• January 31, 2026

दिल्ली-एनसीआर में फिर सक्रिय होगा पश्चिमी विक्षोभ: फरवरी की शुरुआत बारिश के साथ होने के आसार, पहाड़ों पर बर्फबारी का अलर्ट

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों (एनसीआर) में मौसम एक बार फिर करवट लेने को तैयार है। पिछले दो दिनों से भले ही बारिश की गतिविधियों पर विराम लगा हो, लेकिन आसमान में बादलों का डेरा और तापमान में होता उतार-चढ़ाव किसी बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में जल्द ही इस साल का तीसरा पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय होने जा रहा है, जिसका सीधा असर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के मौसम पर पड़ेगा। यदि पूर्वानुमान के मुताबिक बारिश होती है, तो यह इस साल का तीसरा अवसर होगा जब दिल्ली-एनसीआर में बेमौसम बरसात दर्ज की जाएगी।

दिल्ली-एनसीआर के तापमान में पिछले 48 घंटों के दौरान काफी बड़े और चौंकाने वाले बदलाव देखे गए हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो 26 जनवरी को जहां अधिकतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस था, वहीं 27 जनवरी को यह अचानक गिरकर 16.9 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। इसके विपरीत, न्यूनतम तापमान में वृद्धि दर्ज की गई; जो 26 जनवरी को 8 डिग्री था, वह 27 जनवरी को बढ़कर 12.6 डिग्री सेल्सियस हो गया। 28 जनवरी को भी अधिकतम तापमान 18 डिग्री और न्यूनतम 12 डिग्री के आसपास बना रहा। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बादलों की मौजूदगी के कारण न्यूनतम तापमान में यह बढ़ोतरी देखी जा रही है, लेकिन 29 जनवरी से एक बार फिर न्यूनतम तापमान में तेज गिरावट आने की संभावना है, जिससे सुबह और रात की ठिठुरन बढ़ सकती है।

मौसम विभाग के बुलेटिन के अनुसार, 31 जनवरी से 2 फरवरी के बीच एक नया और शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करना शुरू करेगा। इस मौसमी प्रणाली के प्रभाव से न केवल मैदानी इलाकों में बारिश होगी, बल्कि पहाड़ों पर भारी बर्फबारी की भी आशंका है। विशेष रूप से 1 फरवरी को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगिट-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद और हिमाचल प्रदेश के ऊपरी इलाकों में भारी हिमपात और मूसलाधार बारिश का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है। इसका असर पर्यटन और यातायात पर भी पड़ सकता है।

निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काइमेट वेदर ने भी दिल्ली के लिए इसी तरह का अनुमान जताया है। स्काइमेट के मुताबिक, 29 और 30 जनवरी को भी दिल्ली के आसमान में ऊंचे बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। हालांकि, राहत की बात यह है कि बीटिंग द रिट्रीट समारोह के दौरान बारिश की संभावना न के बराबर है, लेकिन बादलों के कारण दिन के तापमान में बहुत अधिक बढ़ोतरी नहीं होगी। एजेंसी का विश्लेषण कहता है कि 30 जनवरी की रात के बाद पश्चिमी विक्षोभ के पहाड़ों पर पहुंचने के साथ ही मैदानी इलाकों में एक ‘चक्रवाती परिसंचरण’ (Cyclonic Circulation) विकसित हो सकता है। इन दोनों प्रणालियों के मेल से दिल्ली-एनसीआर में हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश का दौर शुरू होगा।

फरवरी महीने का आगाज भी बारिश की बूंदों के साथ होने की प्रबल संभावना है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 31 जनवरी से 3 फरवरी के बीच दिल्ली और आसपास के इलाकों में छिटपुट बारिश होगी। 31 जनवरी को विशेष रूप से उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में मौसम अधिक उग्र हो सकता है। इस दौरान बादल गरजने, बिजली चमकने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है। इसके अलावा, राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी 31 जनवरी और 1 फरवरी को बारिश होने के आसार हैं, जिससे वहां भी सर्दी का नया स्पेल शुरू हो सकता है।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल पश्चिमी विक्षोभ की बार-बार सक्रियता ने सर्दियों के पैटर्न को बदल दिया है। बेमौसम बारिश और बादलों के कारण कोहरा भले ही कम हुआ हो, लेकिन नमी बढ़ने से ठिठुरन बनी हुई है। आने वाले सप्ताह में होने वाली यह बारिश किसानों के लिए मिश्रित परिणाम ला सकती है, जहां गेहूं की फसल के लिए यह कुछ हद तक फायदेमंद हो सकती है, वहीं तेज हवाओं के साथ होने वाली ओलावृष्टि नुकसानदेह साबित हो सकती है। फिलहाल, दिल्लीवासियों को सलाह दी गई है कि वे सप्ताहांत की योजनाएं मौसम के मिजाज को देखकर ही बनाएं, क्योंकि फरवरी की शुरुआत छाता और गर्म कपड़ों के साथ होने वाली है।

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