महाराष्ट्र निकाय चुनाव: छत्रपति संभाजीनगर में ओवैसी का RSS पर बड़ा हमला, इतिहास और घुसपैठ के मुद्दे पर सरकार को घेरा
छत्रपति संभाजीनगर: महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों का बिगुल बजते ही राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर पहुंच गई है। एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने छत्रपति संभाजीनगर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला। ओवैसी ने न केवल देश की आजादी की लड़ाई में संघ की भूमिका पर सवाल उठाए, बल्कि आरएसएस के संस्थापक डॉ. केबी हेडगेवार के जेल जाने के कारणों को लेकर एक नया दावा पेश कर सियासी गलियारों में बहस छेड़ दी है। अपने संबोधन में उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठ, हिंदुत्व एजेंडा और नागरिकता कानून जैसे संवेदनशील मुद्दों पर मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया।
संघ के इतिहास और हेडगेवार के जेल जाने पर ओवैसी का दावा
जनसभा के दौरान ओवैसी के निशाने पर सबसे ऊपर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रहा। उन्होंने चुनौती देते हुए पूछा कि क्या संघ का कोई ऐसा नेता है जो अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए जेल गया हो? ओवैसी ने दावा किया कि संघ के लोग अक्सर डॉ. केबी हेडगेवार के जेल जाने का जिक्र करते हैं, लेकिन उन्हें ब्रिटिश शासन के विरोध के लिए नहीं, बल्कि ‘खिलाफत आंदोलन’ का समर्थन करने के लिए जेल की सजा हुई थी। ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा कि आज जो लोग मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं, उनके संस्थापक खुद उस आंदोलन का हिस्सा रहे थे जो इस्लामी जगत के खलीफा की बहाली के लिए चलाया गया था।
उल्लेखनीय है कि खिलाफत आंदोलन (1919-1924) प्रथम विश्व युद्ध के बाद तुर्किए के खलीफा के पद की सुरक्षा और ओटोमन साम्राज्य के विघटन के विरोध में अली बंधुओं द्वारा शुरू किया गया था, जिसे बाद में महात्मा गांधी और कांग्रेस का भी समर्थन मिला था। ओवैसी ने इसी ऐतिहासिक संदर्भ का उपयोग करते हुए संघ की विचारधारा पर प्रहार किया।
देशभक्ति के नारे और यूसुफ मेहरअली का जिक्र
ओवैसी ने अपने भाषण में इतिहास के पन्नों को पलटते हुए कहा कि आरएसएस आज देश को देशभक्ति का ज्ञान दे रहा है, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलता। उन्होंने जोर देकर कहा कि आजादी की लड़ाई के दौरान ‘भारत छोड़ो’ (Quit India) और ‘साइमन गो बैक’ जैसे प्रसिद्ध नारे मुंबई के यूसुफ मेहरअली ने दिए थे, जो एक मुसलमान थे। ओवैसी ने आरोप लगाया कि भाजपा और संघ के लोग इतिहास को सही ढंग से नहीं पढ़ते और केवल अपनी राजनीति चमकाने के लिए दूसरों पर ‘बांग्लादेशी’ होने का ठप्पा लगाते हैं। उन्होंने कहा कि देश की मिट्टी में मुसलमानों का खून भी शामिल है और किसी को उनकी वफादारी पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है।
बांग्लादेशी घुसपैठ और मोदी सरकार की ‘विफलता’
महाराष्ट्र के चुनावों में अक्सर गूंजने वाले ‘अवैध बांग्लादेशी’ के मुद्दे पर ओवैसी ने रक्षात्मक रुख अपनाने के बजाय सरकार पर ही हमला बोल दिया। उन्होंने दावा किया कि छत्रपति संभाजीनगर के इस क्षेत्र में कोई भी बांग्लादेशी नहीं है। ओवैसी ने तर्क दिया कि यदि सरकार का यह दावा सही है कि देश में बांग्लादेशी घुसपैठिए मौजूद हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की विफलता है। उन्होंने सवाल किया कि गृह मंत्रालय, खुफिया विभाग, पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के होते हुए विदेशी नागरिक भारत की सीमा में कैसे प्रवेश कर रहे हैं?
ओवैसी ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि मोदी सरकार पिछले कई वर्षों में बांग्लादेश सीमा पर मात्र 10 किलोमीटर की बाड़ लगाने का काम भी पूरा नहीं कर पाई है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज चीन और आईएसआई जैसे तत्व बांग्लादेश में अपनी पैठ बना चुके हैं, जो भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है, लेकिन भाजपा और आरएसएस जमीनी काम करने के बजाय केवल ‘बांग्लादेश-बांग्लादेश’ चिल्लाकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।
हिंदुत्व एजेंडा और नागरिकता कानून पर प्रहार
एआईएमआईएम प्रमुख ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए देश में लगातार हिंदुत्ववादी एजेंडे को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने विशेष रूप से नागरिकता संबंधी प्रक्रियाओं और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर निशाना साधा। ओवैसी के अनुसार, नागरिकता कानून के तहत किसी व्यक्ति की नागरिकता पर सवाल उठाने या उसकी जांच करने का अधिकार केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास होना चाहिए, लेकिन मोदी सरकार ने इन जटिल जिम्मेदारियों को चुनाव आयोग के पाले में डाल दिया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं के दुरुपयोग का एक माध्यम बताया और कहा कि यह सब एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
निकाय चुनावों के लिए एकजुटता की अपील
भाषण के समापन पर ओवैसी ने स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय राजनीति से जोड़ते हुए जनता से आने वाले नगर निगम चुनावों में बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह चुनाव केवल शहर की सफाई या सड़कों का नहीं है, बल्कि यह उन ताकतों को जवाब देने का है जो समाज को बांटना चाहती हैं। उन्होंने अपने समर्थकों से एकजुट रहने और अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर बदलाव लाने का आह्वान किया।
छत्रपति संभाजीनगर की इस जनसभा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में इतिहास, धर्म और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे स्थानीय समस्याओं पर हावी रहने वाले हैं। ओवैसी के इन बयानों के बाद अब भाजपा और संघ की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना है, जिससे राज्य का राजनीतिक पारा और अधिक बढ़ना तय माना जा रहा है।