• January 19, 2026

आंध्र प्रदेश शराब घोटाला: वाईएसआर कांग्रेस पर कसता ईडी का शिकंजा, सांसद मिधुन रेड्डी को 3500 करोड़ के मामले में समन

अमरावती/हैदराबाद: आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राज्य के बहुचर्चित 3,500 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले में अपनी जांच तेज करते हुए वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के दिग्गज नेता और सांसद पीवी मिधुन रेड्डी को समन जारी किया है। जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के दौरान हुए इस कथित घोटाले ने अब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ईडी की यह कार्रवाई उस समय हुई है जब पार्टी पहले से ही सत्ता गंवाने के बाद कई कानूनी मोर्चों पर संघर्ष कर रही है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने मिधुन रेड्डी को 23 जनवरी को पूछताछ के लिए बुलाया है, जहां धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत उनके बयान दर्ज किए जाएंगे।

यह मामला केवल मिधुन रेड्डी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के सबसे करीबी सहयोगियों और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग से भी जुड़े बताए जा रहे हैं। ईडी की यह सक्रियता आंध्र प्रदेश पुलिस की विशेष जांच दल (SIT) द्वारा पहले की गई जांच और दाखिल की गई चार्जशीट के आधार पर बढ़ी है। राजनीतिक गलियारों में इस समन को वाईएसआर कांग्रेस के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि मिधुन रेड्डी पार्टी के उन चुनिंदा चेहरों में से हैं जो दिल्ली की राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

23 जनवरी को ईडी दफ्तर में होगी पेशी: क्या बढ़ेंगी मिधुन रेड्डी की मुश्किलें?

प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के अनुसार, सांसद पीवी मिधुन रेड्डी को आंध्र प्रदेश में शराब नीति के क्रियान्वयन के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर जवाब देने के लिए बुलाया गया है। उन पर आरोप है कि पिछली सरकार के कार्यकाल में शराब व्यापार के जरिए अवैध रूप से करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया। यह पहली बार नहीं है जब मिधुन रेड्डी कानून के घेरे में आए हों। इससे पहले जुलाई 2025 में आंध्र प्रदेश पुलिस की एसआईटी ने उन्हें इसी मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल करते हुए गिरफ्तार किया था।

फिलहाल वह अदालत से मिली जमानत पर बाहर हैं, लेकिन ईडी द्वारा प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किए जाने के बाद अब उन पर गिरफ्तारी की तलवार दोबारा लटक सकती है। 23 जनवरी को होने वाली पूछताछ में ईडी के अधिकारी शराब कंपनियों से मिली कथित रिश्वत, बेनामी संपत्तियों और उस धन के अंतिम स्रोत के बारे में सवाल पूछेंगे। जांच एजेंसी का मानना है कि मिधुन रेड्डी इस पूरी कड़ी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे और उनके बयान से घोटाले की बड़ी साजिश का पर्दाफाश हो सकता है।

विजयसाई रेड्डी और जगन मोहन रेड्डी पर गंभीर आरोप

मिधुन रेड्डी से पहले ईडी ने वाईएसआर कांग्रेस के एक और कद्दावर नेता और पूर्व सांसद विजयसाई रेड्डी को भी समन भेजा है। उन्हें 22 जनवरी को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। विजयसाई रेड्डी पर बेहद गंभीर आरोप हैं कि उन्होंने शराब नीति के माध्यम से जुटाए गए अवैध धन को ठिकाने लगाने और उसे पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी तक पहुंचाने में ‘कैरियर’ या बिचौलिए की भूमिका निभाई। एसआईटी की जांच में दावा किया गया है कि 2019 से 2024 के बीच आंध्र प्रदेश में शराब के धंधे को पूरी तरह से एक खास सिंडिकेट के नियंत्रण में रखा गया था।

एसआईटी की चार्जशीट में जगन मोहन रेड्डी का नाम भी शामिल है। पुलिस का आरोप है कि राज्य के तत्कालीन मुखिया को शराब घोटाले से हर महीने औसतन 50 करोड़ रुपये से 60 करोड़ रुपये की रिश्वत मिलती थी। केंद्रीय जांच एजेंसी ने एसआईटी की इसी शिकायत का संज्ञान लेते हुए सितंबर 2025 में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था। अब ईडी इस बात की पुष्टि करने में जुटी है कि क्या वास्तव में सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाकर यह भारी-भरकम राशि राजनीतिक संरक्षण के तहत वसूली गई थी।

