• January 20, 2026

भविष्य की चुनौतियां और सैन्य रणनीति: लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह की भारत को ‘अशांत 25 वर्षों’ की चेतावनी

जयपुर/नई दिल्ली: भारत जब ‘अमृत काल’ के माध्यम से वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की ओर अग्रसर है, तब देश की सैन्य कमान ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एक बेहद स्पष्ट और गंभीर चेतावनी जारी की है। सेना की दक्षिण-पश्चिम कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने कहा है कि भारत की अगले 25 वर्षों की यात्रा शांतिपूर्ण नहीं रहने वाली है। वैश्विक अस्थिरता और पड़ोस के अशांत माहौल को देखते हुए, उन्होंने जोर देकर कहा कि देश को विभिन्न दिशाओं से आने वाली बहुआयामी चुनौतियों के लिए कमर कसनी होगी। रक्षा मंत्रालय के विशेष पॉडकास्ट ‘रक्षा सूत्र’ में बोलते हुए जनरल सिंह ने न केवल भविष्य के खतरों का खाका खींचा, बल्कि यह भी बताया कि भारतीय सेना ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी युद्ध नीति और प्रशिक्षण के तरीकों में किस प्रकार के क्रांतिकारी बदलाव किए हैं।

वैश्विक अस्थिरता और भारत का अशांत पड़ोस

लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति का विश्लेषण करते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वर्तमान समय इतिहास का सबसे अस्थिर दौर है। उन्होंने एक चौंकाने वाला आंकड़ा साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में दुनिया के लगभग 52 देश किसी न किसी प्रकार के संघर्ष या युद्ध में उलझे हुए हैं। वैश्विक व्यवस्था तेजी से बदल रही है और शक्ति के केंद्र स्थानांतरित हो रहे हैं। इस वैश्विक उथल-पुथल का सीधा असर भारत के पड़ोस पर भी पड़ रहा है, जो पहले से ही अस्थिरता का सामना कर रहा है। जनरल सिंह के अनुसार, जब अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय वातावरण इतना अशांत हो, तो भारत जैसे उभरते हुए वैश्विक प्रभाव वाले देश के लिए सुरक्षा खतरे बढ़ना स्वाभाविक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी प्राप्त किया जा सकता है जब हमारी सीमाएं और आंतरिक सुरक्षा अभेद्य रहे।

हाइब्रिड और साइबर युद्ध: युद्ध के नए मोर्चे

भविष्य के युद्धों के स्वरूप पर चर्चा करते हुए सैन्य कमांडर ने कहा कि आने वाले समय में चुनौतियां केवल पारंपरिक आमने-सामने की लड़ाई तक सीमित नहीं रहेंगी। उन्होंने ‘हाइब्रिड युद्ध’ और ‘साइबर खतरों’ को भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया। हाइब्रिड युद्ध में दुश्मन सीधे सैन्य टकराव के बजाय छद्म युद्ध, दुष्प्रचार, आर्थिक तोड़फोड़ और तकनीकी हमलों का सहारा लेता है। इसके साथ ही, साइबर स्पेस अब युद्ध का एक नया और महत्वपूर्ण डोमेन बन गया है, जहां महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। जनरल सिंह ने चेतावनी दी कि तकनीकी मोर्चों पर दुश्मन लगातार घात लगा रहा है, और सेना को इन अदृश्य खतरों को भांपने और उन्हें विफल करने के लिए अपनी तकनीक और प्रक्रियाओं को हर पल अपडेट करना होगा। उनका कहना था कि सेना का उद्देश्य केवल प्रतिक्रिया देना नहीं, बल्कि दुश्मन से हमेशा चार कदम आगे रहना है।

रात का प्रशिक्षण और बदली हुई सैन्य रणनीति

लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने सेना की प्रशिक्षण पद्धति में किए गए एक बड़े बदलाव का खुलासा करते हुए बताया कि अब प्रशिक्षण का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा रात के समय आयोजित किया जा रहा है। यह बदलाव ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और हाल के युद्धों से मिले कड़वे अनुभवों के आधार पर किया गया है। सेना का आकलन है कि आधुनिक युद्धों में ज्यादातर बड़े खतरे और दुश्मन की हरकतें रात के अंधेरे में सामने आती हैं। यदि सेना अंधेरे में लड़ने और अपनी श्रेष्ठता बनाए रखने में सक्षम है, तो वह युद्ध का परिणाम बदलने की क्षमता रखती है। इसके अलावा, दुश्मन की निगरानी और लंबी दूरी के हमलों से बचने के लिए सेना अपने लॉजिस्टिक्स और महत्वपूर्ण भंडारण केंद्रों को अंडरग्राउंड (जमीन के नीचे) स्थानांतरित कर रही है। यह कदम सैन्य संसाधनों को सुरक्षित रखने और युद्ध के समय उनकी निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स और तकनीकी आधुनिकीकरण

आधुनिक युद्ध की जरूरतों को देखते हुए भारतीय सेना अब ‘मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स’ पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसका अर्थ है थल, जल, नभ के साथ-साथ साइबर और स्पेस के स्तर पर भी एकीकृत कार्रवाई करना। जनरल सिंह ने बताया कि आपातकालीन खरीद (Emergency Procurement) के तहत 15 अलग-अलग श्रेणियों के नए और अत्याधुनिक सैन्य उपकरण सेना के बेड़े में शामिल किए जा रहे हैं। ये उपकरण इसी साल मार्च और अप्रैल के बीच दक्षिण-पश्चिम कमान को सौंप दिए जाएंगे। इन नए हथियारों और प्रौद्योगिकियों का उद्देश्य सेना की प्रहार क्षमता को बढ़ाना और निगरानी तंत्र को अधिक सटीक बनाना है। सैन्य नेतृत्व का मानना है कि चाहे शांतिकाल हो या पूर्ण युद्ध की स्थिति, सेना को हर हाल में विजयी होकर लौटने के लिए तैयार किया जा रहा है और इसके लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी।

जयपुर में सेना दिवस का भव्य आयोजन और जन-जुड़ाव

इस वर्ष सेना दिवस (15 जनवरी) का मुख्य समारोह राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित किया जा रहा है, जो सेना के गौरव और शक्ति का प्रदर्शन होगा। लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह ने बताया कि जयपुर के जगतपुरा स्थित महल रोड पर होने वाली 78वीं सेना दिवस परेड का नेतृत्व दक्षिण-पश्चिम कमान करेगी। यह आयोजन केवल एक सैन्य परेड नहीं है, बल्कि देश के युवाओं के साथ जुड़ने का एक बड़ा माध्यम भी है। सेना ने इस आयोजन की तैयारी के तहत अब तक 108 स्कूलों और 200 कॉलेजों तक अपना संदेश पहुँचाया है। उम्मीद की जा रही है कि इस भव्य समारोह को देखने के लिए पांच से छह लाख लोग पहुंचेंगे। जनरल सिंह का मानना है कि ऐसे सार्वजनिक आयोजनों से न केवल जनता का सेना के प्रति विश्वास बढ़ता है, बल्कि युवाओं में राष्ट्र सेवा का जज्बा भी पैदा होता है।

यह विश्लेषण दर्शाता है कि भारतीय सेना भविष्य की अनिश्चितताओं को लेकर पूरी तरह सजग है और रक्षात्मक होने के बजाय एक सक्रिय और दूरदर्शी सुरक्षा रणनीति पर काम कर रही है।

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