• January 31, 2026

बजट सत्र 2026: सर्वदलीय बैठक के साथ संसदीय बिसात बिछी, ‘मेक इन इंडिया’ और जनहित के मुद्दों पर तकरार के आसार

नई दिल्ली: भारतीय लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण विधायी घटनाक्रम ‘बजट सत्र’ का आगाज़ होने जा रहा है। संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने और विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सामंजस्य स्थापित करने के उद्देश्य से मंगलवार को केंद्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय सर्वदलीय बैठक बुलाई। इस बैठक के माध्यम से सरकार ने जहां सत्र के एजेंडे को स्पष्ट किया, वहीं विपक्ष ने भी अपनी रणनीतियों के पत्ते खोलते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह जनहित से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर पीछे हटने वाला नहीं है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के. सुरेश ने सत्र की पूर्व संध्या पर विपक्ष के इरादे साफ कर दिए। समाचार एजेंसी एएनआई से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि आगामी बजट सत्र केवल वित्तीय आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं होना चाहिए, बल्कि यह जनता की समस्याओं को उठाने का एक सशक्त मंच बनना चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि देश के सामने वर्तमान में कई गंभीर चुनौतियां हैं और विपक्षी दल सामूहिक रूप से सरकार से इन ‘ज्वलंत मुद्दों’ पर चर्चा की मांग करेंगे। सुरेश ने आगे बताया कि बुधवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ सत्र की औपचारिक शुरुआत होगी और 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश का आम बजट पेश करेंगी।

सत्र का कार्यक्रम और विधायी ढांचा

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा बुलाई गई यह सर्वदलीय बैठक संसद के मुख्य समिति कक्ष में आयोजित की गई। इस बैठक का प्राथमिक उद्देश्य उन विधायी कार्यों और प्रमुख राष्ट्रीय विषयों पर चर्चा करना था, जिन्हें सरकार इस सत्र के दौरान सदन के पटल पर रखना चाहती है। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। इस लंबी अवधि को दो चरणों में विभाजित किया गया है, जिसके बीच में संसदीय समितियों के कार्यों के लिए एक अवकाश रखा गया है।

सत्र का पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक संचालित होगा। इस दौरान मुख्य रूप से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और बजट पर प्रारंभिक चर्चा होगी। इसके पश्चात, दूसरा चरण 9 मार्च से प्रारंभ होकर 2 अप्रैल को समाप्त होगा। पूरे सत्र के दौरान कुल 30 बैठकें निर्धारित की गई हैं। यह सत्र इसलिए भी विशेष है क्योंकि इसमें वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा, जो देश की आर्थिक दिशा और दशा तय करने वाला सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है।

आर्थिक एजेंडा: घरेलू विनिर्माण को गति देने की तैयारी

बजट की तैयारियों के बीच वित्त मंत्रालय ने उन नीतिगत निर्णयों की ओर संकेत किया है जो आगामी बजट में ‘मेक इन इंडिया’ पहल को और अधिक मजबूती प्रदान कर सकते हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सीमा शुल्क (Customs Duty) के ढांचे में सुधार सरकार की प्राथमिकता रही है। पिछले कुछ निर्णयों का हवाला देते हुए बताया गया कि कैसे फ्लैट पैनल डिस्प्ले पर सीमा शुल्क बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया गया था, ताकि स्थानीय निर्माताओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त मिल सके।

इसी प्रकार, टीवी और मॉनिटर निर्माण के लिए महत्वपूर्ण ‘ओपन सेल’ और अन्य घटकों पर आयात शुल्क घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है। यह कदम ‘ड्यूटी इनवर्जन’ (Inverted Duty Structure) यानी कच्चे माल पर अधिक टैक्स और तैयार माल पर कम टैक्स की विसंगति को दूर करने के लिए उठाया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, सेमीकंडक्टर्स और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्रों में स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए इसी तरह के और अधिक उपायों की घोषणा की जा सकती है।

विपक्ष की चुनौतियां और सरकार की घेराबंदी

भले ही सरकार आर्थिक सुधारों और बजट की बात कर रही हो, लेकिन विपक्ष ने अपनी प्राथमिकताएं अलग तय की हैं। हाल के सत्रों के अनुभवों को देखते हुए यह माना जा रहा है कि मतदाता सूची संशोधन (Voter List Revision) की प्रक्रिया पर विपक्ष सरकार को घेरने की पुरजोर कोशिश करेगा। इसके अलावा, देश के कई हिस्सों में बढ़ता वायु प्रदूषण, कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और बेरोजगारी जैसे मुद्दे संसद में भारी हंगामे का कारण बन सकते हैं।

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि वे केवल चर्चा के आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि उन्हें ठोस जवाब और समाधान चाहिए। के. सुरेश के बयानों से यह स्पष्ट है कि विपक्ष इस बार अधिक आक्रामक मुद्रा में रहने वाला है। विपक्षी गठबंधन के भीतर इस बात पर भी मंथन चल रहा है कि किन मुद्दों पर सरकार को सामूहिक रूप से घेरा जाए ताकि जनहित के विषयों को राष्ट्रीय पटल पर प्रमुखता मिल सके।

कुल मिलाकर, 28 जनवरी से शुरू हो रहा यह बजट सत्र राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत रोमांचक होने वाला है। जहां एक ओर सरकार अपनी लोक-लुभावन घोषणाओं और विकासवादी विजन के जरिए जनता का दिल जीतने की कोशिश करेगी, वहीं दूसरी ओर विपक्ष जनसरोकारों की ढाल बनाकर सरकार की नीतियों की समीक्षा करेगा। कल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से इस लोकतांत्रिक महासमर का शंखनाद होगा।

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