उत्तर भारत में मौसम का तांडव: पहाड़ों पर भीषण बर्फबारी और मैदानी इलाकों में ओलावृष्टि, दिल्ली में बारिश ने तोड़ा 4 साल का रिकॉर्ड
नई दिल्ली: एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने से समूचे उत्तर भारत के मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में कुदरत का दोहरा रूप देखने को मिला है। जहाँ एक ओर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली-एनसीआर सहित मैदानी राज्यों में गरज-चमक के साथ हुई बारिश और ओलावृष्टि ने कड़ाके की ठंड की वापसी करा दी है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले दो दिनों तक न्यूनतम तापमान में 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की और गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे शीतलहर का प्रकोप बढ़ने की पूरी संभावना है।
देश की राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में मंगलवार को मौसम ने अचानक करवट ली और देखते ही देखते आसमान में काले बादलों का डेरा जम गया। दिल्ली-एनसीआर में तेज हवाओं के साथ हुई झमाझम बारिश ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में इस दौरान 24 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो वर्ष 2022 के बाद से जनवरी के महीने में होने वाली सबसे अधिक बारिश है। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में भी दिन भर रुक-रुक कर बारिश होती रही। गाजियाबाद, हापुड़ और मेरठ के कई हिस्सों में ओले गिरने से सड़कों और छतों पर सफेद चादर बिछ गई। इस बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि के कारण दिल्ली का अधिकतम तापमान गिरकर 16.9 डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जबकि न्यूनतम तापमान 8.0 डिग्री दर्ज किया गया।
पहाड़ी राज्यों की बात करें तो स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले के सोनमर्ग इलाके में मंगलवार रात करीब 10:12 बजे एक भीषण हिमस्खलन (Avalanche) हुआ। यह बर्फीला तूफान एक स्थानीय रिसॉर्ट से जा टकराया, जिसकी चपेट में कई इमारतें आ गईं। हालांकि, गनीमत यह रही कि इस घटना में किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन इलाके में दहशत का माहौल है। गुलमर्ग, पहलगाम, पटनीटॉप और भद्रवाह जैसे पर्यटन स्थल पूरी तरह बर्फ से ढंक गए हैं। भारी बर्फबारी का सीधा असर परिवहन सेवाओं पर पड़ा है; श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग को सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया है क्योंकि सड़क पर कई फीट मोटी बर्फ की परत जम गई है।
हवाई यातायात भी इस मौसम की मार से अछूता नहीं रहा। खराब दृश्यता और भारी बर्फबारी के चलते श्रीनगर हवाई अड्डे से संचालित होने वाली सभी 58 उड़ानों को रद्द करना पड़ा, जबकि जम्मू से भी तीन उड़ानें निरस्त रहीं। लद्दाख के न्योमा और द्रास जैसे इलाकों में हाड़ कपाने वाली ठंड पड़ रही है, जहाँ पारा गिरकर क्रमशः शून्य से 9.7 और 9.2 डिग्री नीचे चला गया है। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद आस्था का सैलाब कम नहीं हुआ और 14 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने माता वैष्णो देवी के दर्शन किए। वहीं, डोडा में एक बड़े बचाव अभियान के तहत 10,500 फीट की ऊंचाई पर फंसे 40 जवानों सहित 60 लोगों को सुरक्षित निकाला गया।
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में भी कुदरत का कहर जारी है। हिमाचल के कुफरी, मनाली, किन्नौर और शिमला में हुई बर्फबारी के कारण प्रदेश की लगभग 550 सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे सैकड़ों गांव मुख्य संपर्क मार्गों से कट गए हैं। चंबा जिले से एक दुखद खबर सामने आई है, जहाँ ट्रेकिंग पर निकले दो युवकों के शव बरामद हुए हैं, जिनकी मृत्यु अत्यधिक ठंड और बर्फीले तूफान की चपेट में आने से होने की आशंका जताई जा रही है। उत्तराखंड में भी चार धाम—बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री—पूरी तरह बर्फ की सफेद चादर में लिपटे हुए हैं। जोशीमठ और औली जैसे इलाकों में पर्यटकों की आमद तो बढ़ी है, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने भारी हिमपात को देखते हुए लोगों को अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी है।
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के मैदानी इलाकों में भी हल्की से भारी बारिश दर्ज की गई है। इस बारिश ने जहाँ एक ओर फसलों के लिए उम्मीद जगाई है, वहीं दूसरी ओर अचानक बढ़ी ठंड ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाएं मैदानी इलाकों में ठिठुरन और बढ़ा देंगी। आने वाले 48 घंटों में कोहरे का प्रभाव भी बढ़ने की संभावना है, जिससे रेल और सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है। प्रशासन ने सभी संवेदनशील इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया है और आपदा प्रबंधन टीमों को तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं।