• March 12, 2026

हिंदू धर्म बनाम हिंदुत्व: मणिशंकर अय्यर ने हिंदुत्व को बताया ‘राजनीतिक पागलपन’, सावरकर और गांधी के विचारों पर छेड़ी नई बहस

कोलकाता: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर एक बार फिर अपने तीखे और विवादास्पद बयानों के कारण राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गए हैं। रविवार को कोलकाता क्लब में आयोजित ‘कलकत्ता डिबेटिंग सर्कल’ की एक बहस के दौरान उन्होंने हिंदुत्व की विचारधारा पर कड़ा प्रहार किया। “हिंदू धर्म को हिंदुत्व से संरक्षण की आवश्यकता है” विषय पर आयोजित इस चर्चा में अय्यर ने हिंदू धर्म को एक महान आध्यात्मिक परंपरा बताया, जबकि हिंदुत्व को एक ऐसी राजनीतिक विचारधारा करार दिया जो उनके अनुसार समाज में भय और असहिष्णुता पैदा कर रही है। मणिशंकर अय्यर के इन बयानों ने वैचारिक और राजनीतिक हलकों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

हिंदू धर्म और हिंदुत्व के बीच वैचारिक अंतर पर प्रहार

बहस के दौरान मणिशंकर अय्यर ने हिंदू धर्म और हिंदुत्व के बीच एक स्पष्ट विभाजक रेखा खींचने की कोशिश की। उन्होंने तर्क दिया कि हिंदू धर्म हजारों वर्षों से अस्तित्व में है और इसने बिना किसी राजनीतिक वैचारिकी के कई ऐतिहासिक चुनौतियों और संघर्षों का सफलतापूर्वक सामना किया है। अय्यर ने कहा कि हिंदू धर्म एक विशाल आध्यात्मिक समुद्र की तरह है जिसने दुनिया को शांति और सार्वभौमिकता का संदेश दिया है, जबकि हिंदुत्व मात्र 1923 में अस्तित्व में आया एक राजनीतिक ग्रंथ है। उनके अनुसार, हिंदू धर्म को अपनी रक्षा के लिए हिंदुत्व जैसे किसी कृत्रिम संरक्षण की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह स्वयं में परिपूर्ण और सहनशील है।

अय्यर ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि जिस धर्म ने सदियों तक अपना अस्तित्व बनाए रखा और फलता-फूलता रहा, उसे आज अचानक किसी राजनीतिक ढाल की जरूरत क्यों महसूस होने लगी है? उन्होंने स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी के हिंदू धर्म को असली हिंदू धर्म बताया और कहा कि विनायक दामोदर सावरकर का हिंदुत्व गांधी के आदर्शों को न तो आगे बढ़ा सकता है और न ही उन्हें सुरक्षित रख सकता है। उनके अनुसार, हिंदुत्व की अवधारणा हिंदू धर्म के मूल चरित्र के विपरीत है।

हिंदुत्व को बताया भय और पागलपन की स्थिति

मणिशंकर अय्यर ने हिंदुत्व की वर्तमान व्याख्या पर निशाना साधते हुए इसे ‘पागलपन’ की संज्ञा दी। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंदुत्व की राजनीति 80 प्रतिशत बहुसंख्यक हिंदू आबादी के मन में 14 प्रतिशत अल्पसंख्यक मुसलमानों का डर पैदा करती है। अय्यर ने सवाल उठाया कि एक महान और विशाल धर्म को भय की स्थिति में क्यों दिखाया जा रहा है? उन्होंने कहा कि हिंदुत्व का यह स्वरूप हिंदुओं को कांपने के लिए मजबूर करता है, जो कि इस महान धर्म की शक्ति और उदारता का अपमान है।

कांग्रेस नेता ने अपने भाषण में कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि हिंदुत्व के नाम पर समाज के कमजोर वर्गों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और दुर्व्यवहार को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने एक घटना का उदाहरण देते हुए कहा कि कभी चर्च में क्रिसमस भोज में शामिल होने वाली एक आदिवासी बच्ची के साथ बुरा व्यवहार किया जाता है, तो कभी शॉपिंग मॉल्स में क्रिसमस की सजावट पर धावा बोलकर उन्हें हटा दिया जाता है। अय्यर ने इन कृत्यों को हिंदुत्व के हिंसक और असहिष्णु चेहरे के रूप में प्रस्तुत किया।

