• January 1, 2026

चीन ने जापान को दिखाई आंख: ताइवान बयान पर सीफूड बैन, भारत की कंपनियों को मिला गोल्डन चांस, लेकिन स्टॉक्स की ये पटरी…

21 नवंबर 2025, नई दिल्ली: एशिया की सुपरपावरों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। जापान की नई प्रधानमंत्री साने ताकाइची के ताइवान पर दिए बयान ने चीन को भड़का दिया, और बीजिंग ने जवाब में जापानी सीफूड पर फिर से सख्त बैन थोप दिया। जापान को अरबों का नुकसान, लेकिन इसी बीच भारत के सीफूड एक्सपोर्टर्स के लिए आसमान छूने का मौका खुल गया। अवंती फीड्स और कोस्टल कॉर्पोरेशन जैसे दिग्गजों के शेयरों में जोरदार उछाल आया, लेकिन अगले ही दिन मुनाफावसूली ने ब्रेक लगाया। फुकुशिमा का पुराना विवाद फिर गरमाया, और ये डिप्लोमैटिक वॉर अब ट्रेड वॉर में बदल चुका है। कौन जीतेगा ये बैटल, और भारत का फायदा कितना टिकेगा? आइए खोलें इस हॉट स्टोरी के पन्ने।

ताकाइची का ताइवान स्टेटमेंट: कैसे भड़का चीन का गुस्सा?

जापान की नई प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने 12 नवंबर 2025 को संसद में जो बयान दिया, वो बीजिंग के लिए लाल किताब का पन्ना बन गया। उन्होंने कहा कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है, तो ये जापान की ‘सर्वाइवल’ को खतरे में डालेगा, और टोक्यो को मिलिट्री रिस्पॉन्स देना पड़ सकता है। ताइवान को अपना हिस्सा मानने वाले चीन ने इसे ‘राजनीतिक उकसावा’ करार दिया। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने चेतावनी दी कि ताकाइची के ‘गलत बयान’ ने चीनी जनता में गुस्सा भड़का दिया है। नतीजा? 19 नवंबर को चीन ने जापानी सीफूड इंपोर्ट्स पर पूरा बैन रीइंफोर्स कर दिया। जापान को अभी ऑफिशियल नोटिस नहीं मिला, लेकिन टोक्यो WTO में शिकायत की तैयारी कर रहा है। ये कदम सिर्फ ट्रेड हिट नहीं, बल्कि डिप्लोमैटिक सिग्नल है – जहां चीन ने दो जापानी फिल्मों की रिलीज रोक दी और टूरिज्म पर एडवाइजरी जारी कर दी। 75 लाख चीनी टूरिस्ट्स के कैंसिलेशन से जापान का टूरिज्म सेक्टर हिल गया। 18 नवंबर की बीजिंग मीटिंग बेनतीजा रही, जहां चीन ने माफी मांगी और जापान ने बैन को ‘अव्यवहारिक’ बताया। एक्सपर्ट्स कहते हैं, ये तनाव सेंकाकू द्वीप विवाद को भी हवा दे रहा है।

फुकुशिमा का पुराना घाव: कैसे बना ये बैन का ट्रिगर?

ये बैन नया नहीं, बल्कि 2023 के फुकुशिमा वाटर रिलीज का रिवाइवल है। 2011 के भूकंप-त्सुनामी से तबाह फुकुशिमा प्लांट से ट्रीटेड रेडियोएक्टिव वाटर को जापान ने अगस्त 2023 में पैसिफिक ओशन में छोड़ना शुरू किया। IAEA ने इसे सेफ बताया, लेकिन चीन ने ‘न्यूक्लियर पॉइजन वाटर’ कहकर सभी जापानी सीफूड पर बैन लगा दिया – जो जापान के 500 मिलियन डॉलर एक्सपोर्ट को झटका था। सितंबर 2025 में IAEA अप्रूवल के बाद चीन ने आंशिक ढील दी, कड़े टेस्टिंग के साथ। नवंबर की शुरुआत में होकाइडो से पहली स्कॉलप शिपमेंट चीन पहुंची, उम्मीद जगी। लेकिन ताकाइची के बयान ने आग में घी डाल दिया। अब बीजिंग का दावा है कि ‘हेल्थ सिक्योरिटी’ के नाम पर फुल बैन जरूरी है, हालांकि एक्सपर्ट्स इसे पॉलिटिकल रिवेंज मान रहे। जापान के फिशिंग इंडस्ट्री को 100-150 मिलियन डॉलर का इमीडिएट लॉस, जहां क्योकोयो और निस्सुई जैसे स्टॉक्स 3% तक गिरे। चीन में घरेलू प्राइसेस बढ़ेंगी, लेकिन झानजियांग गुओलियन जैसे लोकल प्लेयर्स के शेयर चढ़े। ये विवाद IAEA मॉनिटरिंग को भी चैलेंज कर रहा, जहां जापान कहता है सब सेफ है।

स्टॉक्स सरपट दौड़े, लेकिन मुनाफा वसूली ने रोका

चीन का बैन भारत के सीफूड एक्सपोर्टर्स के लिए वरदान साबित हुआ। जापान का 20-25% मार्केट शेयर खाली होते ही वैकल्पिक सप्लायर्स की होड़ मची, और भारत टॉप कंटेंडर बन गया। अमेरिका के 50% टैरिफ्स से जूझ रही कंपनियों के लिए चीन नया गोल्डन मार्केट। बुधवार को खबर फूटते ही अवंती फीड्स के शेयर 10% उछलकर दो महीने का हाई टच किया – कंपनी ने चीन शिपमेंट बढ़ाने की प्लानिंग पहले ही कर ली। कोस्टल कॉर्पोरेशन 5% चढ़ा, जो US प्रेशर में नए मार्केट्स तलाश रहा था। वॉटरबेस लिमिटेड जैसे अन्य स्टॉक्स में भी 1-2% गेन। लेकिन गुरुवार को प्रॉफिट बुकिंग ने ब्रेक लगाया – कोस्टल 2.54% गिरकर 43 रुपये पर बंद, अवंती सिर्फ 0.71% ऊपर 847.65 पर, वॉटरबेस 1% नीचे। एक्सपर्ट्स का मानना है, अगले कुछ महीनों में चीन भारत का सबसे बड़ा ग्रोथ ड्राइवर बनेगा, लेकिन WTO केस या डिप्लोमैटिक सेटलमेंट से रिस्क। फिलहाल, ये शिफ्ट एशियन मार्केट्स को रीशेप कर रहा – जापान हार रहा, भारत जीत रहा।
Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *