• February 3, 2026

लोकसभा में हाई-वोल्टेज ड्रामा: पीएम मोदी और अमित शाह के सामने वेल में उतरे टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी, जमकर हुई नारेबाजी

नई दिल्ली: संसद का बजट सत्र अपनी कार्यवाही के साथ-साथ सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव का गवाह बन रहा है। सोमवार को लोकसभा में उस समय स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी सदन की गरिमा और मर्यादा को दरकिनार करते हुए सीधे ‘वेल’ (सदन के बीचों-बीच स्थित खाली स्थान) में पहुंच गए। बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में उनके ठीक सामने खड़े होकर जोरदार नारेबाजी की। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है, जिसने संसदीय शिष्टाचार और विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के तरीकों पर एक नई बहस छेड़ दी है।

सदन की कार्यवाही के दौरान जब महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा चल रही थी, तभी कल्याण बनर्जी और एक अन्य सांसद अचानक अपनी सीटों से उठकर वेल की ओर दौड़ पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो के अनुसार, बनर्जी प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के बिल्कुल करीब जाकर सीधे तौर पर उन्हें संबोधित करते हुए नारे लगा रहे थे। टीएमसी सांसद लगातार पीएम मोदी और अमित शाह का नाम ले रहे थे और सरकार की नीतियों के खिलाफ तीखे स्वर में प्रदर्शन कर रहे थे। सदन में मौजूद अन्य सांसद इस अप्रत्याशित व्यवहार को देखकर हैरान रह गए, क्योंकि आमतौर पर विपक्षी सदस्य अपनी सीटों से या वेल के किनारे से विरोध दर्ज कराते हैं, लेकिन प्रधानमंत्री के इतने करीब जाकर नारेबाजी करने की घटनाएं कम ही देखने को मिलती हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्थिति को बिगड़ते देख तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने बार-बार कल्याण बनर्जी से अपनी सीट पर लौटने और सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। अध्यक्ष ने स्पष्ट लहजे में कहा कि इस तरह का आचरण सदन की परंपराओं के अनुकूल नहीं है। हालांकि, कल्याण बनर्जी ने अध्यक्ष के निर्देशों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया और काफी देर तक अपनी नारेबाजी जारी रखी। सत्तापक्ष के सदस्यों ने इस व्यवहार पर कड़ी आपत्ति जताई, जबकि विपक्ष के कुछ अन्य सदस्य कल्याण बनर्जी के समर्थन में शोर मचाते दिखे।

दिलचस्प बात यह है कि कल्याण बनर्जी अपनी इस आक्रामक शैली के साथ-साथ सदन के भीतर अपने हल्के-फुल्के और मजाकिया अंदाज के लिए भी जाने जाते हैं। आज का यह तनावपूर्ण नजारा पिछले साल के शीतकालीन सत्र की उन तस्वीरों से बिल्कुल उलट था, जिनमें बनर्जी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ ठिठोली करते नजर आए थे। उस समय का एक वीडियो भी काफी चर्चित हुआ था जिसमें बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता पुनरीक्षण और कथित घुसपैठियों के मुद्दे पर गडकरी के साथ मजे लिए थे।

उस पुराने वाकये को याद करें तो कल्याण बनर्जी ने संसद परिसर में नितिन गडकरी से कानाफूसी करते हुए पूछा था कि क्या उन्हें बंगाल में एक भी घुसपैठिया मिला, जिन्हें बाहर फेंकने की बातें की जाती हैं। उस समय गडकरी ने कोई तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया देने के बजाय केवल मुस्कुराहट के साथ बनर्जी की बातों को सुना था। इतना ही नहीं, गडकरी ने बनर्जी को अपनी अत्याधुनिक हाइड्रोजन कार भी दिखाई थी। उस पर चुटकी लेते हुए बनर्जी ने कहा था, “इतना लेकर क्या करेंगे? एक-दो कार हमारे पास भी भेज दीजिए।” उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी कहा था कि गडकरी जो सुविधाएं अपने सहायकों को देते हैं, वैसी ही कुछ उनके पास भी भेज दें। उनकी इस बात पर वहां मौजूद सभी दलों के सांसद ठहाके मारकर हंस पड़े थे।

संसद के भीतर का यह विरोधाभास कल्याण बनर्जी के व्यक्तित्व और भारतीय संसद की कार्यप्रणाली को दर्शाता है। एक तरफ जहां वे नीतिगत मुद्दों और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सामने वेल में आकर उग्र प्रदर्शन करते हैं, वहीं दूसरी तरफ वे नितिन गडकरी जैसे मंत्रियों के साथ व्यक्तिगत स्तर पर सौहार्दपूर्ण संबंध और हास्य का भाव भी रखते हैं। हालांकि, सोमवार की घटना ने हंसी-मजाक के उन पलों पर कड़वाहट की चादर बिछा दी है।

सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि विरोध करना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के व्यक्तिगत घेरे के पास जाकर नारेबाजी करना सुरक्षा और शिष्टाचार की दृष्टि से चिंताजनक है। वहीं, टीएमसी सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा बंगाल के हितों की अनदेखी और विभिन्न मुद्दों पर सरकार की चुप्पी के कारण सांसदों में भारी रोष है, जो इस तरह के प्रदर्शन के रूप में बाहर आ रहा है।

बजट सत्र के शेष दिनों में भी इसी तरह के हंगामे के आसार बने हुए हैं। विपक्ष जहां बेरोजगारी, महंगाई और संघीय ढांचे पर हमलों के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है, वहीं सरकार कल्याण बनर्जी जैसी घटनाओं को विपक्ष की ‘नकारात्मक राजनीति’ के रूप में पेश कर रही है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चल पाती है या फिर इसी तरह के शक्ति प्रदर्शनों की भेंट चढ़ जाती है। कल्याण बनर्जी का यह आक्रामक अवतार बंगाल की राजनीति में उनके बढ़ते कद और आगामी चुनावों की तैयारियों का संकेत भी माना जा रहा है, जहां वे खुद को एक निडर योद्धा के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।

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