• January 20, 2026

तकनीकी कूटनीति: सिलिकॉन वैली के दौरे पर जर्मन चांसलर, भविष्य की तकनीक और निवेश पर जोर

सैन फ्रांसिस्को: जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज़ अपनी महत्वपूर्ण अमेरिका यात्रा के दौरान आज दुनिया के सबसे बड़े तकनीकी केंद्र ‘सिलिकॉन वैली’ पहुंच रहे हैं। उनकी यह यात्रा केवल कूटनीतिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य जर्मनी को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना और भविष्य की उन्नत तकनीकों में निवेश हासिल करना है। इस दौरे के दौरान चांसलर न केवल दिग्गज टेक कंपनियों के प्रमुखों से मुलाकात करेंगे, बल्कि नैनो-इंजीनियरिंग और सेमीकंडक्टर अनुसंधान के प्रमुख केंद्र CeNSE (Center for Nano Science and Engineering) का दौरा भी करेंगे।

तकनीकी दिग्गजों के साथ रणनीतिक संवाद

जर्मन चांसलर का सिलिकॉन वैली दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर चिप्स की दौड़ में शामिल है। चांसलर शोल्ज़ का मुख्य एजेंडा अमेरिकी टेक दिग्गजों को जर्मनी में अपने संचालन विस्तार के लिए प्रोत्साहित करना है। माना जा रहा है कि वह गूगल, मेटा और एनवीडिया जैसी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर सकते हैं। इन बैठकों का केंद्र बिंदु डेटा सुरक्षा, एआई गवर्नेंस और डिजिटल इनोवेशन में आपसी सहयोग होगा। जर्मनी चाहता है कि अमेरिकी कंपनियां यूरोपीय बाजार के लिए उसके देश को एक ‘टेक गेटवे’ के रूप में देखें।

CeNSE का दौरा और नैनो-इंजीनियरिंग पर ध्यान

इस यात्रा का एक सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव ‘सेंटर फॉर नैनो साइंस एंड इंजीनियरिंग’ (CeNSE) का दौरा है। चांसलर यहां चल रहे शोध कार्यों का बारीकी से निरीक्षण करेंगे। नैनो-टेक्नोलॉजी और नैनो-इंजीनियरिंग भविष्य की चिकित्सा, ऊर्जा और कंप्यूटिंग की धुरी मानी जा रही है। जर्मनी, जो पहले से ही अपने इंजीनियरिंग कौशल के लिए प्रसिद्ध है, अब नैनो-स्केल पर नवाचार को बढ़ावा देना चाहता है। CeNSE में शोधकर्ताओं के साथ बातचीत के दौरान चांसलर यह समझने की कोशिश करेंगे कि कैसे प्रयोगशाला के नवाचारों को बड़े पैमाने पर औद्योगिक उत्पादन में बदला जा सकता है, ताकि जर्मनी की विनिर्माण शक्ति को और आधुनिक बनाया जा सके।

सेमीकंडक्टर और आत्मनिर्भरता की राह

जर्मनी पिछले कुछ वर्षों से चिप निर्माण (सेमीकंडक्टर) के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम कर रहा है। इंटेल जैसी कंपनियों द्वारा जर्मनी में बड़े निवेश की घोषणा के बाद, चांसलर की यह यात्रा उन संबंधों को और प्रगाढ़ करेगी। सिलिकॉन वैली के विशेषज्ञों के साथ चर्चा में इस बात पर जोर दिया जाएगा कि कैसे आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) की बाधाओं को दूर किया जाए और यूरोप में एक मजबूत सेमीकंडक्टर ईकोसिस्टम विकसित किया जाए। यह दौरा जर्मनी की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह उच्च-तकनीकी उद्योगों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।

डिजिटल भविष्य और द्विपक्षीय सहयोग

चांसलर शोल्ज़ की इस यात्रा का अंतिम उद्देश्य ‘ट्रांस-अटलांटिक’ तकनीकी सहयोग को नया आयाम देना है। वह इस बात पर जोर देंगे कि लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ तकनीक का विकास कैसे किया जाए। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ‘ग्रीन टेक’ और ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में भी सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। यह दौरा न केवल जर्मनी और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूती देगा, बल्कि भविष्य की तकनीकों के वैश्विक मानकों को तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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