• January 31, 2026

तमिलनाडु में राजभवन बनाम सरकार: राज्यपाल के वॉकआउट पर सीएम स्टालिन का पलटवार, कहा- ‘हमें राष्ट्रवाद सिखाने की जरूरत नहीं’

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में राज्यपाल आर.एन. रवि और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बीच जारी गतिरोध एक नए शिखर पर पहुंच गया है। विधानसभा के संयुक्त सत्र में राज्यपाल द्वारा किए गए वॉकआउट और भाषण न पढ़ने के फैसले पर मुख्यमंत्री स्टालिन ने शनिवार को सदन में जमकर भड़ास निकाली। मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और उनकी सरकार को किसी से राष्ट्रवाद का सर्टिफिकेट लेने की आवश्यकता नहीं है और न ही उन्हें कोई राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ाए।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब राज्यपाल आर.एन. रवि ने विधानसभा सत्र की शुरुआत में राष्ट्रगान (Jana Gana Mana) न बजाए जाने पर आपत्ति जताई और राज्य कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए आधिकारिक भाषण को पढ़े बिना ही सदन से बाहर चले गए। राज्यपाल का तर्क था कि सत्र की शुरुआत राष्ट्रगान से होनी चाहिए, जबकि तमिलनाडु विधानसभा की स्थापित परंपरा के अनुसार सत्र का आरंभ ‘तमिल थाई वझाथु’ (राज्य गीत) से होता है और समापन राष्ट्रगान के साथ किया जाता है।

राज्यपाल पद की गरिमा का अपमान: स्टालिन

शनिवार को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने राज्यपाल के आचरण पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज्यपाल जानबूझकर सरकार के कामकाज में बाधा डाल रहे हैं और कैबिनेट द्वारा विधिवत रूप से तैयार और स्वीकृत भाषण को न पढ़कर उन्होंने अपने संवैधानिक पद का अपमान किया है। स्टालिन ने जोर देकर कहा कि राज्यपाल का सदन से वॉकआउट करना केवल सरकार का विरोध नहीं, बल्कि राज्य की जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों और लोकतांत्रिक परंपराओं का अनादर है।

स्टालिन ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्रियों जैसे सी.एन. अन्नादुरई, एम. करुणानिधि, एम.जी. रामचंद्रन और जे. जयललिता को कभी इस तरह के ‘अनावश्यक संकट’ का सामना नहीं करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए एक व्यक्तिगत और राजनीतिक चुनौती है जिसे वह मजबूती से झेल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनके मन में देश और राष्ट्रगान के प्रति अटूट सम्मान है, लेकिन परंपराओं को तोड़कर राजनीति करना गलत है।

‘द्रविड़ियन मॉडल’ की सफलता और राष्ट्रवाद

अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘द्रविड़ियन मॉडल’ सरकार की उपलब्धियों का भी जमकर बखान किया। उन्होंने कहा कि आज तमिलनाडु विकास के हर पैमाने पर देश के अन्य राज्यों की तुलना में अग्रणी है। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में लागू की गई योजनाओं के कारण ही राज्य का सिर पूरे देश में ऊंचा है। स्टालिन ने कहा कि डीएमके सरकार की पहचान ही एक के बाद एक उपलब्धियां हासिल करना है, जिससे विपक्ष और राजभवन के कुछ लोग असहज महसूस कर रहे हैं।

राष्ट्रवाद के मुद्दे पर राज्यपाल की आपत्तियों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएमके की जड़ें मिट्टी से जुड़ी हैं और उन्हें किसी बाहरी व्यक्ति से यह सीखने की जरूरत नहीं है कि देश के प्रति वफादार कैसे रहा जाता है। उन्होंने कहा, “हम किसी के छद्म राष्ट्रवाद से घबराने वाले नहीं हैं। सत्र के अंत में राष्ट्रगान गाने की हमारी परंपरा दशकों पुरानी है और इसमें कुछ भी असंवैधानिक नहीं है।”

कानून-व्यवस्था और एआईएडीएमके पर निशाना

मुख्यमंत्री ने राज्य की कानून-व्यवस्था का जिक्र करते हुए पिछली एआईएडीएमके सरकार को भी घेरे में लिया। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि वर्तमान डीएमके शासन में अपराध का ग्राफ पिछली सरकार की तुलना में काफी नीचे आया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पारदर्शी तरीके से काम कर रही है और राज्यपाल द्वारा उठाए जा रहे विवाद असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की एक कोशिश मात्र हैं।

तमिलनाडु विधानसभा में हुआ यह वाकयुद्ध दर्शाता है कि आने वाले समय में राजभवन और स्टालिन सरकार के बीच संबंध और भी तनावपूर्ण हो सकते हैं। संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच का यह टकराव राज्य के विधायी कार्यों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल, मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि वे अपनी नीतियों और परंपराओं से पीछे नहीं हटेंगे।

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