• February 4, 2026

केंद्रीय बजट 2026-27: ‘बेरोजगार विकास’ पर शशि थरूर ने केंद्र को घेरा, केरल चुनाव से पहले वित्त मंत्री के पिटारे से विशेष पैकेज की उम्मीद

नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम: देश की राजधानी में संसद के गलियारों से लेकर केरल के तटीय क्षेत्रों तक, हर कहीं आज केंद्रीय बजट 2026-27 की चर्चाओं का बाजार गर्म है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में अपना नौवां लगातार बजट पेश करने की ऐतिहासिक उपलब्धि के बीच, विपक्षी खेमे की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं और उम्मीदों का मिला-जुला सिलसिला शुरू हो गया है। इस पूरे परिदृश्य में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर का बयान सबसे अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है। थरूर ने न केवल बजट की आर्थिक बारीकियों पर सवाल उठाए हैं, बल्कि आगामी केरल विधानसभा चुनावों के मद्देनजर केंद्र सरकार की राजनीतिक मंशा और राज्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।

शशि थरूर ने रविवार को बजट से पहले मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि इस बार का बजट केवल एक वार्षिक वित्तीय विवरण नहीं है, बल्कि यह केरल जैसे राज्यों के लिए केंद्र की नीयत का लिटमस टेस्ट भी है। उन्होंने कहा कि चूंकि केरल में विधानसभा चुनाव करीब हैं, इसलिए राज्य की जनता और राजनीतिक गलियारे इस बात को लेकर बेहद उत्सुक हैं कि वित्त मंत्री के पिटारे से केरल के लिए क्या विशेष निकलता है। थरूर का इशारा साफ था कि चुनाव से पहले अक्सर केंद्र सरकारें उन राज्यों के लिए विशेष पैकेजों की घोषणा करती हैं जहां मतदान होने वाले होते हैं। ऐसे में उन्होंने यह सवाल दागा कि क्या भाजपा नीत केंद्र सरकार केरल की विकास संबंधी जरूरतों को चुनाव के चश्मे से देखेगी या फिर राज्य को उसका वाजिब हक देने के लिए कोई ठोस योजना पेश करेगी।

सांसद थरूर ने केरल की विशिष्ट भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए राज्य के लिए विशेष लाभों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार आधारभूत संरचना, तटीय प्रबंधन और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में केरल को बड़ी सौगात दे सकती है। थरूर का मानना है कि केरल की अर्थव्यवस्था में प्रवासी भारतीयों का बड़ा योगदान है, लेकिन स्थानीय स्तर पर औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन की दर को बढ़ाने के लिए केंद्रीय मदद अपरिहार्य है। उन्होंने कहा कि हम उत्सुकता से यह देखना चाहते हैं कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केरल के लिए किन विशेष योजनाओं की घोषणा करती हैं और क्या ये घोषणाएं केवल चुनावी वादे बनकर रह जाएंगी या धरातल पर भी उतरेंगी।

राजनीतिक चर्चाओं से हटकर, शशि थरूर ने बजट के सबसे संवेदनशील पहलू यानी अर्थव्यवस्था की स्थिति और बेरोजगारी पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। हाल ही में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण का जिक्र करते हुए उन्होंने आंकड़ों और वास्तविकता के बीच के अंतर को उजागर किया। गौरतलब है कि आर्थिक सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत और सकल मूल्य वर्धित यानी जीवीए वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, थरूर ने इन आंकड़ों को उत्साहजनक मानने के बावजूद एक बड़ा ‘लेकिन’ जोड़ दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि यह आर्थिक विकास रोजगार पैदा करने में विफल रहता है, तो ऐसी ‘बेरोजगार वृद्धि’ का आम आदमी के लिए कोई महत्व नहीं है।

