• January 19, 2026

महाराष्ट्र निकाय चुनाव में महायुति की महाविजय: भाजपा ने छत्रपति शिवाजी की ‘चतुरंगिणी सेना’ से की अपनी जीत की तुलना

महाराष्ट्र की राजनीति में आज एक ऐसा सवेरा हुआ जिसने राज्य के सियासी भूगोल को नई परिभाषा दे दी है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) समेत राज्य की 20 महत्वपूर्ण नगर पालिकाओं के चुनाव परिणामों और रुझानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली भाजपा-महायुति गठबंधन ने राज्य की जनता का दिल जीत लिया है। इन चुनाव परिणामों को भाजपा ने न केवल एक जीत बताया, बल्कि इसे ‘नकारात्मक राजनीति’ के अंत की शुरुआत करार दिया है। राजधानी दिल्ली से लेकर मुंबई के गलियारों तक, भाजपा नेताओं के चेहरों पर उत्साह साफ झलक रहा है और पार्टी इस सफलता को छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरवशाली इतिहास से जोड़कर देख रही है।

बीएमसी चुनाव, जिसे ‘मिनी विधानसभा’ भी कहा जाता है, में मिली इस बढ़त ने विपक्ष के उन तमाम दावों की हवा निकाल दी है जिनमें सत्ता विरोधी लहर की बात कही जा रही थी। भाजपा ने इन परिणामों को एक ‘ऐतिहासिक जनादेश’ बताते हुए कहा कि जनता ने विकास और सुशासन के मॉडल पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी है। जीत के इस जश्न के बीच भाजपा के दिग्गज नेताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं, जिनमें विपक्ष पर तीखे प्रहार और जनता के प्रति विनम्र आभार का संगम देखने को मिला।

सुधांशु त्रिवेदी का ‘जय महाराष्ट्र’ और शिवाजी की सेना का उल्लेख

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने चुनाव परिणामों पर अपनी विस्तृत और वैचारिक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस जीत को भारत के सांस्कृतिक गौरव और प्रधानमंत्री मोदी के विजन की संयुक्त जीत बताया। त्रिवेदी ने अपनी बात की शुरुआत मराठी अस्मिता के प्रतीक गीत ‘जय-जय महाराष्ट्र माझा’ से करते हुए कहा कि महाराष्ट्र की महान जनता ने भाजपा को जो अटूट समर्थन दिया है, उसके लिए पार्टी पूरी विनम्रता के साथ नतमस्तक है।

उन्होंने इस जीत की एक बेहद प्रेरणादायक तुलना करते हुए कहा, “यह छत्रपति शिवाजी महाराज की पावन भूमि है। जिस प्रकार महाराज की चतुरंगिणी सेना मन में विजय का अटूट विश्वास और उमंग लेकर आगे बढ़ती थी, ठीक उसी प्रकार आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय नेतृत्व और देवेंद्र फडणवीस के प्रदेश नेतृत्व में भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता और समर्थक विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है।” त्रिवेदी का यह बयान सीधे तौर पर उन मराठी मतदाताओं को साधने की कोशिश थी जो शिवाजी महाराज के सिद्धांतों को अपनी राजनीति का केंद्र मानते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भाजपा की यह सफलता कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि बिहार और केरल में हाल ही में मिली कामयाबियों का विस्तार है, जो दर्शाता है कि भाजपा अब उत्तर से दक्षिण और पश्चिम तक सर्वव्यापी हो चुकी है।

नकारात्मक राजनीति को करारा जवाब

सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्ष, विशेषकर महाविकास अघाड़ी और ‘इंडिया’ गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि यह जनादेश उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक है जो केवल नकारात्मक राजनीति के भरोसे सत्ता पाना चाहते थे। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें विकास रोकने वाले लोग नहीं, बल्कि विकास की गति तेज करने वाले लोग पसंद हैं। त्रिवेदी के अनुसार, यह जीत भविष्य के लिए एक ‘शुभ संकेत’ है जो यह सुनिश्चित करती है कि आने वाले समय में महाराष्ट्र की प्रगति की राह में कोई रोड़ा नहीं अटका पाएगा।

भाजपा का मानना है कि विपक्ष ने पूरे चुनाव के दौरान केवल संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाए और जनता को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन मतदाताओं ने अपने वोट की ताकत से यह बता दिया कि वे केवल काम को प्राथमिकता देते हैं। त्रिवेदी ने जोर देकर कहा कि जिस तरह से शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में भाजपा ने परचम लहराया है, उससे यह साफ है कि मध्यम वर्ग और युवा पीढ़ी भाजपा के आर्थिक विजन के साथ मजबूती से खड़ी है।

तरुण चुघ का राहुल गांधी पर ‘कालिख’ वाला तीखा प्रहार

एक ओर जहां सुधांशु त्रिवेदी ने वैचारिक और सांस्कृतिक पक्ष रखा, वहीं भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने राजनीतिक मोर्चे पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया। चुघ ने महाराष्ट्र में कांग्रेस और ‘इंडी’ गठबंधन की करारी हार पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि भारत की जनता अब बहुत समझदार हो चुकी है और वह कांग्रेस के बहकावे में आने वाली नहीं है।

तरुण चुघ ने एक मुहावरे का प्रयोग करते हुए राहुल गांधी पर हमला बोला, “राहुल जी, आईना साफ मत करिए। आईना साफ करने से आपके मुंह पर लगे राजनीतिक विफलता की कालिख के निशान नहीं मिट सकते।” उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल अपनी हार का ठीकरा हमेशा दूसरों पर फोड़ने की कोशिश करते हैं, कभी वे ईवीएम को दोष देते हैं तो कभी चुनावी प्रक्रिया को। लेकिन हकीकत यह है कि जनता उनके ‘काले कारनामों’ और दिशाहीन राजनीति को वोट की चोट से सजा दे रही है। चुघ ने कहा कि पहाड़ से लेकर सागर तक यानी देश के हर कोने में जनता अब कांग्रेस को पूरी तरह नकार चुकी है।

11 साल आठ महीने की अटूट विजय यात्रा

तरुण चुघ ने इस जीत को एक बड़ी निरंतरता का हिस्सा बताया। उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा की यह विजय यात्रा 26 मई 2014 को शुरू हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार देश की कमान संभाली थी। आज 11 साल और आठ महीने बीत जाने के बाद भी यह यात्रा उसी ऊर्जा और जनसमर्थन के साथ जारी है। चुघ के अनुसार, यह विजय यात्रा इसलिए नहीं रुक रही क्योंकि भाजपा का एकमात्र एजेंडा ‘राष्ट्र प्रथम’ है, जबकि विपक्ष का एजेंडा केवल ‘परिवार प्रथम’ रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि महाराष्ट्र के ये निकाय चुनाव परिणाम आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए एक ट्रेलर की तरह हैं। जनता ने यह संदेश दे दिया है कि वे उन लोगों के साथ नहीं हैं जो केवल सत्ता के लिए बेमेल गठबंधन करते हैं। चुघ ने दावा किया कि भाजपा का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है क्योंकि पार्टी ने जाति और धर्म की राजनीति से ऊपर उठकर ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को जमीन पर उतारा है।

निष्कर्ष: महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए युग का सूत्रपात

बीएमसी समेत 20 नगर निकायों के ये नतीजे केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये महाराष्ट्र की राजनीतिक मानसिकता में आए बड़े बदलाव का संकेत हैं। भाजपा ने खुद को छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत का असली उत्तराधिकारी और आधुनिक महाराष्ट्र का निर्माता बताने में सफलता हासिल की है। सुधांशु त्रिवेदी और तरुण चुघ की ये प्रतिक्रियाएं दर्शाती हैं कि भाजपा अब रक्षात्मक होने के बजाय पूरी तरह से आक्रामक मोड में है और वह विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विचारधारा को भी उतनी ही मजबूती से जनता के बीच ले जा रही है। इन नतीजों ने विपक्ष को गहरे संकट में डाल दिया है, जिसे अब अपनी पूरी रणनीति पर फिर से विचार करना होगा।

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