जीवन का मिशन: केरल में पहली बार कमर्शियल फ्लाइट से पहुंची किडनी, 8 घंटे की ‘रेस’ ने बचाई जान
तिरुवनंतपुरम/कन्नूर: केरल के चिकित्सा इतिहास में गुरुवार को एक नया और प्रेरणादायक अध्याय लिखा गया। राज्य में पहली बार किसी अंग (ऑर्गन) को एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचाने के लिए एक सामान्य कमर्शियल फ्लाइट का इस्तेमाल किया गया। इंडिगो एयरलाइंस के विमान के जरिए एक 17 वर्षीय किशोरी की किडनी को कन्नूर से तिरुवनंतपुरम पहुंचाया गया। यह पूरी प्रक्रिया किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं थी, जिसमें डॉक्टरों, एयरलाइंस क्रू और केरल राज्य अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (K-SOTTO) के अधिकारियों ने समय के खिलाफ दौड़ लगाते हुए एक 27 वर्षीय महिला को नई जिंदगी देने का सफल प्रयास किया।
आमतौर पर अंगों को ले जाने के लिए नौसेना के विमानों या सरकार द्वारा विशेष रूप से किराए पर लिए गए हेलीकॉप्टरों का उपयोग किया जाता है, लेकिन तकनीकी बाधाओं और समय की कमी के बीच कमर्शियल विमान का यह विकल्प एक गेम-चेंजर साबित हुआ है।
आयोना मॉन्सन का सर्वोच्च बलिदान: मृत्यु के बाद चार लोगों को मिला जीवन
इस पूरी मानवीय पहल के केंद्र में 17 वर्षीय आयोना मॉन्सन है। कन्नूर जिले के पय्यावूर की रहने वाली आयोना एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे का शिकार हो गई थी। स्कूल की इमारत से गिरने के कारण उसे गंभीर चोटें आईं और अंततः डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस दुख की घड़ी में आयोना के परिवार ने एक साहसी फैसला लिया—अपनी बेटी के अंगों को दान करने का।
आयोना के इस सर्वोच्च बलिदान ने न केवल एक, बल्कि कई परिवारों के चिराग बुझने से बचा लिए। जहां उसकी एक किडनी को तिरुवनंतपुरम भेजा गया, वहीं उसकी दूसरी किडनी को कोझिकोड के एमआईएमएस (MIMS) अस्पताल में एक अन्य मरीज को प्रत्यारोपित किया गया। इसके अलावा, उसका लिवर कोझिकोड के ही मैत्रा अस्पताल भेजा गया और उसकी आंखों (कॉर्निया) को कोझिकोड सरकारी मेडिकल कॉलेज को दान किया गया। आयोना की मृत्यु के बाद भी उसकी सांसें अब चार अलग-अलग शरीरों में धड़केंगी।
चुनौती: हेलीकॉप्टर की तकनीकी दिक्कत और इंडिगो का सहयोग
K-SOTTO के कार्यकारी निदेशक डॉ. नोबल ग्रेसियस एसएस ने बताया कि बुधवार देर रात जैसे ही आयोना की किडनी तिरुवनंतपुरम के एक मरीज के लिए आवंटित हुई, सबसे बड़ी चुनौती परिवहन की थी। कन्नूर और तिरुवनंतपुरम के बीच की दूरी सड़क मार्ग से बहुत अधिक है और अंग की व्यवहार्यता (viability) बनाए रखने के लिए उसे जल्द से जल्द पहुंचना अनिवार्य था।
डॉ. नोबल के अनुसार, शुरुआत में हेलीकॉप्टर का उपयोग करने का विचार था, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों और समय की अनुपलब्धता के चलते वह विकल्प सफल नहीं हो सका। ऐसी आपात स्थिति में K-SOTTO ने इंडिगो एयरलाइंस से संपर्क किया। एयरलाइंस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत सहयोग का हाथ बढ़ाया और अंग को ले जाने के लिए विमान में जगह सुनिश्चित की। यह केरल में अपनी तरह का पहला प्रयोग था जहां किसी कमर्शियल फ्लाइट के केबिन में अंग ले जाने वाला विशेष कंटेनर रखा गया।
8 घंटे का सफल सफर: ऑपरेशन थिएटर से एयरपोर्ट तक की दौड़
अंग को सुरक्षित पहुंचाने की यह जटिल प्रक्रिया बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे कन्नूर के एस्टर एमआईएमएस अस्पताल में शुरू हुई। कन्नूर मेडिकल कॉलेज की ऑर्गन ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. नमिता ने इस पूरी प्रक्रिया की कमान संभाली और स्वयं वालंटियर बनकर अंग के साथ यात्रा की।
डॉ. नमिता के अनुसार, अंग निकालने की शल्य चिकित्सा (सर्जरी) सुबह 5 बजे तक पूरी कर ली गई थी। इसके बाद एक विशेष ‘ग्रीन कॉरिडोर’ के माध्यम से सुबह 6 बजे तक टीम कन्नूर एयरपोर्ट पहुंच गई। इंडिगो की फ्लाइट ने कन्नूर से उड़ान भरी। हालांकि, यह सीधी उड़ान नहीं थी; विमान को कोच्चि में रुकना था। कोच्चि में रुकने के दौरान भी यह सुनिश्चित किया गया कि अंग ले जाने वाले कंटेनर की सुरक्षा और तापमान बना रहे। कंटेनर का आकार सामान्य केबिन बैग से बड़ा था, लेकिन विमान के क्रू ने संवेदनशीलता दिखाते हुए इसे केबिन के भीतर सुरक्षित स्थान पर रखने में पूरी मदद की।
तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज में सफल लैंडिंग और प्रत्यारोपण
विमान सुबह करीब 10:45 बजे तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर उतरा। वहां पहले से ही एम्बुलेंस और पुलिस की टीम तैयार थी। बिना समय गंवाए किडनी को तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां परसाला की रहने वाली 27 वर्षीय महिला का ऑपरेशन शुरू किया गया।
यह महिला पिछले काफी समय से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रही थी और एक डोनर का इंतजार कर रही थी। डॉक्टरों का कहना है कि हवाई मार्ग से अंग आने के कारण जो समय बचा, उसने प्रत्यारोपण की सफलता की संभावना को काफी बढ़ा दिया है। अब मरीज की हालत स्थिर है और वह विशेषज्ञों की निगरानी में है।
भविष्य के लिए एक नई उम्मीद और मॉडल
केरल में कमर्शियल फ्लाइट के माध्यम से अंग परिवहन की यह सफलता भविष्य के लिए एक नया मॉडल पेश करती है। अब तक अंगों के परिवहन के लिए सरकारी संसाधनों और महंगे चार्टर्ड विमानों पर निर्भरता रहती थी, लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि कमर्शियल एयरलाइंस के साथ समन्वय करके कम लागत और तेजी से अंगों को स्थानांतरित किया जा सकता है।
केरल सरकार और K-SOTTO के अधिकारियों ने इंडिगो एयरलाइंस, पुलिस विभाग और कन्नूर-तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट अथॉरिटी का आभार व्यक्त किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से राज्य में अंग दान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और परिवहन की नई संभावनाओं से अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सकेगी।
आयोना मॉन्सन की शहादत और डॉक्टरों की इस मेहनत ने यह साबित कर दिया है कि यदि मानवता और तकनीक का सही मेल हो, तो मौत के बाद भी जीवन की उम्मीद को जिंदा रखा जा सकता है।