• January 31, 2026

बजट सत्र 2026: राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के लिए 18 घंटे तय, 1 फरवरी को निर्मला सीतारमण पेश करेंगी अपना नौवां बजट

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र की सरगर्मियां तेज हो गई हैं। लोकसभा की व्यापार सलाहकार समिति (बीएसी) की हालिया बैठक में आगामी दिनों की विधायी रूपरेखा तय कर ली गई है। सरकार ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए निचले सदन में कुल 18 घंटे का समय आवंटित किया है। यह महत्वपूर्ण चर्चा दो, तीन और चार फरवरी को आयोजित की जाएगी। सत्र की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं चार फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देंगे, जो राजनीतिक और नीतिगत दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

संसदीय कार्यसूची के अनुसार, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा समाप्त होने के तुरंत बाद सदन का ध्यान देश के आर्थिक भविष्य यानी केंद्रीय बजट पर केंद्रित हो जाएगा। वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट पर आम चर्चा के लिए भी 18 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। यह चर्चा पांच फरवरी से शुरू होकर नौ, दस और ग्यारह फरवरी तक चलेगी। बजट पर व्यापक बहस के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 11 फरवरी को सदन में अपनी बात रखेंगी और विपक्षी दलों द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देंगी। इस चर्चा के माध्यम से सरकार अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं और राजकोषीय योजनाओं को देश के सामने स्पष्ट करेगी।

इस बीच, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश कर दिया है। आर्थिक सर्वेक्षण को किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का सबसे विश्वसनीय और आधिकारिक ‘रिपोर्ट कार्ड’ माना जाता है। इसमें पिछले 12 महीनों के दौरान देश के आर्थिक प्रदर्शन का गहन विश्लेषण किया गया है और भविष्य की चुनौतियों व संभावनाओं का खाका खींचा गया है। इस रिपोर्ट के आने के साथ ही अब 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। दिलचस्प बात यह है कि इस साल बजट एक फरवरी को यानी रविवार को पेश किया जा रहा है, जो सप्ताहांत होने के बावजूद संसदीय परंपराओं के निर्वहन का प्रतीक बनेगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के लिए यह बजट एक ऐतिहासिक उपलब्धि होने वाला है। एक फरवरी को वे अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश करेंगी। भारत के संसदीय इतिहास में यह एक ऐसा कीर्तिमान है जो उनकी आर्थिक नीतियों पर सरकार के अडिग भरोसे को दर्शाता है। आर्थिक सर्वेक्षण में विकास दर, महंगाई की स्थिति और निवेश के आंकड़ों पर जो जोर दिया गया है, उसकी झलक रविवार को पेश होने वाले बजट प्रस्तावों में दिखने की पूरी उम्मीद है। बाजार और आम जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के इस दौर में मध्यम वर्ग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए क्या खास घोषणाएं की जाती हैं।

बजट सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए देश की आर्थिक सेहत पर संतोष व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक ‘उम्मीद की किरण’ बनकर उभरा है। उन्होंने वर्तमान तिमाही की शुरुआत को ‘अत्यंत सकारात्मक’ बताते हुए जोर दिया कि देश अब सुधारों की तीव्र गति यानी ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पर सवार हो चुका है। प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों से आह्वान किया कि वे सत्र के दौरान बाधाएं उत्पन्न करने के बजाय रचनात्मक समाधान खोजने की दिशा में काम करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार उन समस्याओं के दीर्घकालिक समाधान की ओर बढ़ रही है जो दशकों से देश की प्रगति में बाधक बनी हुई थीं।

हालांकि, सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलना एक चुनौती बनी हुई है। मंगलवार को हुई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने अपने तेवर साफ कर दिए थे। विपक्ष ने मनरेगा योजना की बहाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं और यूजीसी के नए नियमों से उपजे विवाद जैसे ज्वलंत मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की मांग की है। विपक्ष का तर्क है कि ये मुद्दे सीधे तौर पर आम जनता और युवाओं के भविष्य से जुड़े हैं, इसलिए सरकार को इन पर जवाब देना चाहिए। इन्हीं हंगामों के बीच गुरुवार दोपहर को लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई और अब सदन की अगली बैठक एक फरवरी को सुबह 11 बजे होगी, जब वित्त मंत्री बजट भाषण पढ़ना शुरू करेंगी।

आर्थिक सर्वेक्षण की महत्ता को समझते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि सरकार की भावी नीतियों का मार्गदर्शक है। इसमें कृषि, सेवा क्षेत्र और विनिर्माण क्षेत्र की स्थिति का जो ब्योरा दिया गया है, वह यह तय करेगा कि बजट में आवंटन की प्राथमिकताएं क्या होंगी। प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को अमलीजामा पहनाने के लिए यह बजट एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

कुल मिलाकर, आने वाले दो सप्ताह भारतीय संसद के लिए बेहद गहमागहमी भरे रहने वाले हैं। एक तरफ जहां सरकार अपने सुधारवादी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, वहीं दूसरी ओर विपक्ष जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर चुका है। रविवार को पेश होने वाला बजट न केवल वित्त मंत्री के करियर का एक बड़ा अध्याय होगा, बल्कि यह देश की आर्थिक दिशा को भी एक नई गति प्रदान करेगा।

Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *