• February 1, 2026

समीर वानखेड़े को बड़ी राहत: कैट ने अनुशासनात्मक आरोपों को किया रद्द, अधिकारियों की कार्रवाई को बताया ‘दुर्भावनापूर्ण’

नई दिल्ली: भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के चर्चित अधिकारी समीर वानखेड़े के लिए कानूनी मोर्चे पर एक बड़ी जीत सामने आई है। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) की प्रधान पीठ ने सोमवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए वानखेड़े के खिलाफ केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) द्वारा शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है। न्यायाधिकरण ने न केवल आरोपों को रद्द किया, बल्कि विभाग के रवैये पर भी बेहद कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे व्यक्तिगत प्रतिशोध और शक्ति का दुरुपयोग करार दिया है।

न्यायमूर्ति रंजीत मोरे (अध्यक्ष) और राजिंदर कश्यप (प्रशासनिक सदस्य) की पीठ ने 18 अगस्त 2025 को जारी किए गए आरोप पत्र को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह कानून और स्थापित नियमों के अनुरूप नहीं है। इस फैसले के बाद अब समीर वानखेड़े के खिलाफ विभाग किसी भी तरह की दंडात्मक कार्यवाही नहीं कर सकेगा और उन्हें वह सभी परिणामी लाभ प्राप्त होंगे जो इस प्रक्रिया के कारण रुके हुए थे।

न्यायाधिकरण की तल्ख टिप्पणी: ‘दिखावा थी विभाग की जांच’

सीएटी ने अपने विस्तृत आदेश में अधिकारियों के आचरण की कड़ी आलोचना की है। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि समीर वानखेड़े के खिलाफ की गई पूरी कार्रवाई निष्पक्ष नहीं थी, बल्कि यह पक्षपात और दुर्भावना से प्रेरित नजर आती है। न्यायाधिकरण ने माना कि वानखेड़े को जानबूझकर प्रताड़ित करने और अपमानित करने के उद्देश्य से यह आरोप पत्र तैयार किया गया था। पीठ के अनुसार, इस आरोप पत्र के आधार पर की जाने वाली कोई भी विभागीय जांच केवल एक ‘औपचारिक दिखावा’ मात्र होती, क्योंकि अधिकारियों ने अपना मन पहले ही बना लिया था और इसका परिणाम पहले से ही तय नजर आ रहा था।

अदालत ने यह भी कहा कि इस प्रकार का प्रशासनिक हस्तक्षेप वानखेड़े को आगे होने वाले उत्पीड़न और अपमान से बचाने के लिए अत्यंत आवश्यक था। न्यायाधिकरण ने सीबीआईसी को फटकार लगाते हुए कहा कि यह मामला कानून में दुर्भावना और व्यक्तिगत प्रतिशोध के साथ-साथ शक्ति के दुरुपयोग का एक ज्वलंत उदाहरण है।

पदोन्नति रोकने और प्रतिशोध की भावना का आरोप

सीएटी ने इस बात पर भी गौर किया कि जिस प्रकार से घटनाक्रमों की श्रृंखला सामने आई, उससे यह साफ झलकता है कि विभाग का मुख्य उद्देश्य वानखेड़े की पदोन्नति (Promotion) में बाधा डालना था। आदेश में कहा गया कि आरोप पत्र में लगाए गए कथित आरोपों का सच्चाई से कोई वास्तविक संबंध नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि विभाग ने वानखेड़े को पेशेवर रूप से नुकसान पहुँचाने के लिए प्रतिशोध की भावना से काम किया।

न्यायाधिकरण इस मामले में सीबीआईसी पर भारी जुर्माना लगाने पर भी विचार कर रहा था, लेकिन अंत में यह फैसला लिया गया कि विभाग को सुधार का एक मौका दिया जाए। पीठ ने उम्मीद जताई कि सरकारी अधिकारी भविष्य में अपने तौर-तरीकों में सुधार करेंगे और कानून के शासन (Rule of Law) का सम्मान करेंगे।

क्या था पूरा विवाद और कॉर्डेलिया क्रूज मामला

समीर वानखेड़े, जो 2008 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं, वर्ष 2020 से जनवरी 2022 तक नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के मुंबई जोन के निदेशक के पद पर तैनात थे। वह तब सुर्खियों में आए जब उनके नेतृत्व में एनसीबी ने मुंबई में ‘कॉर्डेलिया क्रूज’ ड्रग्स मामले में छापेमारी की थी। इस छापेमारी में बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान सहित कई अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले ने न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश में एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक तूफान खड़ा कर दिया था।

बाद में, इस जांच की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए और एनसीबी ने एक विशेष जांच दल (SET) का गठन किया। एसईटी ने जून 2022 में अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें वानखेड़े की जांच में प्रक्रियागत खामियों का जिक्र किया गया था। वानखेड़े ने इस रिपोर्ट को सीएटी में चुनौती देते हुए तर्क दिया था कि जांच का नेतृत्व करने वाले अधिकारी ने स्वयं उस मामले की निगरानी की थी, जो हितों के टकराव का मामला है।

सीबीआई की एफआईआर और वर्तमान स्थिति

मई 2023 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भी समीर वानखेड़े के खिलाफ भ्रष्टाचार और जबरन वसूली की धाराओं में एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी। यह एफआईआर मुख्य रूप से उसी सामग्री और रिपोर्ट पर आधारित थी जो एसईटी द्वारा तैयार की गई थी। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि आर्यन खान को छोड़ने के बदले कथित तौर पर भारी रकम की मांग की गई थी।

इस कार्रवाई के खिलाफ वानखेड़े ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने उन्हें किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया हुआ है। हालांकि सीबीआई का मामला अभी भी अदालत में लंबित है, लेकिन कैट के ताजा फैसले ने विभाग द्वारा शुरू की गई समानांतर अनुशासनात्मक कार्यवाही को खत्म कर वानखेड़े को एक बड़ी प्रशासनिक राहत दी है।

2025 के आरोप पत्र की विसंगतियां

सीबीआईसी ने 18 अगस्त 2025 को जो नया आरोप पत्र जारी किया था, उसमें यह दावा किया गया था कि एनसीबी से तबादला होने के बाद भी वानखेड़े ने विभाग के कानूनी सलाहकार से गोपनीय जानकारी मांगी और जांच को प्रभावित करने की कोशिश की। कैट ने अपने फैसले में इस आरोप पत्र की धज्जियां उड़ाते हुए कहा कि यह उन्हीं पुराने और विवादित तथ्यों पर आधारित है जो पहले से ही लंबित आपराधिक मामलों का हिस्सा हैं। न्यायाधिकरण ने माना कि जब मामला पहले से ही उच्च न्यायपालिका के विचाराधीन है, तो विभाग द्वारा इस तरह से नया आरोप पत्र जारी करना अनुचित था।

इस फैसले के बाद समीर वानखेड़े के समर्थकों ने इसे न्याय की जीत बताया है। यह मामला प्रशासनिक सेवाओं में काम करने वाले अधिकारियों के लिए भी एक नजीर बनेगा कि विभागीय कार्यवाही का उपयोग व्यक्तिगत प्रतिशोध के लिए नहीं किया जा सकता। अब सभी की नजरें बॉम्बे हाईकोर्ट पर टिकी हैं, जहां सीबीआई की एफआईआर को चुनौती देने वाली मुख्य याचिका पर सुनवाई होनी है।

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