोपहर 1:30 बजे वे भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के ‘नैनो साइंस एंड इंजीनियरिंग केंद्र’ (CeNSE) का दौरा करेंगे। यह केंद्र अत्याधुनिक अनुसंधान का केंद्र है, जहाँ भारत और जर्मनी के बीच भविष्य के वैज्ञानिक सहयोग की नई राहें तलाशी जाएंगी। दोपहर 3:25 बजे चांसलर अपनी इस ऐतिहासिक यात्रा को संपन्न कर बंगलूरू से प्रस्थान करेंगे। यह दो दिवसीय यात्रा न केवल आर्थिक समझौतों के लिहाज से बल्कि भारत और जर्मनी के बीच विश्वास और मित्रता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए याद की जाएगी।