थरूर ने बेरोजगारी को देश की सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती बताते हुए कहा कि आर्थिक विकास के आंकड़े कागज पर अच्छे लग सकते हैं, लेकिन युवाओं के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह विकास उनके हाथों को काम दिला पाएगा। उन्होंने तर्क दिया कि यदि देश की जीडीपी सात प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ती है, लेकिन साथ ही बेरोजगारी की दर भी उच्च बनी रहती है, तो यह विकास समावेशी नहीं हो सकता। कांग्रेस सांसद के अनुसार, ‘बेरोजगार वृद्धि’ से किसी को कोई मदद नहीं मिलती और यह अंततः सामाजिक असंतोष का कारण बनती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि बजट में ऐसे विशिष्ट प्रावधान होने चाहिए जो निजी निवेश को बढ़ावा दें और श्रम-प्रधान क्षेत्रों में नई नौकरियों का सृजन करें।

दूसरी ओर, संसद भवन में बजट की तैयारियों का माहौल अपनी चरम सीमा पर देखा गया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपनी परंपरा को कायम रखते हुए राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से शिष्टाचार भेंट की और फिर अपने डिजिटल ‘बही-खाता’ के साथ संसद परिसर में प्रवेश किया। सीतारमण का यह लगातार नौवां बजट भाषण है, जो अपने आप में एक संसदीय रिकॉर्ड है। उनके इस कार्यकाल के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन 2026-27 का यह बजट विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह देश को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर ले जाने वाले मध्यम अवधि के रोडमैप का हिस्सा है। बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है, जिसमें केरल जैसे राज्यों की उपेक्षा और महंगाई प्रमुख मुद्दे रहने वाले हैं।

शशि थरूर ने अपनी बात को विस्तार देते हुए यह भी कहा कि केरल में चुनाव होने के कारण केंद्र सरकार पर एक नैतिक और राजनीतिक दबाव है। उन्होंने कहा कि केरल की जनता यह बारीकी से देख रही है कि उसे राष्ट्रीय मुख्यधारा के विकास में कितना हिस्सा दिया जा रहा है। थरूर की चिंताएं मुख्य रूप से उन परियोजनाओं को लेकर हैं जो लंबे समय से केंद्र की मंजूरी या फंड के इंतजार में लंबित पड़ी हैं। इसमें रेल कनेक्टिविटी, बंदरगाहों का आधुनिकीकरण और रबर एवं मसाला किसानों के लिए विशेष राहत पैकेज शामिल हैं। थरूर ने जोर देकर कहा कि बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें देश के हर राज्य की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब होना चाहिए।

आर्थिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि 2026-27 का बजट एक ऐसे मोड़ पर आ रहा है जहां वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत को अपनी घरेलू खपत और विनिर्माण क्षमता को संतुलित करना है। आर्थिक सर्वेक्षण में विकास की जो तस्वीर पेश की गई है, उसे वास्तविकता में बदलने के लिए वित्त मंत्री को राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के साथ-साथ लोक-लुभावन घोषणाओं के बीच एक महीन रेखा खींचनी होगी। शशि थरूर द्वारा उठाए गए बेरोजगारी के मुद्दे पर विशेषज्ञों का कहना है कि स्किल इंडिया और मुद्रा जैसी योजनाओं के बावजूद, संगठित क्षेत्र में नौकरियों की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है, जिस पर इस बजट में विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

समापन की ओर बढ़ते हुए, शशि थरूर के बयानों ने इस बजट को केवल एक आर्थिक दस्तावेज से बदलकर एक राजनीतिक विमर्श में तब्दील कर दिया है। उनके द्वारा केरल के लिए जताई गई उम्मीदें और बेरोजगारी पर व्यक्त की गई चिंताएं बजट के बाद होने वाली चर्चाओं का मुख्य केंद्र रहने वाली हैं। देश अब यह देख रहा है कि क्या निर्मला सीतारमण अपने नौवें बजट में थरूर द्वारा उठाए गए ‘रोजगार युक्त विकास’ के सवाल का जवाब दे पाती हैं और क्या केरल की चुनावी सुगबुगाहट बजट के प्रावधानों में कोई विशेष रंग ला पाती है। बजट की घोषणाओं के साथ ही यह साफ हो जाएगा कि केंद्र सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं और वह राज्यों के साथ संघीय ढांचे में किस तरह का तालमेल बिठाना चाहती है। फिलहाल, सभी की निगाहें लोकसभा के पटल पर टिकी हैं, जहां वित्त मंत्री देश का भविष्य और केरल जैसे राज्यों की उम्मीदों का खाका पेश करने वाली हैं।

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