ईरान संकट: युद्ध की आहट और बढ़ते तनाव के बीच बंद हुआ एयरस्पेस, एअर इंडिया ने बदला उड़ानों का रास्ता
तेहरान/नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों और ईरान के भीतर बढ़ते व्यापक विरोध प्रदर्शनों ने अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन के लिए बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। ईरान सरकार ने गुरुवार सुबह एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए अपने एयरस्पेस (वायुक्षेत्र) को व्यावसायिक विमानों के लिए अनिश्चितकाल के लिए बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं। इस अचानक आए फैसले के बाद वैश्विक स्तर पर हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विशेष रूप से भारत से यूरोप और अमेरिका जाने वाली उड़ानों पर इसका सीधा असर पड़ा है, क्योंकि ईरान का वायुक्षेत्र इन रूटों के लिए एक प्रमुख गलियारा माना जाता है।
भारतीय विमानन कंपनी एअर इंडिया ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से अपने यात्रियों के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। एयरलाइंस ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा और स्थिति सामान्य होने तक वैकल्पिक मार्गों का उपयोग किया जाएगा। ईरान के इस कदम ने न केवल कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि अमेरिका और इजरायल के साथ उसके बढ़ते सैन्य टकराव की आशंकाओं को भी पुख्ता कर दिया है।
एअर इंडिया की यात्री एडवाइजरी और सुरक्षा प्रोटोकॉल
ईरान के ऊपर से उड़ानें प्रतिबंधित होने के बाद एअर इंडिया ने अपने परिचालन में बड़े बदलाव किए हैं। एयरलाइंस द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यात्रियों की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ईरान के तनावपूर्ण हालात और बंद वायुक्षेत्र को देखते हुए एअर इंडिया की उड़ानें अब उन वैकल्पिक रास्तों का चुनाव कर रही हैं जो ईरान की सीमा से बाहर हैं। हालांकि, इन नए रास्तों की वजह से उड़ान के समय में काफी बढ़ोतरी हो गई है और ईंधन की खपत भी बढ़ गई है।
एअर इंडिया ने उन उड़ानों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है जिनका वैकल्पिक रूट तैयार करना तकनीकी रूप से संभव नहीं था। कंपनी ने यात्रियों से अपील की है कि वे हवाई अड्डे के लिए निकलने से पहले एअर इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी उड़ान का स्टेटस जरूर चेक करें। एयरलाइंस ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो यात्री प्रभावित हुए हैं, उन्हें नियमानुसार रिफंड या अगली उपलब्ध उड़ान में री-बुकिंग की सुविधा दी जाएगी। यह कदम उस समय उठाया गया है जब खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों की आहट तेज हो गई है और मिसाइल हमलों के खतरे को नकारा नहीं जा सकता।
बिना किसी स्पष्टीकरण के बढ़ाया गया प्रतिबंध
ईरानी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने गुरुवार सुबह जारी अपने नोटिस में एयरस्पेस बंदी की समय सीमा को बढ़ा दिया। शुरुआत में यह प्रतिबंध केवल दो घंटे के लिए लगाया गया था, लेकिन स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे बढ़ाकर स्थानीय समयानुसार सुबह 7:30 बजे तक कर दिया गया और इसके आगे भी विस्तार के संकेत दिए गए हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ईरानी सरकार ने इस बंदी के पीछे कोई स्पष्ट तकनीकी या सैन्य कारण नहीं बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम संभावित सैन्य जवाबी कार्रवाई या मिसाइल परीक्षणों की तैयारी के मद्देनजर उठाया गया हो सकता है।
पायलटों को दिए गए ‘नोटिस टू एयरमेन’ (NOTAM) के अनुसार, कमर्शियल उड़ानों के लिए ईरान के आसमान का बड़ा हिस्सा अब ‘नो-फ्लाई जोन’ में तब्दील हो चुका है। यह प्रतिबंध ऐसे समय में आया है जब ईरान के भीतर देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों ने सरकार की जड़ों को हिलाकर रख दिया है। तेहरान की सड़कों पर बढ़ती हिंसा और सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई ने देश के भीतर गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है, जिसका असर अब उसके आसमान पर भी दिखाई देने लगा है।
अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ता सैन्य टकराव
ईरान में जारी तनाव का एक मुख्य केंद्र अमेरिका और इजरायल के साथ उसके बिगड़ते संबंध हैं। ईरानी अधिकारियों ने बुधवार को एक कड़ा रुख अपनाते हुए धमकी दी कि यदि अमेरिका या इजरायल ने उनके घरेलू मामलों या विरोध प्रदर्शनों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप किया, तो वे कड़ी जवाबी सैन्य कार्रवाई करेंगे। ईरान ने संकेत दिया है कि हालिया प्रदर्शनों के पीछे बाहरी ताकतों का हाथ है और वह अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
वहीं दूसरी ओर, अमेरिका ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। कतर स्थित प्रमुख अमेरिकी सैन्य अड्डे पर तैनात सैनिकों को विशेष सावधानी बरतने और कुछ गैर-जरूरी कर्मियों को वहां से हटने की सलाह दी गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पिछले 24 घंटों के बयानों ने वैश्विक बाजार और कूटनीति में अनिश्चितता बढ़ा दी है। हालांकि वाशिंगटन ने अभी तक किसी सीधे सैन्य हमले की पुष्टि नहीं की है, लेकिन ‘सभी विकल्प मेज पर हैं’ वाली रणनीति ने ईरान को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। ईरान को डर है कि अमेरिका या इजरायल उसके परमाणु ठिकानों या सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकते हैं।
आंतरिक विद्रोह और फांसी की सजा की धमकी
ईरान के भीतर हालात केवल बाहरी दुश्मनों की वजह से खराब नहीं हैं, बल्कि आंतरिक विद्रोह ने सरकार के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है। ईरान की न्यायपालिका और अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों पर जल्द ही विशेष अदालतों में सुनवाई होगी। सरकार ने धमकी दी है कि विद्रोह भड़काने के दोषी पाए जाने वालों को सार्वजनिक रूप से फांसी की सजा दी जाएगी। मानवाधिकार संगठनों ने ईरान के इस कदम की कड़ी निंदा की है, लेकिन तेहरान इसे देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक बता रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि एयरस्पेस बंद करने का एक उद्देश्य यह भी हो सकता है कि देश के भीतर हो रही घटनाओं की जानकारी और विदेशी निगरानी को कम किया जा सके। जब किसी देश में बड़े पैमाने पर दमन चक्र चलता है, तो अक्सर संचार और परिवहन के साधनों पर अंकुश लगाया जाता है। ईरान के इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या तेहरान किसी बड़े आंतरिक सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है।
वैश्विक विमानन क्षेत्र पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभाव
ईरान के एयरस्पेस की बंदी केवल एअर इंडिया के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की एयरलाइंस के लिए एक बड़ा सिरदर्द है। दक्षिण-पूर्व एशिया और यूरोप के बीच का सबसे छोटा रास्ता ईरान और इराक के ऊपर से होकर गुजरता है। इस रास्ते के बंद होने से अब विमानों को सऊदी अरब या तुर्की के ऊपर से लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है। इससे न केवल हवाई टिकटों के दाम बढ़ने की आशंका है, बल्कि कार्गो सेवाओं पर भी बुरा असर पड़ेगा।
विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह तनाव हफ्तों तक खिंचता है, तो एयरलाइंस को अपने शेड्यूल को पूरी तरह से बदलना होगा। यूक्रेन युद्ध के कारण पहले से ही रूस का एयरस्पेस कई देशों के लिए बंद है, और अब ईरान के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ‘गलियारे’ कम होते जा रहे हैं। यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था और पर्यटन के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है।
निष्कर्ष: अनिश्चितता के साये में पश्चिम एशिया
फिलहाल, ईरान में स्थिति ‘रुको और देखो’ वाली बनी हुई है। एयरस्पेस का बंद होना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि तेहरान किसी बड़ी घटना की आशंका में है या स्वयं किसी बड़े कदम की तैयारी कर रहा है। अमेरिका के कड़े तेवर और ईरान की पलटवार की धमकियों ने शांति की उम्मीदों को धुंधला कर दिया है। यात्रियों के लिए आने वाले कुछ दिन काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, क्योंकि हवाई रास्तों का यह बदलाव कब तक जारी रहेगा, इस पर फिलहाल कोई स्पष्टता नहीं है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब ईरान के अगले कदम और वाशिंगटन की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।