अलास्का की भीषण ठंड के बीच भारतीय छात्र लापता: ह्यूस्टन से सोलो ट्रिप पर निकला था छात्र
अमेरिका के टेक्सास प्रांत के ह्यूस्टन में एमएस (Master of Science) की पढ़ाई कर रहा एक 24 वर्षीय भारतीय छात्र करासानी हरि कृष्णा रेड्डी अलास्का की अपनी एकल यात्रा (सोलो ट्रिप) के दौरान रहस्यमय तरीके से लापता हो गया है। मूल रूप से आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले का रहने वाला हरि कृष्णा क्रिसमस की छुट्टियों का आनंद लेने के लिए 22 दिसंबर को अलास्का के लिए निकला था। पिछले कई दिनों से उसका अपने परिवार और दोस्तों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है, जिसके बाद उसके करीबियों ने स्थानीय पुलिस और सोशल मीडिया के माध्यम से मदद की गुहार लगाई है। यह मामला न केवल एक छात्र की गुमशुदगी का है, बल्कि यह अलास्का जैसी खतरनाक और विषम जलवायु वाले स्थानों पर अकेले यात्रा करने के जोखिमों को भी रेखांकित करता है।
अंतिम संपर्क और डेनाली में मोबाइल सिग्नल की लोकेशन
हरि कृष्णा रेड्डी के दोस्तों के अनुसार, उसने आखिरी बार 30 दिसंबर को अपने परिवार और दोस्तों से बात की थी। वह अलास्का के डेनाली नेशनल पार्क के पास एक होटल ‘ऑरोरा डेनाली लॉज’ में रुका था। तकनीकी जांच में पता चला है कि उसके मोबाइल फोन का आखिरी सिग्नल 31 दिसंबर को डेनाली क्षेत्र में ही मिला था, जिसके बाद से उसका फोन बंद है या नेटवर्क क्षेत्र से बाहर है। अलास्का स्टेट ट्रूपर्स (स्थानीय पुलिस) ने अपनी प्राथमिक जांच में बताया है कि हरि को आखिरी बार 31 दिसंबर को लॉज से निकलते हुए देखा गया था। पुलिस का अनुमान है कि वह वहां से फेयरबैंक्स क्षेत्र की ओर जाने की योजना बना रहा था, जो उत्तरी रोशनी (Northern Lights) देखने के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
शून्य से 40 डिग्री नीचे तापमान: जानलेवा बनीं अलास्का की परिस्थितियां
हरि कृष्णा के लापता होने के समय अलास्का में मौसम की स्थिति अत्यंत भयावह थी। 31 दिसंबर और 1 जनवरी के दौरान वहां का तापमान गिरकर लगभग -40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। इतनी कड़ाके की ठंड में इंसान का खुले आसमान के नीचे कुछ समय भी जीवित रहना चुनौतीपूर्ण होता है। आमतौर पर पर्यटक और साहसी यात्री भी भीषण सर्दियों के इस दौर में अलास्का जाने से कतराते हैं। यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हरि कृष्णा ने साल के इस सबसे कठिन समय में अलास्का जाने का फैसला क्यों किया। क्या वह वहां के शीतकालीन खेलों में हिस्सा लेना चाहता था या केवल कुदरत के करिश्मे ‘ऑरोरा बोरेलिस’ को देखने गया था, इस बारे में उसके रूममेट्स और दोस्तों को भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। उन्होंने बस इतना बताया था कि वह दो सप्ताह की छुट्टी पर जा रहा है और 3 या 4 जनवरी तक वापस लौट आएगा।
सार्वजनिक परिवहन पर निर्भरता और क्रेडिट कार्ड के सुराग
