• January 3, 2026

जापान का ताइवान पर साहसिक बयान: चीन ने ठोंका ब्रेक, कहा ‘सीमा लांघ ली, अब जवाब मिलेगा’

ताइपे, 24 नवंबर 2025: एशिया के सबसे संवेदनशील मुद्दे पर जापान ने खुलकर ताइवान का साथ दिया, तो बीजिंग में तूफान आ गया। नई प्रधानमंत्री साने ताकाइची का वो बयान – “ताइवान पर चीनी नौसैनिक नाकाबंदी जापान के लिए खतरा, जवाबी कार्रवाई का आधार बनेगा” – ने चीन को भड़का दिया। विदेश मंत्री वांग यी ने इसे “सीमा लांघना” बताते हुए कड़ी चेतावनी दी। 1949 के विभाजन से चले आ रहे ताइवान विवाद में अब जापान सीधे मैदान में उतर आया है। क्या ये बयानबाजी एशिया को युद्ध की ओर धकेलेगी? या सिर्फ राजनयिक जंग का नया दौर? चीन की आक्रामकता और जापान की सतर्कता के बीच ताइवान की किस्मत लटकी हुई है।

जापान की नई लीडर का धमाका: ताइवान पर चीनी हमले को बताया ‘जापान का संकट’

महीने की शुरुआत में जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने संसदीय सुनवाई में ऐसा बयान दिया जो बीजिंग के लिए लाल किताब में गोली की तरह लगा। उन्होंने 2015 के सुरक्षा कानून का हवाला देते हुए कहा, “ताइवान पर चीन की नौसेना की नाकाबंदी या कोई सैन्य कार्रवाई ‘जीवन-खतरे की स्थिति’ पैदा करेगी, जो जापान के लिए जवाबी सैन्य हस्तक्षेप का आधार बनेगी।” पूर्व पीएम शिगेरू इशिबा ने इसे “ताइवान संकट जापान संकट” जैसा बताया। ताकाइची का ये रुख जापान की पुरानी नीति से अलग था, जहां ताइवान पर अस्पष्टता बरती जाती थी। ताइवान स्ट्रेट, जो जापान के ओकिनावा से महज 100 किमी दूर है, अब टेंशन पॉइंट। जापान ने इसे अपनी सुरक्षा से जोड़ दिया, जिससे एशिया पैसिफिक में हलचल मच गई। क्या ये अमेरिका का संकेत है, जो ताइवान को सपोर्ट करता है?

चीन का आग उगलता जवाब: ‘स्तब्ध करने वाला बयान, दृढ़ता से मुंहतोड़ देंगे’

जापान के बयान पर चीन ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया। विदेश मंत्री वांग यी ने कहा, “ये स्तब्ध करने वाली टिप्पणी है। जापान के नेता ने ताइवान में सैन्य हस्तक्षेप का गलत संकेत दिया, जो उन्हें नहीं कहना चाहिए था। उन्होंने वो सीमा लांघी जहां जाना ही नहीं चाहिए।” चीन के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर चेतावनी पोस्ट की – “ताइवान पर आग से खेलना बंद करो।” उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को पत्र लिखकर ताकाइची की आलोचना की, इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। वांग यी ने जोर दिया, “चीन को जापान की हरकतों का दृढ़ता से जवाब देना चाहिए।” ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानने वाले चीन ने जापान को “विस्तारवादी” करार दिया। पिछले हफ्तों से दोनों देशों के बीच डिप्लोमेटिक तनाव चरम पर है।

ताइवान का पुराना दर्द: 1949 का विभाजन, आज भी सैन्य धमकियों का शिकार

1949 में चीनी गृहयुद्ध के बाद कम्युनिस्ट पार्टी ने मुख्यभूमि पर कब्जा किया, तो राष्ट्रवादी सेनाएं ताइवान भाग गईं और वहां अपनी सरकार बिठाई। तब से चीन ताइवान को “रिबेल प्रोविंस” मानता है और स्वतंत्रता को “रेड लाइन”। हाल ही में राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 76वीं वर्षगांठ पर कहा, “अलगाववाद और बाहरी हस्तक्षेप का कड़ा विरोध करेंगे, संप्रभुता की रक्षा हर हाल में।” चीनी सेना नियमित रूप से ताइवान के हवाई-जल क्षेत्र में घुसपैठ करती है – लड़ाकू विमान, युद्धपोत, बड़े अभ्यास। जापान का बयान इस आक्रामकता के खिलाफ खुली चुनौती है। विशेषज्ञ कहते हैं, अगर तनाव बढ़ा तो अमेरिका-जापान गठबंधन सक्रिय हो सकता है। ताइवान के लिए ये संकट का नया दौर है – शांति या युद्ध की कगार पर।
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