बीएमसी चुनाव में धांधली का शोर: राज ठाकरे ने चुनावी स्याही पर उठाए गंभीर सवाल, सैनिटाइजर से निशान मिटने का दावा
मुंबई: देश की सबसे अमीर महानगरपालिका, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के लिए हो रहे मतदान के बीच महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाते हुए सत्तापक्ष पर धांधली के आरोप लगाए हैं। मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की उंगलियों पर लगाई जाने वाली अमिट स्याही को लेकर राज ठाकरे द्वारा किए गए दावों ने चुनाव आयोग और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। राज ठाकरे का कहना है कि इस बार चुनाव में पारंपरिक स्याही के बजाय ‘नए पेन’ का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे आसानी से मिटाया जा सकता है।
जैसे-जैसे मतदान की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, विपक्ष के तेवर कड़े होते जा रहे हैं। राज ठाकरे के इन आरोपों ने न केवल बीएमसी चुनाव की विश्वसनीयता पर बहस छेड़ दी है, बल्कि मतदान केंद्रों पर तनाव का माहौल भी पैदा कर दिया है।
स्याही के बजाय ‘मैजिक पेन’ का इस्तेमाल: राज ठाकरे के संगीन आरोप
राज ठाकरे ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए मतदान प्रक्रिया में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा किया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग ने उस पारंपरिक स्याही का इस्तेमाल बंद कर दिया है जो हफ्तों तक उंगली पर टिकी रहती थी। उन्होंने कहा, “जो स्याही पहले इस्तेमाल की जा रही थी, उसे अब एक नए पेन से बदल दिया गया है। इस पेन को लेकर हमें कई निर्वाचन क्षेत्रों से गंभीर शिकायतें मिली हैं। यह स्याही वह ‘अमिट’ निशान नहीं छोड़ रही है, जिसकी उम्मीद एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया में की जाती है।”
मनसे प्रमुख ने आरोप लगाया कि प्रशासन और सरकार जानबूझकर ऐसी तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे चुनावी शुचिता को नुकसान पहुँचे। उन्होंने इसे चुनाव के नाम पर मजाक करार देते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोग हार के डर से इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। उनके अनुसार, पेन के इस्तेमाल से स्याही की गुणवत्ता और उसके सूखने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सैनिटाइजर और स्याही का कनेक्शन: ‘मिटाओ और दोबारा वोट दो’ का दावा
राज ठाकरे ने एक तकनीकी और बेहद चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि इस नए पेन की स्याही को आम घरेलू चीजों से मिटाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “अगर आप हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते हैं, तो उंगली पर लगा यह निशान आसानी से मिट सकता है। इसका मतलब यह है कि कोई व्यक्ति एक बार वोट करेगा, केंद्र से बाहर जाकर सैनिटाइजर या किसी रसायन से हाथ धोएगा और दोबारा वोट डालने आ जाएगा।”
ठाकरे ने तर्क दिया कि कोरोना काल के बाद से हर व्यक्ति के पास सैनिटाइजर उपलब्ध है और मतदान केंद्रों पर भी इसकी मौजूदगी रहती है। ऐसे में स्याही का आसानी से मिट जाना ‘बोगस वोटिंग’ या फर्जी मतदान को बढ़ावा देने की एक सोची-समझी साजिश हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक ही व्यक्ति कई बार मतदान करने में सफल हो जाता है, तो इस चुनाव के नतीजों का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा।
‘सरकार सत्ता के लिए कुछ भी कर सकती है’: चुनाव नियमों पर प्रहार
प्रचार और मतदान के नियमों में बदलाव को लेकर भी राज ठाकरे ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के लिए जो नए नियम बनाए गए हैं, वे केवल विपक्ष को रोकने और सत्ताधारी दल को फायदा पहुँचाने के लिए हैं। राज ठाकरे के अनुसार, “यह सरकार सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी स्तर तक गिर सकती है। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि सत्ता का दुरुपयोग है। हम इसे निष्पक्ष चुनाव नहीं कह सकते, जहाँ कोई मुख्यमंत्री या मंत्री पद पर रहने के लिए इस तरह की धांधली का सहारा ले रहा हो।”
ठाकरे ने इस स्थिति की तुलना एक ऐसी ‘फिक्सिंग’ से की जहाँ खेल शुरू होने से पहले ही नियम बदल दिए जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन अधिकारियों पर ऊपर से दबाव डाला जा रहा है ताकि वे इन विसंगतियों पर आंखें मूंद लें।
शिवसेना कार्यकर्ताओं और जनता से अपील: ‘चौकन्ने रहें, बोगस वोटर पकड़ें’
मतदान के दौरान बढ़ते विवाद को देखते हुए राज ठाकरे ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं और आम जनता से भी सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा, “मैं सभी से अपील करता हूं कि मतदान केंद्रों के बाहर और भीतर पूरी तरह चौकन्ने रहें। अगर कोई भी संदिग्ध व्यक्ति दिखे या कोई अपनी उंगली से निशान मिटाने की कोशिश करे, तो तुरंत उसे पकड़ें और पुलिस के हवाले करें।”
अपने दावे को पुख्ता करने के लिए उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक व्यक्ति को दो बार वोट करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को केवल अपने वोट तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी लोकतंत्र के इस उत्सव में सेंध न लगा पाए।
निष्कर्ष: चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल
राज ठाकरे के इन आरोपों ने बीएमसी चुनाव के पहले चरण के उत्साह के बीच एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। मुंबई जैसे महानगर में, जहाँ हर एक वोट निर्णायक होता है, स्याही के मिटने जैसा आरोप बेहद गंभीर है। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से अभी तक इन विशिष्ट आरोपों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन जमीनी स्तर पर मनसे और अन्य विपक्षी दलों के कार्यकर्ता अब मतदाताओं की उंगलियों की जांच और अधिक बारीकी से कर रहे हैं।
यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह न केवल प्रशासन की विफलता होगी, बल्कि चुनावी पारदर्शिता के मामले में एक बड़ा दाग भी साबित हो सकती है। फिलहाल, मुंबई की सड़कों पर मतदान की कतारों के साथ-साथ अब दावों और प्रति-दावों का दौर भी तेज हो गया है।