अयोध्या राम मंदिर: दिव्य सेवा का विस्तार, 50 नए पुजारियों की नियुक्ति से और सुदृढ़ होगी रामलला की पूजा-अर्चना व्यवस्था
अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। आस्था के इस महाकुंभ और मंदिर परिसर में निर्माणाधीन विभिन्न उप-मंदिरों के आगामी उद्घाटन को देखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक बड़ा निर्णय लिया है। राम जन्मभूमि परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-अर्चना और दर्शन व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित एवं सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जल्द ही करीब 50 नए पुजारियों की भर्ती की जाएगी। यह कदम न केवल मंदिर की आंतरिक व्यवस्थाओं को मजबूती प्रदान करेगा, बल्कि रामलला के दरबार में आने वाले लाखों भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव को और भी सुगम बनाएगा।
वर्तमान में राम मंदिर की सेवा और विभिन्न अनुष्ठानों के संपादन के लिए कुल 20 पुजारी कार्यरत हैं। हालांकि, मंदिर की विशालता और वहां होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों के विस्तार के साथ यह संख्या अब पर्याप्त नहीं रह गई है। मौजूदा पुजारियों पर न केवल मुख्य गर्भगृह में विराजमान रामलला और राम दरबार की सेवा का उत्तरदायित्व है, बल्कि उन्हें शेषावतार मंदिर, परकोटे के भीतर स्थित छह अन्य मंदिरों, यज्ञमंडप, सप्त मंडपम और कुबेर टीला पर प्रतिष्ठित कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में भी पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। जैसे-जैसे परिसर के अन्य हिस्से भक्तों के लिए खोले जा रहे हैं, वैसे-वैसे प्रशिक्षित और समर्पित पुजारियों की कमी महसूस की जा रही है।
राम मंदिर ट्रस्ट की योजना के अनुसार, परिसर में स्थित सात महत्वपूर्ण उप-मंदिरों में नियमित दर्शन की प्रक्रिया को निर्बाध रूप से संचालित करने के लिए पुजारियों की एक बड़ी टीम की आवश्यकता है। इन मंदिरों में पूजा और दर्शन की व्यवस्था तीन अलग-अलग शिफ्टों में चलाने का प्रस्ताव है, ताकि सुबह की पहली आरती से लेकर रात्रि के शयन तक मर्यादा और परंपरा का पालन होता रहे। गणना के अनुसार, इन सात उप-मंदिरों के लिए कम से कम 42 पुजारियों की आवश्यकता है, जो आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में अपनी सेवाएं दे सकें। इसके अतिरिक्त, सप्त मंडपम और कुबेर टीला जैसे महत्वपूर्ण स्थलों पर सुबह सात बजे से शाम सात बजे तक की दो पालियों के लिए कम से कम आठ और पुजारियों की जरूरत है। इस प्रकार, कुल मिलाकर कम से कम 50 नए पुजारियों की तत्काल नियुक्ति अपरिहार्य हो गई है।
भर्ती की इस प्रक्रिया को लेकर ट्रस्ट ने स्पष्ट और कड़े मानक तय किए हैं। चयन किए जाने वाले सभी पुजारी वैदिक परंपराओं, शास्त्रों और पूजा पद्धतियों में पूरी तरह पारंगत होंगे। राम मंदिर की अपनी एक विशिष्ट धार्मिक मर्यादा और परंपरा है, जिसे रामानंद संप्रदाय और अन्य शास्त्रीय मान्यताओं के अनुरूप संचालित किया जाता है। अतः नए पुजारियों को न केवल शास्त्रीय ज्ञान की परीक्षा देनी होगी, बल्कि उन्हें राम मंदिर की विशिष्ट परंपराओं के अनुकूल प्रशिक्षित भी किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मंदिर के प्रत्येक उप-मंदिर और वेदी पर होने वाली सेवा उसी भक्ति और शुद्धता के साथ हो, जैसी मुख्य मंदिर में होती है।
आगामी महीनों में राम जन्मभूमि परिसर में कई नए उप-मंदिरों के द्वार भक्तों के लिए खुलने की संभावना है। इन मंदिरों में महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषाद राज, माता शबरी और माता अहिल्या के मंदिर शामिल हैं। इन मंदिरों में विधिवत प्राण प्रतिष्ठा और दैनिक पूजा की शुरुआत से पहले पुजारियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। ट्रस्ट का उद्देश्य है कि जब भक्त इन उप-मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचें, तो वहां न केवल उन्हें प्रभु के दर्शन हों, बल्कि वहां की शांति, पवित्रता और अनुष्ठानिक व्यवस्था उन्हें मंत्रमुग्ध कर दे।
यह भर्ती प्रक्रिया केवल संख्या बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि सेवा की गुणवत्ता को उच्चतम स्तर पर ले जाने के लिए है। 50 नए पुजारियों के आने से मौजूदा पुजारियों पर कार्य का बोझ कम होगा, जिससे वे प्रत्येक अनुष्ठान को और अधिक एकाग्रता के साथ संपन्न कर सकेंगे। इसके साथ ही, शिफ्ट व्यवस्था लागू होने से यह भी सुनिश्चित होगा कि पुजारी शारीरिक और मानसिक रूप से ऊर्जावान रहें, क्योंकि मंदिर की सेवा में लंबे समय तक खड़े रहकर और पूर्ण श्रद्धा के साथ मंत्रोच्चार करना एक कठिन तपस्या के समान है।
अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या में निरंतर हो रही वृद्धि ने प्रशासन और ट्रस्ट के सामने व्यवस्थापन की नई चुनौतियां पेश की हैं। ऐसे में मानव संसाधन, विशेषकर धार्मिक सेवा के क्षेत्र में वृद्धि करना एक दूरदर्शी निर्णय माना जा रहा है। राम जन्मभूमि परिसर अब केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि एक विशाल आध्यात्मिक केंद्र बन चुका है, जहां की हर व्यवस्था पर पूरी दुनिया की नजरें रहती हैं। 50 नए पुजारियों की यह नियुक्ति प्रभु श्री राम की सेवा को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।