हरि कृष्णा के मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उसे गाड़ी चलाना नहीं आता था। अमेरिका के विशाल और दुर्गम क्षेत्रों में जहां निजी वाहन या टैक्सी अनिवार्य मानी जाती है, वहां हरि पूरी तरह से सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर था। उसने अपने दोस्तों को बताया था कि वह बसों या ट्रेनों के जरिए यात्रा करेगा। उसके लापता होने के बाद जब उसके रूममेट्स ने उसके क्रेडिट कार्ड के रिकॉर्ड खंगाले, तो उन्हें एक महत्वपूर्ण सुराग मिला। लापता होने से ठीक पहले उसने एक स्थानीय टैक्सी सेवा का उपयोग करके भुगतान किया था। इसी सुराग के आधार पर पुलिस उन टैक्सी चालकों और परिवहन सेवाओं से पूछताछ कर रही है जिन्होंने उस दौरान डेनाली और फेयरबैंक्स के बीच सेवाएं दी थीं।
दोस्तों की मुहिम और पुलिस की तलाश: सोशल मीडिया पर अपील
हरि के वापस न लौटने और कोई संपर्क न होने पर उसके दोस्तों ने स्थानीय पुलिस की मदद से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक और इंस्टाग्राम पर गुमशुदगी की सूचना प्रसारित की है। इसमें हरि की तस्वीरें और उसकी शारीरिक पहचान साझा की गई है ताकि यदि किसी ने उसे डेनाली या फेयरबैंक्स के आसपास देखा हो, तो वह जानकारी दे सके। शुरुआत में उसके रूममेट्स को लगा कि पहाड़ी और सुदूर इलाकों में नेटवर्क की समस्या के कारण वह संपर्क नहीं कर पा रहा होगा, लेकिन समय बीतने के साथ उनकी चिंताएं बढ़ती गईं। वर्तमान में अलास्का स्टेट ट्रूपर्स और स्थानीय खोज एवं बचाव टीमें सक्रिय हैं, हालांकि भीषण बर्फबारी और कम दृश्यता के कारण तलाश अभियान में काफी कठिनाइयां आ रही हैं।
आंध्र प्रदेश अनिवासी तेलुगु सोसाइटी और कूटनीतिक प्रयास
इस बीच, आंध्र प्रदेश के गुंटूर में रह रहे हरि के माता-पिता अत्यंत चिंतित हैं। हालांकि, आंध्र प्रदेश अनिवासी तेलुगु सोसाइटी (APNRTS) के अधिकारियों ने बताया है कि उन्हें अभी तक परिवार की ओर से मदद का कोई आधिकारिक संदेश नहीं मिला है, लेकिन वे अमेरिका में अपने स्थानीय प्रतिनिधियों और तेलुगु समुदाय के संपर्क में हैं। भारतीय दूतावास और स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से इस मामले में तेजी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। छात्र की सुरक्षा को लेकर अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय के बीच भी गहरी चिंता व्याप्त है।
अलास्का: खूबसूरती के पीछे छिपा लापता होने का ‘डेथ ट्रैप’
अलास्का अपनी प्राकृतिक सुंदरता और उत्तरी रोशनी के लिए दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करता है, लेकिन इसका एक स्याह पहलू भी है। अमेरिकी अधिकारियों के आंकड़ों के अनुसार, अलास्का में हर साल लगभग 2,000 लोग लापता हो जाते हैं। यह संख्या अमेरिका के किसी भी अन्य राज्य की तुलना में बहुत अधिक है। यहां की भौगोलिक स्थिति, घने जंगल, ग्लेशियर और अचानक बदलने वाला मौसम इसे बेहद खतरनाक बना देता है। कई मामलों में, लापता व्यक्तियों के शव महीनों या सालों तक नहीं मिलते क्योंकि वे भारी बर्फ की परतों के नीचे दब जाते हैं या जंगली जानवरों का शिकार हो जाते हैं। हरि कृष्णा रेड्डी का मामला एक बार फिर उन खतरों की याद दिलाता है जो एक अनियोजित ‘सोलो ट्रिप’ के दौरान किसी भी यात्री के सामने आ सकते हैं।
फिलहाल, जांच एजेंसियां फेयरबैंक्स और डेनाली के बीच के मार्गों पर केंद्रित हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या वह किसी समूह के साथ आगे बढ़ा था या वह अकेले ही दुर्गम रास्तों पर निकल गया था।