‘अजित दादा के फैसलों पर हमें पूरा भरोसा’: सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण के बाद पार्थ पवार पर सीएम फडणवीस का बड़ा बयान
मुंबई: महाराष्ट्र की महायुति सरकार में शक्ति संतुलन और राजनीतिक समीकरणों के एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की वरिष्ठ नेता सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के ठीक एक दिन बाद, राज्य के राजनीतिक गलियारों में इस बदलाव के निहितार्थों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। इन चर्चाओं और कयासों के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सरकार और गठबंधन का रुख स्पष्ट किया है। फडणवीस ने न केवल नई उपमुख्यमंत्री का स्वागत किया, बल्कि अजित पवार के पुत्र पार्थ पवार को लेकर उठ रहे विवादों और भविष्य के राजनीतिक गठबंधन के सवालों पर भी विराम लगाने की कोशिश की है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई में पत्रकारों से रूबरू होते हुए बेहद सधे हुए अंदाज में स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र सरकार में शामिल घटक दलों के बीच समन्वय पूरी तरह से कायम है। सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण के बाद विपक्षी खेमे और सोशल मीडिया पर पार्थ पवार की राजनीतिक सक्रियता को लेकर जो सवाल उठाए जा रहे थे, उन पर मुख्यमंत्री ने दो टूक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पार्थ पवार को लेकर सरकार या सत्ताधारी गठबंधन के भीतर किसी भी प्रकार की कोई आपत्ति नहीं है। फडणवीस ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी दल के नेता की अगली पीढ़ी का राजनीति में आना या सक्रिय होना उनका अपना अधिकार है और महायुति गठबंधन इस पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं रखता।
इस प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘पार्टी की स्वायत्तता’ के सिद्धांत को सर्वोपरि बताया। उन्होंने एनसीपी के भीतर होने वाले निर्णयों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एक स्वतंत्र इकाई है और उसके सांगठनिक फैसले पार्टी के आंतरिक नेतृत्व द्वारा लिए जाते हैं। सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने का फैसला अजित पवार और उनके दल का अपना विवेक था, जिसका मुख्यमंत्री के रूप में वह पूरी तरह सम्मान करते हैं। फडणवीस ने स्पष्ट किया कि एनसीपी से जुड़े किसी भी प्रशासनिक या राजनीतिक निर्णय में भाजपा या शिवसेना (शिंदे गुट) तब तक हस्तक्षेप नहीं करते, जब तक वह गठबंधन के साझा न्यूनतम कार्यक्रम को प्रभावित न करे।
राजनीतिक गलियारों में एक चर्चा यह भी चल रही थी कि क्या अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी का भविष्य में किसी अन्य दल के साथ विलय हो सकता है या कोई बड़ा संगठनात्मक बदलाव होने वाला है। इन अफवाहों को खारिज करते हुए देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उनके और अजित पवार के बीच संवाद का स्तर अत्यंत पारदर्शी है। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि अगर भविष्य में किसी भी प्रकार के विलय या किसी बड़ी राजनीतिक संधि की बात होती, तो ‘अजित दादा’ स्वयं उन्हें विश्वास में लेकर इसकी जानकारी देते। मुख्यमंत्री का यह बयान उन कयासों को शांत करने के लिए पर्याप्त था जो गठबंधन के भीतर अविश्वास की खाई खोदने की कोशिश कर रहे थे।
सुनेत्रा पवार का उपमुख्यमंत्री बनना महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। यह पहली बार है जब एक ही परिवार के दो सदस्य (अजित पवार और सुनेत्रा पवार) राज्य सरकार में इतने ऊंचे पदों पर आसीन होने की संभावनाओं या चर्चाओं के केंद्र में रहे हैं, हालांकि वर्तमान में सुनेत्रा पवार ने इस जिम्मेदारी को संभालकर महिला नेतृत्व को एक नई ऊंचाई दी है। मुख्यमंत्री ने इस बदलाव को राज्य के विकास के लिए सकारात्मक बताया और कहा कि सुनेत्रा पवार के प्रशासनिक और सामाजिक अनुभव का लाभ महाराष्ट्र की जनता को मिलेगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने गठबंधन के भीतर ‘पावर गेम’ को लेकर सवाल पूछे, तो फडणवीस ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि महायुति का एकमात्र लक्ष्य महाराष्ट्र का सर्वांगीण विकास है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग गठबंधन टूटने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, उन्हें निराशा ही हाथ लगेगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, सुनेत्रा पवार के आने से मंत्रिमंडल की क्षमता में वृद्धि हुई है और इससे आगामी योजनाओं को लागू करने में और गति मिलेगी। पार्थ पवार के संदर्भ में उनकी टिप्पणी को राजनीतिक विश्लेषक एक ‘सॉफ्ट सिग्नल’ के रूप में देख रहे हैं, जिसका अर्थ है कि भविष्य में पार्थ पवार को भी संगठन या सरकार में कोई महत्वपूर्ण भूमिका दी जा सकती है और भाजपा को इसमें कोई संकोच नहीं होगा।
महाराष्ट्र की राजनीति पिछले कुछ वर्षों में कई अप्रत्याशित मोड़ों से गुजरी है, और सुनेत्रा पवार का यह उदय उसी श्रृंखला की एक नई कड़ी है। देवेंद्र फडणवीस ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि इस नियुक्ति से गठबंधन के अन्य सहयोगियों के बीच किसी भी प्रकार की असुरक्षा की भावना पैदा न हो। उन्होंने बार-बार ‘टीम वर्क’ शब्द का इस्तेमाल किया, जिससे यह संदेश गया कि सरकार के भीतर पदों का बंटवारा आपसी सहमति और राज्य के हित को ध्यान में रखकर किया गया है।
अंततः, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस केवल एक स्पष्टीकरण नहीं थी, बल्कि यह गठबंधन की मजबूती का प्रदर्शन भी था। उन्होंने यह साफ कर दिया कि अजित पवार और उनके परिवार से जुड़े फैसले एनसीपी का विशेषाधिकार हैं और भाजपा एक बड़े सहयोगी के रूप में उन फैसलों का समर्थन करती है। अब जबकि सुनेत्रा पवार ने कार्यभार संभाल लिया है, महाराष्ट्र की जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह नई तिकड़ी—शिंदे, फडणवीस और पवार—राज्य की प्रगति के लिए कौन से नए रोडमैप तैयार करती है। आगामी चुनावों से पहले यह एकजुटता महायुति के लिए एक महत्वपूर्ण ढाल साबित हो सकती है।