• February 4, 2026

बजट 2026 पर छिड़ा सियासी घमासान: अश्विनी वैष्णव ने बताया ‘भविष्य की नींव’, पी. चिदंबरम ने आर्थिक रणनीति में विफलता का लगाया आरोप

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश किए जाने के साथ ही देश का राजनीतिक तापमान सातवें आसमान पर पहुँच गया है। केंद्र सरकार जहाँ इसे ‘विकसित भारत’ के संकल्प को सिद्ध करने वाला एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ बता रही है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे दिशाहीन और आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह विफल करार दिया है। बजट पेश होने के तुरंत बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शब्दों के बाण चलने शुरू हो गए, जिसमें केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने अपनी-अपनी पार्टियों के पक्ष को प्रमुखता से सामने रखा।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सरकार का बचाव करते हुए बजट की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल अगले एक साल का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह भविष्य के भारत की एक मजबूत नींव रखने वाला रोडमैप है। वैष्णव ने उन बड़ी घोषणाओं पर जोर दिया जो बुनियादी ढांचे, रेलवे और तकनीकी विकास से जुड़ी हैं। उन्होंने दावा किया कि बजट में विकास की गति को और तेज करने के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

दूसरी ओर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बजट की बारीकियों पर हमला करते हुए इसे आर्थिक नेतृत्व के स्तर पर एक बड़ी विफलता बताया। उन्होंने एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमारा निष्कर्ष स्पष्ट है—यह बजट न तो किसी ठोस आर्थिक रणनीति पर आधारित है और न ही यह एक कुशल आर्थिक राजनेता की कसौटी पर खरा उतरता है। चिदंबरम ने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री का पूरा भाषण केवल नई योजनाओं, कार्यक्रमों, मिशनों, फंडों और समितियों की संख्या बढ़ाने तक ही सीमित रहा। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जनता खुद कल्पना कर सकती है कि इनमें से कितनी कागजी योजनाएं अगले साल के बजट तक भुला दी जाएंगी।

आयकर सुधारों और टैक्स दरों में किए गए बदलावों पर भी चिदंबरम ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि आयकर अधिनियम 2026, जिसे आगामी 1 अप्रैल से लागू होना है, उसके पारित होने के महज कुछ ही महीनों बाद दरों में फेरबदल करना सरकार की अस्थिर नीति को दर्शाता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि देश की एक बहुत बड़ी आबादी आयकर के दायरे में आती ही नहीं है, इसलिए इन बदलावों का ढोल पीटने का कोई अर्थ नहीं है क्योंकि इनका आम जनता पर प्रभाव नगण्य होगा। अप्रत्यक्ष करों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आम आदमी के लिए बजट भाषण के कुछ पैराग्राफ ही मायने रखते हैं, लेकिन उनमें दी गई रियायतें इतनी मामूली हैं कि वे महंगाई के बोझ को कम करने में सक्षम नहीं हैं।

पी. चिदंबरम ने सरकार पर एक गंभीर आरोप यह भी लगाया कि उसने खुद के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने या तो आर्थिक सर्वेक्षण पढ़ा ही नहीं या फिर जानबूझकर उसमें दी गई चेतावनियों को दरकिनार कर दिया है। चिदंबरम ने वैश्विक चुनौतियों का हवाला देते हुए कहा कि बजट में अमेरिका द्वारा लगाए गए दंडात्मक टैरिफ, चीन के साथ लगातार बढ़ते व्यापार घाटे, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को लेकर बनी अनिश्चितता और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPI) द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाले जाने जैसे गंभीर मुद्दों का कोई ठोस समाधान पेश नहीं किया गया है।

बजट भाषण के दौरान संसद के माहौल पर भी चिदंबरम ने चुटकी ली। उन्होंने दावा किया कि भाषण के दौरान सत्ता पक्ष की ओर से बजाई गई तालियां भी केवल औपचारिक थीं और सदन में मौजूद कई सदस्य जल्द ही बजट की नीरसता के कारण रुचि खो बैठे थे। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि संसद टीवी का प्रसारण कुछ समय के लिए बाधित होना शायद बजट की असल स्थिति का प्रतीक था। पूर्व वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के अनुसार यह बजट देश को उन आर्थिक चुनौतियों से बाहर निकालने में सक्षम नहीं है जो वर्तमान में मध्यम वर्ग और गरीबों को परेशान कर रही हैं।

भाजपा और कांग्रेस के बीच यह जुबानी जंग आने वाले दिनों में और तेज होने की उम्मीद है, क्योंकि बजट सत्र के दौरान संसद में विस्तृत चर्चा होनी बाकी है। जहाँ सरकार विकास के आंकड़ों के दम पर अपनी पीठ थपथपा रही है, वहीं विपक्ष इसे आंकड़ों की बाजीगरी बताकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि बजट के प्रावधान धरातल पर क्या असर दिखाते हैं और जनता इस सियासी घमासान में किसे सही मानती है।

Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *