कर्नाटक: लोकायुक्त का बड़ा धमाका, सहकारी समिति निदेशक सरफराज खान की 14.38 करोड़ की अवैध संपत्ति का खुलासा
बेंगलुरु: कर्नाटक में भ्रष्टाचार के विरुद्ध जारी मुहिम में लोकायुक्त ने एक बार फिर बड़ी सफलता हासिल की है। आय से अधिक संपत्ति (DA) के मामले में की गई एक सघन जांच के बाद लोकायुक्त ने बुधवार को सहकारी समिति के निदेशक और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी सरदार सरफराज खान की काली कमाई का कच्चा चिट्ठा सार्वजनिक कर दिया है। जांच एजेंसी के अनुसार, खान के पास उनकी ज्ञात और कानूनी आय के स्रोतों से कहीं अधिक मात्रा में चल-अचल संपत्ति पाई गई है, जिसकी कुल कीमत 14.38 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस खुलासे ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि राज्य की राजनीति में भी सरगर्मी बढ़ा दी है।
13 ठिकानों पर छापेमारी और काली कमाई का जाल
इस बड़े खुलासे की पटकथा पिछले महीने ही लिख दी गई थी। लोकायुक्त की टीम ने 24 दिसंबर 2025 को एक गुप्त सूचना के आधार पर सरदार सरफराज खान से जुड़े कुल 13 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। लोकायुक्त द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह ऑपरेशन बेहद गोपनीय और नियोजित था। जांच दल ने खान के निजी आवास, उनके आधिकारिक दफ्तरों और उनके करीबियों व रिश्तेदारों के ठिकानों पर दबिश दी थी।
दिसंबर में हुई इस कार्रवाई के बाद से ही दस्तावेजों और संपत्तियों के मूल्यांकन का कार्य चल रहा था। बुधवार को लोकायुक्त ने अंतिम रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि छापेमारी के दौरान जो साक्ष्य और दस्तावेज मिले, वे खान की आधिकारिक आय से मेल नहीं खाते हैं। अधिकारियों का कहना है कि संपत्तियों का यह अंबार पिछले कुछ वर्षों के दौरान तेजी से खड़ा किया गया था, जो सीधे तौर पर पद के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करता है।
आलीशान मकान, एकड़ में फैली जमीन और करोड़ों का निवेश
लोकायुक्त की तलाशी के दौरान सरदार सरफराज खान की संपत्ति का जो ब्योरा सामने आया है, वह चौंकाने वाला है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, खान के पास कुल चार आलीशान मकान हैं। इसके अलावा, अचल संपत्ति के रूप में उनके पास 37 एकड़ खेती की विशाल जमीन भी मौजूद है। बाजार भाव के अनुसार इस भूमि की कीमत लगभग 8.44 करोड़ रुपये आंकी गई है।
अचल संपत्ति के साथ-साथ खान ने भौतिक सुख-सुविधाओं और निवेश में भी करोड़ों रुपये खपाए हैं। लोकायुक्त को उनके ठिकानों से लगभग तीन करोड़ रुपये मूल्य के सोने-चांदी के गहने और कीमती जेवरात मिले हैं। इसके अलावा, खान के बेड़े में 1.64 करोड़ रुपये मूल्य के लग्जरी वाहन शामिल हैं। वित्तीय सुरक्षा के नाम पर उन्होंने विभिन्न बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और अन्य माध्यमों में करीब 5.94 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश कर रखा था। लोकायुक्त अब इन सभी निवेशों के स्रोतों और बैंक खातों के लेन-देन की बारीकी से जांच कर रहा है।
मंत्री के करीबी होने से गरमाई राज्य की राजनीति
सरदार सरफराज खान केवल एक सहकारी समिति के निदेशक ही नहीं हैं, बल्कि वे वर्तमान में हाउसिंग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में सरकार के सचिव जैसे प्रभावशाली पद पर तैनात हैं। उनकी इस पदस्थापना और लोकायुक्त की कार्रवाई ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। सरफराज खान को राज्य के हाउसिंग और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बी.जेड. जमीर अहमद खान का बेहद करीबी और भरोसेमंद अधिकारी माना जाता है।
मंत्री के करीबी अधिकारी के पास से करोड़ों की बेनामी संपत्ति मिलने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार की मंशा और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के दावों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि लोकायुक्त अब यह भी जांचने की कोशिश करेगा कि क्या इस अवैध संपत्ति के तार किसी राजनीतिक संरक्षण से जुड़े हैं। फिलहाल, लोकायुक्त ने खान के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।