मुंबई की सड़कों पर ‘मौत का जाल’: ठेकेदार की लापरवाही से कैब चालक की टूटी पसलियां, 6 लाख खर्च और 2 महीने बाद FIR
मुंबई: मायानगरी मुंबई में सड़क बुनियादी ढांचे के विकास और मरम्मत के दावों के बीच प्रशासनिक लापरवाही की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। बोरीवली पूर्व इलाके में सड़क मरम्मत के दौरान बिना किसी सुरक्षा इंतजाम या चेतावनी बोर्ड के खुले छोड़े गए एक गहरे गड्ढे ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में एक 46 वर्षीय कैब चालक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसकी चार पसलियां टूट गईं और गर्दन में जानलेवा चोटें आईं। इलाज के दौरान असहनीय पीड़ा और छह लाख रुपये के भारी-भरकम खर्च के बाद, अब पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने निर्माण कंपनी और ठेकेदारों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा है।
यह पूरी घटना मुंबई के उपनगरीय इलाके बोरीवली (पूर्व) स्थित कार्टर रोड नंबर 7 की है। कस्तूरबा मार्ग पुलिस थाने में दर्ज आधिकारिक शिकायत के अनुसार, यह हादसा पिछले वर्ष दिसंबर के अंत में हुआ था। पीड़ित परमानंद मौर्य (46), जो एक एग्रीगेटर कैब चालक के रूप में काम कर अपनी आजीविका चलाते हैं, उस रात अपने काम से घर लौट रहे थे। सड़क पर मरम्मत का कार्य चल रहा था और ठेकेदार कंपनी ‘बीएससीपीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड’ द्वारा बीच सड़क पर एक बड़ा गड्ढा खोदा गया था।
मुंबई नगर निगम (BMC) के सख्त दिशा-निर्देशों के बावजूद, संबंधित ठेकेदार और कंपनी ने सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। घटनास्थल पर न तो कोई बैरिकेडिंग की गई थी, न ही रात के समय राहगीरों को सचेत करने के लिए कोई रिफ्लेक्टर या ‘काम चालू है’ का बोर्ड लगाया गया था। अंधेरे के कारण परमानंद मौर्य सड़क पर मौजूद इस खतरे को भांप नहीं पाए और सीधे उस गहरे गड्ढे में जा गिरे।
गड्ढे में गिरने के कारण मौर्य को गंभीर आंतरिक चोटें आईं। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनकी चार पसलियां टूट चुकी हैं और गर्दन की हड्डियों में भी गंभीर फ्रैक्चर है। परमानंद मौर्य के लिए पिछले दो महीने किसी नरक से कम नहीं थे। बिस्तर पर पड़े-पड़े उन्होंने न केवल शारीरिक पीड़ा झेली, बल्कि उनके परिवार को उनके इलाज के लिए करीब छह लाख रुपये का इंतजाम करना पड़ा। एक साधारण कैब चालक के लिए यह राशि पहाड़ जैसी थी, जिसने उनके पूरे परिवार को आर्थिक संकट में डाल दिया।
अपनी चोटों से थोड़ा उबरने के बाद, परमानंद मौर्य बुधवार को कस्तूरबा मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे और अपनी आपबीती सुनाई। उनकी शिकायत की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई की है। पुलिस ने इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार निर्माण कंपनी बीएससीपीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के संस्थापक मानव शाह, कंपनी के अध्यक्ष प्रदीप पांडे और ठेकेदार यश मेहता सहित कुल चार लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है।
एफआईआर में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि आरोपियों ने जानबूझकर सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी की, जो किसी की जान लेने के लिए पर्याप्त थी। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य है और इस मामले में स्पष्ट रूप से ‘आपराधिक लापरवाही’ देखी गई है। हालांकि, प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद अब तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे निर्माण स्थल के पंचनामे और कंपनी के सुरक्षा प्रोटोकॉल की जांच कर रहे हैं, जिसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारियां की जाएंगी।
यह मामला मुंबई में चल रहे सैकड़ों सड़क निर्माण प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है। हर साल मानसून से पहले और बाद में मुंबई की सड़कों की खुदाई की जाती है, लेकिन ठेकेदारों द्वारा सुरक्षा मानदंडों का पालन न करना आम बात हो गई है। परमानंद मौर्य जैसे आम नागरिक अक्सर इन प्रशासनिक और निजी कंपनियों की लापरवाही का शिकार बनते हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पुलिस इन रसूखदार कंपनी मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी या यह मामला भी केवल कागजी कार्यवाही तक सिमट कर रह जाएगा।