बंगाल की राजनीति में उबाल: संबित पात्रा का ममता सरकार पर ‘बंग-भंग’ का आरोप; बीएलओ की आत्महत्या और घुसपैठियों के मुद्दे पर घेरा
नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर पहुँच गई हैं। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने शनिवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता बनर्जी सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। पात्रा ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी सत्ता को बचाए रखने के लिए ‘तुष्टीकरण’ की उस पराकाष्ठा पर पहुँच गई हैं, जहाँ वे बंगाल को देश की मुख्यधारा से अलग-थलग करने की साजिश रच रही हैं। उन्होंने राज्य की वर्तमान स्थिति की तुलना ऐतिहासिक ‘बंग-भंग’ (बंगाल विभाजन) से करते हुए कहा कि आज बंगाल को तोड़ने की कोशिशें शासन के शीर्ष स्तर से हो रही हैं।
‘क्या बंगाल भारत का हिस्सा है?’ – संबित पात्रा का बड़ा सवाल
संबित पात्रा ने अपनी चर्चा की शुरुआत बंगाल की गौरवशाली विरासत को याद करते हुए की। उन्होंने कहा कि जिस बंगाल की धरती को आध्यात्म, महान तपस्या और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले क्रांतिकारियों के लिए जाना जाता था, आज वही बंगाल हिंसा और संवैधानिक संकट के दौर से गुजर रहा है। पात्रा ने सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से सवाल किया, “क्या बंगाल भारत का हिस्सा है या नहीं? यह सवाल आज हर उस देशवासी के मन में उठ रहा है जो बंगाल में लोकतंत्र को लहूलुहान होते देख रहा है।”
भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की पूरी राजनीति केवल एक विशेष समुदाय के तुष्टीकरण की नींव पर टिकी है। उन्होंने दावा किया कि वोट बैंक की इस राजनीति ने बंगाल के सामाजिक ताने-बाने को इतना कमजोर कर दिया है कि वहां देश के संविधान के बजाय ‘तृणमूल कांग्रेस का कानून’ चलता है। पात्रा के अनुसार, केंद्र सरकार की योजनाओं और संवैधानिक प्रक्रियाओं का बंगाल में जिस तरह विरोध होता है, वह राज्य को एक अलग द्वीप बनाने जैसा है।
एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर छिड़ा घमासान और हिंसा
वर्तमान विवाद की जड़ में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की प्रक्रिया है। संबित पात्रा ने बताया कि यह एक नियमित और संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को दुरुस्त करना और फर्जी मतदाताओं को बाहर करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया नई नहीं है; इससे पहले 2003 में भी एसआईआर प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हुई थी और संसद में इस पर व्यापक चर्चा भी हो चुकी है। देश के अन्य सभी राज्यों में यह प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से चल रही है, लेकिन बंगाल में इसे रोकने के लिए जानबूझकर हिंसा फैलाई जा रही है।
पात्रा ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को बाधित करने के लिए टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने सरकारी मशीनरी पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने कहा कि जब भी कोई अधिकारी कानून के दायरे में रहकर मतदाता सूची की जांच करने की कोशिश करता है, तो उसे सत्ताधारी दल के गुंडों के कोपभाजन का शिकार होना पड़ता है। भाजपा का आरोप है कि ममता सरकार इस प्रक्रिया से इसलिए डरी हुई है क्योंकि इससे उन लाखों अवैध मतदाताओं के नाम कट जाएंगे जो उनके ‘वोट बैंक’ का आधार हैं।
बीएलओ अशोक दास की आत्महत्या: ‘यह खुदकुशी नहीं, हत्या है’
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संबित पात्रा ने एक बेहद संवेदनशील और दुखद मामले का खुलासा किया। उन्होंने जादवपुर विधानसभा क्षेत्र के बूथ नंबर 110 के बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) अशोक दास की मृत्यु का जिक्र करते हुए ममता सरकार को कठघरे में खड़ा किया। पात्रा ने बताया कि अशोक दास एक बेहद ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ सरकारी अधिकारी थे, जो केवल अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे।
आरोप है कि अशोक दास पर टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा भारी दबाव बनाया गया था। पात्रा ने दावा किया कि उन्हें खुली धमकी दी गई थी कि यदि उन्होंने मतदाता सूची से किसी भी ‘घुसपैठिए’ का नाम हटाया, तो उन्हें और उनके परिवार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। लगातार मिल रही इन धमकियों और मानसिक प्रताड़ना से टूटकर अशोक दास ने अंततः आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया। पात्रा ने कड़े शब्दों में कहा, “यह केवल एक आत्महत्या नहीं है, बल्कि सत्ता के संरक्षण में की गई एक प्रशासनिक हत्या है।” उन्होंने यह भी बताया कि अशोक दास की पत्नी ने इस मामले में स्थानीय टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, लेकिन पुलिस की निष्क्रियता प्रशासन की मिलीभगत की ओर इशारा करती है।
घुसपैठियों को संरक्षण और बीडीओ कार्यालय पर हमला
संबित पात्रा ने घुसपैठ के मुद्दे को बंगाल की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया। उन्होंने हाल ही में एक बीडीओ (ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर) कार्यालय पर हुए हमले का उदाहरण देते हुए कहा कि यह घटना टीएमसी विधायक मनीरुल इस्लाम की मौजूदगी में हुई थी। पात्रा ने कहा, “यह किसी धर्म विशेष की कहानी नहीं है, बल्कि यह रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों की कड़वी हकीकत है।”
भाजपा का आरोप है कि ममता बनर्जी सरकार जानबूझकर रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को बंगाल में बसने और उन्हें पहचान पत्र दिलाने में मदद कर रही है। पात्रा के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया इन घुसपैठियों की पहचान उजागर कर सकती है, इसीलिए टीएमसी विधायक और कार्यकर्ता अधिकारियों को डरा-धमका रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि कोई भी विधायक सरकारी कार्यालय पर हमले का नेतृत्व कैसे कर सकता है? पात्रा ने इसे लोकतंत्र की मर्यादा का उल्लंघन और संवैधानिक तंत्र की विफलता करार दिया।
लोकतंत्र की हत्या और बंगाल का भविष्य
संबित पात्रा ने अपने संबोधन के समापन में कहा कि बंगाल में आज जो हो रहा है, वह सिर्फ राजनीति नहीं है, बल्कि यह राज्य के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और ‘दीदी’ के शासन में केवल वही सुरक्षित है जो उनके एजेंडे का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारियों का अपनी जान देना और संवैधानिक प्रक्रियाओं में खून बहना इस बात का प्रमाण है कि ममता सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने पर आमादा है।
भाजपा सांसद ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और चुनाव आयोग से भी इस मामले में संज्ञान लेने की अपील की है ताकि बंगाल में सरकारी कर्मचारी बिना किसी डर के अपना काम कर सकें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बंगाल में इसी तरह हिंसा और तुष्टीकरण का खेल जारी रहा, तो जनता आने वाले चुनावों में इसका करारा जवाब देगी। पात्रा ने साफ किया कि भाजपा बंगाल को ‘बंग-भंग’ की ओर ले जाने वाली ताकतों के खिलाफ अपना संघर्ष और तेज करेगी।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने बंगाल के चुनावी माहौल को और अधिक गर्मा दिया है। अब देखना यह होगा कि तृणमूल कांग्रेस इन गंभीर आरोपों का क्या जवाब देती है और आने वाले दिनों में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राज्य में क्या स्थिति बनती है।