सावरकर के विचारों और बौद्ध धर्म पर टिप्पणी

मणिशंकर अय्यर ने हिंदुत्व के प्रणेता विनायक दामोदर सावरकर के लेखन का हवाला देते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि सावरकर ने बौद्ध धर्म को हिंदुओं के लिए एक ‘अस्तित्वगत खतरा’ माना था। अय्यर के अनुसार, सावरकर का मानना था कि बौद्ध धर्म द्वारा प्रचारित सार्वभौमिकता और अहिंसा का सिद्धांत राष्ट्रीय शक्ति और हिंदू जाति के अस्तित्व के लिए विनाशकारी है। अय्यर ने तर्क दिया कि सावरकर ने बौद्ध धर्म को हिंदुत्व के विरुद्ध करार दिया था क्योंकि वह अहिंसा को कमजोरी के रूप में देखते थे।

अय्यर ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए सावरकर और गांधी के बीच के वैचारिक मतभेद को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जहां सावरकर हिंसा को शक्ति का आधार मानते थे, वहीं महात्मा गांधी ने प्राचीन भारतीय सभ्यता को मूल रूप से अहिंसक बताया था। अय्यर ने कहा कि सावरकर की विचारधारा यह सिखाती है कि हिंदू हिंसा के माध्यम से स्वयं को पहचानते हैं, जबकि गांधीजी का मानना था कि हिंदू धर्म का आधार त्याग और करुणा है।

गोरक्षा के नाम पर हिंसा और गांधीवादी दर्शन

बहस का एक बड़ा हिस्सा गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा पर केंद्रित रहा। मणिशंकर अय्यर ने इसे हिंदू धर्म और अहिंसा दोनों का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि आज के समय में ‘हिंदुत्ववादी गुंडे’ गोमांस के परिवहन या सेवन के संदेह मात्र पर लोगों को पीटते हैं और उनकी जान ले लेते हैं। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा कि बापू ने स्पष्ट रूप से लिखा था कि गाय की रक्षा के नाम पर किसी मनुष्य की हत्या करना हिंदू धर्म के सिद्धांतों का पूर्ण खंडन है।

अय्यर ने कहा कि गांधीजी गाय को पूज्य मानते थे, लेकिन उन्होंने कभी भी इसके नाम पर हिंसा का समर्थन नहीं किया। उनके अनुसार, हिंदुत्व की वर्तमान विचारधारा ने गोरक्षा जैसे पवित्र मुद्दे को भी नफरत और हिंसा का जरिया बना दिया है। उन्होंने श्रोताओं से अपील की कि वे तय करें कि उन्हें गांधी का शांतिप्रिय हिंदू धर्म चाहिए या सावरकर का वह हिंदुत्व जो बल और भय पर आधारित है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और भविष्य के संकेत

मणिशंकर अय्यर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को लेकर बहस काफी तेज है। उनके बयानों पर भारतीय जनता पार्टी और अन्य दक्षिणपंथी संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना है। आलोचकों का मानना है कि अय्यर के इस तरह के बयान अक्सर चुनाव के समय कांग्रेस के लिए मुश्किलें पैदा करते हैं। हालांकि, अय्यर ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि वे किसी दल के नहीं बल्कि एक विचारधारा के प्रतिनिधि के तौर पर बोल रहे हैं।

कोलकाता की इस डिबेट ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में ‘हिंदू बनाम हिंदुत्व’ का मुद्दा भारतीय राजनीति के केंद्र में रहने वाला है। मणिशंकर अय्यर के इन कड़े शब्दों ने न केवल हिंदुत्व की राजनीति को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि अपनी ही पार्टी के भीतर भी बहस छेड़ दी है कि इस मुद्दे पर कांग्रेस का आधिकारिक रुख क्या होना चाहिए। 2026 की राजनीति में धर्म और विचारधारा के ये टकराव और भी गहरे होने के संकेत दे रहे हैं।

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