पुरी जगन्नाथ मंदिर प्रशासन का कड़ा रुख: ₹500 पार्किंग शुल्क का फैसला बरकरार
ओडिशा के पवित्र तीर्थ शहर पुरी में श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने व्यापक विरोध और राजनीतिक दबाव के बावजूद अपने उस विवादास्पद फैसले को वापस लेने से साफ इनकार कर दिया है, जिसके तहत मंदिर के गेस्ट हाउसों (भक्ता निवासों) में चारपहिया वाहनों के लिए ₹500 पार्किंग शुल्क निर्धारित किया गया है। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय मंदिर परिसर और उसके आसपास की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से लिया गया है। प्रशासन के इस अडिग रुख ने स्थानीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है, जहां विपक्षी दल इसे श्रद्धालुओं पर आर्थिक बोझ के रूप में देख रहे हैं, वहीं प्रशासन इसे एक आवश्यक प्रबंधकीय कदम बता रहा है।
नई दरें और भक्ता निवासों का विवरण
एसजेटीए द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, पुरी के ग्रैंड रोड और मंदिर के निकटवर्ती प्रमुख स्थानों पर स्थित चार प्रमुख भक्ता निवासों में अब पार्किंग शुल्क की नई दरें लागू होंगी। इनमें नीलाद्री भक्ता निवास, नीलाचल भक्ता व यात्री निवास, श्री गुंडिचा भक्ता निवास और श्री पुरुषोत्तम भक्ता निवास शामिल हैं। इन गेस्ट हाउसों में अब 24 घंटे के लिए चारपहिया वाहन पार्क करने पर ₹500 का शुल्क लिया जाएगा, जिसमें 18% जीएसटी (GST) भी शामिल है। ये सभी निवास स्थान मंदिर के बेहद करीब स्थित हैं और दूर-दराज से आने वाले तीर्थयात्रियों की पहली पसंद होते हैं। प्रशासन का तर्क है कि इन स्थानों पर सीमित जगह होने के कारण भीड़ को नियंत्रित करना और बेहतर सुविधाएं देना प्राथमिकता है।
मुख्य प्रशासक का तर्क: श्रद्धालुओं की क्षमता और विकल्पों की उपलब्धता
एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरबिंदा पाधी ने इस निर्णय का बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि यह शुल्क केवल उन लोगों के लिए है जो मंदिर के ठीक पास स्थित गेस्ट हाउसों की प्रीमियम पार्किंग का उपयोग करना चाहते हैं। पाधी के अनुसार, इन गेस्ट हाउसों में रोजाना औसतन केवल 10 वाहन ही पार्क होते हैं। उनका मानना है कि जो पर्यटक चारपहिया वाहनों से यात्रा कर रहे हैं और इन भक्ता निवासों में ठहर रहे हैं, वे ₹500 का शुल्क वहन करने की क्षमता रखते हैं।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं के लिए अन्य विकल्प भी खुले हैं। उदाहरण के तौर पर, जगन्नाथ बल्लव पार्किंग स्थल पर शुल्क मात्र ₹250 है, जहां कोई भी अपना वाहन खड़ा कर सकता है। जिन पर्यटकों के पास गेस्ट हाउस में ठहरने का आरक्षण है, उनके लिए यह अनिवार्य नहीं है कि वे वहीं पार्क करें; वे चाहें तो सस्ते सार्वजनिक पार्किंग स्थलों का उपयोग कर सकते हैं।
बीजू जनता दल (BJD) का विरोध और पर्यटकों पर असर की आशंका
इस फैसले ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। विपक्षी दल बीजू जनता दल (BJD) ने इस निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। बीजेडी के नेताओं का तर्क है कि पुरी एक तीर्थ नगरी है जहां देश-दुनिया से हर वर्ग के लोग आते हैं। पार्किंग शुल्क में इतनी भारी बढ़ोतरी से मध्यम और निम्न-मध्यम वर्ग के पर्यटकों के बजट पर सीधा असर पड़ेगा। पार्टी ने आशंका जताई है कि इस तरह के ‘महंगे’ फैसलों से आने वाले समय में तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के आगमन की संख्या में कमी आ सकती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और छोटे व्यापारियों को नुकसान होगा। बीजेडी ने इसे ‘श्रद्धालुओं की भावनाओं के विपरीत’ उठाया गया कदम बताया है।
आवास शुल्क में राहत: प्रशासन की संतुलन बनाने की कोशिश
विवादों के बीच प्रशासन ने एक राहत भरी खबर भी दी है। मुख्य प्रशासक अरबिंदा पाधी ने आश्वासन दिया है कि यद्यपि पार्किंग शुल्क बढ़ाया गया है, लेकिन भक्ता निवासों के कमरों के किराए (आवास शुल्क) में बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं है। प्रशासन का कहना है कि इन निवासों के कमरे निजी होटलों की तुलना में काफी सस्ते हैं और सरकार चाहती है कि आम श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था सुलभ बनी रहे। पार्किंग शुल्क को केवल एक ‘लॉजिस्टिक्स’ और ‘मैनेजमेंट’ शुल्क के रूप में देखा जाना चाहिए ताकि प्राइम लोकेशन पर वाहनों की अनियंत्रित भीड़ को रोका जा सके।
व्यवस्था सुधार बनाम श्रद्धालुओं की सुविधा
यह पूरा विवाद अब ‘बेहतर व्यवस्था बनाम सस्ती सुविधा’ के बीच की बहस बन चुका है। प्रशासन का मानना है कि पुरी जैसे व्यस्त शहर में, जहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं, वहां मुख्य सड़कों (ग्रैंड रोड) के पास स्थित पार्किंग स्थलों को महंगा रखना भीड़ प्रबंधन का एक तरीका है। दूसरी ओर, आलोचकों का कहना है कि मंदिर प्रशासन को व्यावसायिक दृष्टिकोण अपनाने के बजाय सेवा भाव को प्राथमिकता देनी चाहिए। फिलहाल, एसजेटीए ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने फैसले से पीछे नहीं हटेगा, जिससे यह तय है कि आने वाले समय में पुरी आने वाले चारपहिया वाहन स्वामियों को अपनी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी।