भारत-जर्मनी संबंधों का नया अध्याय: प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने साबरमती के तट पर उड़ाई दोस्ती की पतंग
अहमदाबाद: भारत और जर्मनी के बीच कूटनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के नवनियुक्त चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने आज गुजरात के अहमदाबाद में एक ऐतिहासिक मुलाकात की। चांसलर मर्ज अपनी दो दिवसीय आधिकारिक भारत यात्रा के तहत 12 जनवरी 2026 को अहमदाबाद पहुंचे, जहाँ प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। यह चांसलर मर्ज की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है, जिसे न केवल द्विपक्षीय व्यापार बल्कि भू-राजनीतिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साबरमती रिवरफ्रंट से लेकर साबरमती आश्रम तक की इस यात्रा ने भारत की सांस्कृतिक जीवंतता और ऐतिहासिक विरासत के साथ आधुनिक कूटनीति का एक अनूठा संगम प्रस्तुत किया।
साबरमती रिवरफ्रंट पर रंग-बिरंगे पतंग महोत्सव का भव्य शुभारंभ
दिन की सबसे आकर्षक तस्वीरों में से एक तब सामने आई जब प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर फ्रेडरिक मर्ज एक ही कार में सवार होकर साबरमती रिवरफ्रंट पहुंचे। सुरक्षा और प्रोटोकॉल के बीच दोनों नेताओं की इस केमिस्ट्री ने दुनिया भर का ध्यान आकर्षित किया। अवसर था ‘अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव’ के उद्घाटन का, जहाँ गुजरात की संस्कृति अपनी पूरी आभा के साथ बिखरी हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज ने संयुक्त रूप से इस महोत्सव का शुभारंभ किया। साबरमती के तट पर आसमान हजारों रंग-बिरंगी पतंगों से सराबोर था, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक एकता का संदेश दे रही थीं। इस महोत्सव में देश-विदेश के सैकड़ों प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिससे अहमदाबाद का आकाश एक वैश्विक मंच में तब्दील हो गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने चांसलर मर्ज को पतंगबाजी की परंपरा और इसके पीछे छिपे भाईचारे के संदेश के बारे में विस्तार से बताया। इस दौरान दोनों नेताओं को पतंगों की कलाकृतियों और स्थानीय कारीगरों के साथ संवाद करते देखा गया। साबरमती रिवरफ्रंट, जो प्रधानमंत्री मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक रहा है, आज अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का केंद्र बिंदु बना। महोत्सव के उद्घाटन के दौरान लोक कलाकारों ने गुजरात के पारंपरिक नृत्य और संगीत की प्रस्तुति दी, जिसने जर्मन प्रतिनिधिमंडल को भारतीय आतिथ्य सत्कार का गहरा अनुभव कराया।
साबरमती आश्रम में गांधीवादी मूल्यों को नमन और चरखे का अनुभव
पतंग महोत्सव के उल्लास के बाद दोनों नेताओं का काफिला साबरमती आश्रम पहुंचा, जो महात्मा गांधी की कर्मस्थली और भारत के स्वतंत्रता संग्राम का पवित्र केंद्र रहा है। साबरमती आश्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का स्वागत सूत की माला पहनाकर किया। दोनों नेताओं ने हृदय कुंज में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और कुछ क्षण मौन रहकर शांति के दूत को नमन किया। यह दौरा चांसलर मर्ज के लिए व्यक्तिगत रूप से भी काफी भावनात्मक रहा, क्योंकि उन्होंने पहली बार भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के मूल केंद्र को इतनी करीब से देखा।
आश्रम प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने चांसलर को उस चरखे के बारे में बताया, जो गांधीजी के स्वावलंबन और अहिंसा के सिद्धांतों का प्रतीक था। चांसलर मर्ज ने चरखे को चलाने की प्रक्रिया को बड़ी उत्सुकता से देखा और गांधीजी के विचारों की वर्तमान वैश्विक संदर्भ में प्रासंगिकता पर प्रधानमंत्री से चर्चा की। आश्रम की आगंतुक पुस्तिका (विजिटर बुक) में अपना संदेश दर्ज करते हुए चांसलर मर्ज ने गांधीजी के शांति और अहिंसा के दर्शन की सराहना की। उन्होंने लिखा कि महात्मा गांधी के विचार केवल भारत के लिए नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए एक प्रेरणा पुंज हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने चांसलर को गांधीजी की आत्मकथा और एक चरखे का स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।
द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार और सामरिक साझेदारी पर जोर
सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संपन्न होने के बाद दोनों नेताओं के बीच एक उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठक का आयोजन किया गया। इस वार्ता में भारत और जर्मनी के बीच ‘रणनीतिक साझेदारी’ को और मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य एजेंडा अक्षय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी, और रक्षा क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाना रहा। जर्मनी यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, और चांसलर मर्ज की इस यात्रा का एक बड़ा उद्देश्य जर्मन निवेश को भारत के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ की ओर आकर्षित करना है।
द्विपक्षीय चर्चाओं में कौशल विकास और शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण समझौतों पर बातचीत हुई। जर्मनी में भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलने और भारत में जर्मन तकनीक के हस्तांतरण पर दोनों देशों के बीच सहमति बनने की उम्मीद जताई गई। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान भारत की उभरती अर्थव्यवस्था और निवेश के अनुकूल वातावरण का उल्लेख करते हुए जर्मन कंपनियों को भारत में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने का निमंत्रण दिया। चांसलर मर्ज ने भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे और स्टार्टअप इकोसिस्टम की सराहना करते हुए इसे भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था का इंजन बताया।
वैश्विक सुरक्षा और यूक्रेन संकट पर गंभीर मंथन
प्रधानमंत्री मोदी और चांसलर मर्ज की यह बैठक एक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया कई मोर्चों पर संघर्ष और अनिश्चितता का सामना कर रही है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच बातचीत केवल व्यापारिक समझौतों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें वैश्विक सुरक्षा के हालातों पर भी गहन मंथन किया गया। यूक्रेन और रूस के बीच जारी लंबे संघर्ष और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर अपना स्टैंड दोहराते हुए कहा कि यह ‘युद्ध का युग नहीं है’ और बातचीत ही हर समस्या का समाधान है।
जर्मनी, जो यूरोपीय संघ की प्रमुख शक्ति है, भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थिरता लाने वाले कारक के रूप में देखता है। दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ते तनाव को कम करने और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई पर भी दोनों देशों ने एक स्वर में बात की। चांसलर मर्ज ने जी-20 की भारत की सफल अध्यक्षता और ग्लोबल साउथ की आवाज बनने की सराहना करते हुए कहा कि जर्मनी भारत के साथ मिलकर एक अधिक सुरक्षित और संतुलित दुनिया की दिशा में काम करना चाहता है।
भारत-जर्मनी भविष्य की राह और कूटनीतिक महत्व
चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की यह यात्रा भारत और जर्मनी के बीच 25 साल की रणनीतिक साझेदारी के मील के पत्थर के रूप में देखी जा रही है। साबरमती के तट से शुरू हुई यह यात्रा यह दर्शाती है कि भारत अब केवल प्रोटोकॉल आधारित कूटनीति नहीं, बल्कि ‘पर्सनल केमिस्ट्री’ और सांस्कृतिक जुड़ाव के माध्यम से वैश्विक नेताओं के साथ संबंध बना रहा है। चांसलर की अहमदाबाद यात्रा के बाद अब सबकी नजरें कल होने वाले अन्य समझौतों पर हैं, जो भारत की विकास यात्रा और जर्मनी की तकनीकी विशेषज्ञता को एक नई दिशा देंगे।
इस यात्रा के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि भारत की विदेश नीति संतुलन और मजबूती का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ एक तरफ वह अपनी विरासत का सम्मान करता है और दूसरी तरफ भविष्य की चुनौतियों के लिए वैश्विक शक्तियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलता है। चांसलर मर्ज की यह पहली भारत यात्रा दोनों देशों के बीच भविष्य के उन समझौतों की नींव रख रही है, जो आने वाले दशकों में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेंगे।