पीएसएलवी-सी62 मिशन: इसरो के लिए चुनौतीपूर्ण रहा सोमवार, लेकिन मिशन की विफलता के बीच स्पेनिश ‘किड’ कैप्सूल ने जगाई आंशिक सफलता की उम्मीद
बेंगलुरु: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए बीता सोमवार उम्मीदों और चुनौतियों का एक मिला-जुला दिन साबित हुआ। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरने वाला इसरो का भरोसेमंद रॉकेट पीएसएलवी-सी62 तकनीकी खराबी के कारण अपने गंतव्य तक नहीं पहुँच सका। रॉकेट के तीसरे चरण के अंत में आई अप्रत्याशित बाधा ने मिशन को पटरी से उतार दिया और अंततः इसे असफल घोषित करना पड़ा। हालांकि, इस विफलता की धुंध के बीच अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग की एक चमकती हुई खबर सामने आई है। इस मिशन के साथ भेजे गए स्पेन के ‘किड री-एंट्री कैप्सूल’ (KID Re-entry Capsule) के बारे में दावा किया गया है कि वह न केवल सुरक्षित है, बल्कि अंतरिक्ष से सक्रिय रूप से डेटा भी भेज रहा है।
यह घटनाक्रम बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बताता है कि एक बड़े मिशन की तकनीकी असफलता के बावजूद, उसके कुछ विशिष्ट हिस्से अपने उद्देश्यों को आंशिक रूप से पूरा कर सकते हैं। इसरो के वैज्ञानिकों ने जहां रॉकेट की विफलता के कारणों की गहन जांच शुरू कर दी है, वहीं अंतरिक्ष जगत की नजरें अब स्पेनिश कंपनी ‘ऑर्बिटल प्रतिमान’ के उन दावों पर टिकी हैं जो इस मिशन को पूरी तरह व्यर्थ होने से बचा सकते हैं।
पीएसएलवी-सी62 का सफर और तीसरे चरण की तकनीकी रुकावट
सोमवार को जब पीएसएलवी-सी62 ने आसमान की ओर गर्जना करते हुए उड़ान भरी, तो शुरुआती चरण पूरी तरह सामान्य और योजनाबद्ध नजर आ रहे थे। पीएसएलवी को इसरो का ‘वर्कहॉर्स’ कहा जाता है क्योंकि इसकी सफलता की दर बहुत ऊंची रही है। लेकिन इस बार, जैसे ही रॉकेट अपने तीसरे चरण के अंत के करीब पहुँचा, डेटा मॉनिटरिंग सिस्टम में विसंगतियां दिखाई देने लगीं। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, रॉकेट ने अपेक्षित वेग और दिशा प्राप्त नहीं की, जो उपग्रहों को उनकी सटीक कक्षा में स्थापित करने के लिए अनिवार्य थी।
इसरो ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मिशन की विफलता को स्वीकार किया। यह एक दुर्लभ अवसर था जब पीएसएलवी अपनी विश्वसनीयता की कसौटी पर खरा नहीं उतर सका। इसरो प्रमुख और अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि तीसरे चरण के प्रणोदन या पृथक्करण (Separation) प्रक्रिया के दौरान संभवतः कोई यांत्रिक या सॉफ्टवेयर संबंधी त्रुटि हुई है। इसकी विस्तृत जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय तकनीकी समीक्षा समिति का गठन किया गया है ताकि भविष्य के मिशनों में ऐसी पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
स्पेनिश कंपनी का बड़ा दावा: ‘किड’ कैप्सूल है सुरक्षित और सक्रिय
मिशन की आधिकारिक असफलता के कुछ घंटों बाद, स्पेन की अंतरिक्ष कंपनी ‘ऑर्बिटल प्रतिमान’ ने एक बयान जारी कर सनसनी मचा दी। कंपनी ने दावा किया कि उनका पेलोड, जिसे ‘केस्ट्रेल इनिशियल टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर’ या ‘किड’ (KID) कैप्सूल कहा जाता है, रॉकेट में खराबी आने से ठीक पहले सुरक्षित रूप से अलग हो गया था। कंपनी के इंजीनियरों के अनुसार, कैप्सूल ने अंतरिक्ष की गहराई से सिग्नल भेजने शुरू कर दिए हैं और वह लगातार तकनीकी डेटा बेस स्टेशन को प्रसारित कर रहा है।
ऑर्बिटल प्रतिमान के अनुसार, चूंकि पृथक्करण की प्रक्रिया समय पर पूरी हो गई थी, इसलिए रॉकेट की बाद की खराबी का कैप्सूल की कार्यक्षमता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। यह दावा अंतरिक्ष विज्ञान के दृष्टिकोण से बहुत उत्साहजनक है क्योंकि ‘किड’ कैप्सूल का मुख्य उद्देश्य ही डेटा एकत्र करना और उसे सफलतापूर्वक पृथ्वी पर भेजना था। हालांकि, इसरो की ओर से अभी तक इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन कंपनी द्वारा प्राप्त सिग्नल इस बात का पुख्ता प्रमाण माने जा रहे हैं कि मिशन का यह हिस्सा जीवित है।
क्या था ‘किड’ कैप्सूल का मिशन और इसकी जटिलताएं?
‘किड’ कैप्सूल कोई सामान्य उपग्रह नहीं है, बल्कि यह री-एंट्री (पुनः प्रवेश) तकनीक के परीक्षण के लिए बनाया गया एक विशेष उपकरण है। इसके मिशन के कई महत्वपूर्ण चरण थे। सबसे पहले इसे अंतरिक्ष में एक निश्चित समय तक सक्रिय रहकर वहां के परिवेश, तापमान और विकिरण से संबंधित डेटा भेजना था। इसका दूसरा और सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा था पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करना।
जब कोई वस्तु अंतरिक्ष से पृथ्वी की ओर लौटती है, तो वायुमंडल के साथ घर्षण के कारण उसका तापमान हजारों डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है। ‘किड’ कैप्सूल को इस अत्यधिक गर्मी को झेलने के लिए डिज़ाइन किया गया था ताकि भविष्य के मानवयुक्त मिशनों और पुनः प्रयोज्य उपग्रहों (Reusable Satellites) के लिए बेहतर हीट शील्ड तकनीक विकसित की जा सके। अंतिम चरण में, इस कैप्सूल को समुद्र में गिरना था, जहां से इसे पुनर्प्राप्त (Recover) कर वैज्ञानिक इसके भीतर के सेंसर डेटा का अध्ययन करते। अब जबकि कैप्सूल सक्रिय बताया जा रहा है, वैज्ञानिक यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह वर्तमान में किस कक्षा में है और क्या यह अपने निर्धारित री-एंट्री पथ का पालन कर पाएगा।
आंशिक सफलता के मायने: अंतरिक्ष मिशनों में डेटा का महत्व
अंतरिक्ष विज्ञान में ‘असफलता’ शब्द अक्सर सापेक्ष होता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि पीएसएलवी-सी62 अपने मुख्य लक्ष्य (उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करना) में विफल रहा है, लेकिन ‘किड’ कैप्सूल से मिलने वाला डेटा सफल रहता है, तो इसे एक ‘आंशिक सफलता’ (Partial Success) के रूप में देखा जाएगा। अंतरिक्ष अन्वेषण में सबसे कीमती चीज डेटा होती है। यदि कैप्सूल री-एंट्री के दौरान भी डेटा भेजता रहता है, तो यह भविष्य के स्माल सैटेलाइट मिशनों और री-एंट्री कैप्सूल प्रोजेक्ट्स के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग के महत्व को भी रेखांकित करता है। इसरो और स्पेनिश कंपनी के बीच का यह साझा प्रयास दिखाता है कि विफलता के बावजूद तकनीकी प्रयोगों से प्राप्त अनुभव व्यर्थ नहीं जाते। स्पेनिश कैप्सूल से मिलने वाली जानकारी भविष्य में इसरो के अपने री-एंट्री प्रयोगों (जैसे गगनयान या आरएलवी-टीडी) के लिए भी अप्रत्यक्ष रूप से उपयोगी हो सकती है।
निष्कर्ष: विफलता से सीखने की इसरो की परंपरा
पीएसएलवी-सी62 की नाकामी निश्चित रूप से इसरो के लिए एक झटका है, लेकिन इस संगठन का इतिहास गवाह है कि वह हर विफलता से अधिक मजबूती के साथ उभरा है। 1979 में एसएलवी-3 की पहली असफलता से लेकर हाल के वर्षों के कुछ अनुभवों तक, इसरो ने हमेशा अपनी गलतियों का विश्लेषण कर तकनीक को और अधिक त्रुटिहीन बनाया है।
फिलहाल, वैज्ञानिक समुदाय की नजरें दो मोर्चों पर टिकी हैं: पहला, इसरो की तकनीकी जांच समिति की रिपोर्ट जो बताएगी कि पीएसएलवी के तीसरे चरण में क्या गलत हुआ; और दूसरा, ‘किड’ कैप्सूल की यात्रा। यदि यह कैप्सूल अपने मार्ग पर बना रहता है और डेटा भेजता रहता है, तो यह पीएसएलवी-सी62 की कड़वी यादों के बीच एक मीठी उपलब्धि बनकर उभरेगा। अंतरिक्ष का सफर जोखिमों से भरा है, लेकिन ‘किड’ जैसे प्रयोग यह सुनिश्चित करते हैं कि हर जोखिम के साथ मानवता के ज्ञान का विस्तार होता रहे।