आरबीआई मौद्रिक नीति: यूपीआई फ्रॉड पर 25 हजार तक का मुआवजा, रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं और विकास दर का अनुमान बढ़ा
मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष की नई मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान आम उपभोक्ताओं, किसानों और लघु उद्यमियों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। डिजिटल लेनदेन के बढ़ते दौर में साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने ग्राहकों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। आरबीआई ने घोषणा की है कि यूपीआई (UPI) के माध्यम से होने वाले लेनदेन में यदि किसी ग्राहक के साथ फ्रॉड होता है, तो उसे 25 हजार रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा। डिजिटल बैंकिंग के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ाने की दिशा में इसे एक गेम-चेंजर कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने व्यापक आर्थिक परिस्थितियों का आकलन करते हुए रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है, जिससे कर्ज की ईएमआई पर फिलहाल कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
आरबीआई का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश में यूपीआई लेनदेन के आंकड़े हर महीने नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। मुआवजे की इस नई व्यवस्था से उन छोटे खाताधारकों को बड़ी राहत मिलेगी जो अक्सर ऑनलाइन ठगी का शिकार होने के बाद अपनी जमा पूंजी खो देते थे। बैंक का मानना है कि इस सुरक्षा कवच से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी डिजिटल भुगतान को और अधिक बढ़ावा मिलेगा। रेपो रेट के मोर्चे पर, आरबीआई ने नीतिगत दरों में कोई बदलाव न करके यह संकेत दिया है कि उसका ध्यान फिलहाल महंगाई को पूरी तरह नियंत्रित करने पर है। पिछले एक साल के दौरान आरबीआई ने रेपो रेट में कुल 125 बेसिस अंकों की कटौती की थी, जिसका उद्देश्य बाजार में नकदी के प्रवाह को संतुलित कर महंगाई पर लगाम लगाना था। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, बाजार में वर्तमान में लगभग दो लाख करोड़ रुपये की तरलता मौजूद है, जो आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए पर्याप्त है।
आगामी वित्त वर्ष की आर्थिक संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए आरबीआई ने महंगाई दर के भी अनुमान साझा किए हैं। रिजर्व बैंक के अनुसार, नए वित्त वर्ष की पहली तिमाही में महंगाई 4 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 4.2 प्रतिशत के आसपास रहने की उम्मीद है। यह आंकड़ा आरबीआई के निर्धारित लक्ष्य के काफी करीब है, जो स्थिरता का संकेत देता है। इसके साथ ही, वैश्विक अनिश्चितताओं और विभिन्न देशों के साथ भारत के बढ़ते व्यापारिक समझौतों के बीच आरबीआई ने देश की जीडीपी विकास दर के अनुमान को संशोधित किया है। अब भारत की विकास दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जो पहले के 7.3 प्रतिशत के अनुमान से बेहतर है। यह संशोधन भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और आंतरिक मांग में सुधार को दर्शाता है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर के लिए भी रिजर्व बैंक ने सरकार की बजट नीतियों के अनुरूप बड़े कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार द्वारा वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में निवेश और रोजगार सृजन पर दिए गए जोर को आगे बढ़ाते हुए आरबीआई ने एमएसएमई सेक्टर के लिए कर्ज लेने की प्रक्रिया को और सरल बनाने की घोषणा की है। इसके तहत 10 लाख रुपये तक का कर्ज बिना किसी गारंटी के लेने की प्रक्रिया को न केवल सुगम बनाया जाएगा, बल्कि कर्ज की सीमा बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। इस पहल से देश के करोड़ों छोटे उद्यमियों को अपनी कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और रोजगार के मोर्चे पर नए अवसर पैदा होंगे। विशेष रूप से विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के छोटे स्टार्टअप्स के लिए यह एक बड़ी संजीवनी साबित हो सकती है।
किसानों के कल्याण के लिए भी मौद्रिक नीति में विशेष प्रावधानों के संकेत दिए गए हैं। किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना को अधिक प्रभावी और व्यापक बनाने के लिए आरबीआई इसके नियमों में बड़े बदलाव करने पर विचार कर रहा है। बैंक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सस्ते और सुलभ कर्ज का लाभ देश के अंतिम छोर पर खड़े किसान तक पहुंचे। इसके लिए आरबीआई एक विशेष पोर्टल भी लॉन्च करने जा रहा है, जो कर्ज वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाएगा और बिचौलियों की भूमिका को खत्म करेगा। नियमों में बदलाव से उन किसानों को भी बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा जा सकेगा जो अब तक औपचारिक ऋण व्यवस्था से बाहर थे।
विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए आरबीआई ने उन कंपनियों में निवेश की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव किया है जिनका सीधा सार्वजनिक लेनदेन सीमित है। इस कदम से देश में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को वित्तीय सहायता मिलेगी। हालांकि, मौद्रिक नीति की घोषणाओं के बीच शेयर बाजार में कुछ उतार-चढ़ाव देखा गया। एमपीसी के फैसलों से पहले ही बाजार में गिरावट शुरू हो गई थी, जो रेपो रेट स्थिर रहने के बाद भी जारी रही। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा मुनाफावसूली और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों के रुझान के कारण विदेशी मुद्रा भंडार पर कुछ दबाव बना हुआ था। इसके बावजूद, शुक्रवार को रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 723.8 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर बना हुआ है। केंद्रीय बैंक द्वारा सोने की निरंतर खरीद से रुपये की स्थिति में और सुधार आने की संभावना है, जो वैश्विक बाजार में भारतीय मुद्रा को स्थिरता प्रदान करेगा।
आरबीआई की इस नई मौद्रिक नीति ने एक ओर जहां आम आदमी को सुरक्षा का अहसास कराया है, वहीं दूसरी ओर उद्योगों और किसानों के लिए विकास के द्वार खोलने का प्रयास किया है। मुआवजे की नीति और आसान कर्ज की प्रक्रिया आने वाले समय में भारतीय अर्थव्यवस्था के पहियों को और तेजी से घुमाने में मददगार साबित होगी।