सरकारी संस्था के जरिए घोटाले की रची गई साजिश

एसआईटी की जांच में इस घोटाले के ‘मोडस ऑपरेंडी’ यानी काम करने के तरीके का भी खुलासा हुआ है। पुलिस का आरोप है कि जगन मोहन रेड्डी ने जुलाई 2019 में एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की थी, जिसमें नई शराब नीति का खाका तैयार किया गया। इस बैठक में तय किया गया कि अब से शराब की बिक्री निजी दुकानों के बजाय सरकारी संस्था ‘आंध्र प्रदेश स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (APSBCL) के माध्यम से की जाएगी। बाहर से यह कदम शराब माफिया को खत्म करने जैसा लग रहा था, लेकिन जांच अधिकारियों का कहना है कि यह शराब व्यापार पर पूर्ण सरकारी नियंत्रण स्थापित कर अवैध उगाही करने की एक सुनियोजित चाल थी।

आरोप है कि जगन मोहन रेड्डी ने जानबूझकर भारतीय रेलवे यातायात सेवा (IRTS) के अधिकारी डी वासुदेव रेड्डी को इस सरकारी संस्था का प्रबंध निदेशक (MD) नियुक्त किया। वासुदेव रेड्डी की भूमिका को लेकर भी कई सवाल खड़े हुए हैं। जांच में दावा किया गया है कि उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर ऐसी नीतियां बनाईं जिससे कुछ खास शराब ब्रांड्स और सप्लायर्स को फायदा पहुंचे, और बदले में करोड़ों रुपये का कमीशन वसूला गया।

नौकरशाहों की चेतावनी को किया गया नजरअंदाज

इस पूरे प्रकरण में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है कि सरकार के भीतर से ही कुछ ईमानदार अधिकारियों ने इन अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाई थी। चार्जशीट के अनुसार, तत्कालीन आबकारी विशेष मुख्य सचिव और वरिष्ठ नौकरशाह रजत भार्गव ने स्टेट बेवरेजेज कॉर्पोरेशन में हो रही गड़बड़ियों को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को कई बार लिखित और मौखिक रूप से सूचित किया था। भार्गव ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी थी कि कॉर्पोरेशन के कामकाज में पारदर्शिता की भारी कमी है और इसमें भ्रष्टाचार की गंध आ रही है।

हालांकि, इन चेतावनियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत, जो अधिकारी इस सिंडिकेट का हिस्सा बने, उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं। रजत भार्गव की गवाही अब इस मामले में एक अहम सबूत बन गई है, जो यह साबित करती है कि शीर्ष नेतृत्व को घोटाले की जानकारी थी, फिर भी उसे रोकने के बजाय बढ़ावा दिया गया। ईडी अब इन फाइलों और सीएमओ से जुड़ी शिकायतों के रिकॉर्ड को खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि चेतावनियों को दबाने के पीछे कौन से प्रभावशाली लोग थे।

आंध्र प्रदेश की राजनीति में भविष्य की आहट

वाईएसआर कांग्रेस के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है। एक के बाद एक शीर्ष नेताओं को ईडी के समन मिलने से पार्टी के कैडर में बेचैनी बढ़ गई है। पार्टी इसे ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ बता रही है, लेकिन जांच एजेंसियों द्वारा पेश किए जा रहे दस्तावेजी सबूत स्थिति को गंभीर बना रहे हैं। 22 और 23 जनवरी की तारीखें आंध्र प्रदेश की राजनीति का रुख तय कर सकती हैं। यदि ईडी को विजयसाई रेड्डी या मिधुन रेड्डी के बयानों में कोई पुख्ता सुराग मिलता है, तो जांच की आंच सीधे पार्टी प्रमुख जगन मोहन रेड्डी तक पहुंच सकती है।

आंध्र प्रदेश की वर्तमान सरकार भी इस मामले को लेकर काफी आक्रामक है और एसआईटी को पूरी छूट दी गई है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, शराब घोटाले की परतें खुलती जा रही हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वाईएसआर कांग्रेस इन कानूनी चुनौतियों का सामना कर पाएगी या फिर 3,500 करोड़ रुपये का यह शराब घोटाला पार्टी के राजनीतिक भविष्य के लिए सबसे बड़ा रोड़ा साबित होगा।

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