• January 4, 2026

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: अभिषेक बनर्जी का भाजपा पर तीखा हमला, तुलना ‘जहरीले सांप’ से की

पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी पारा अपने चरम पर है। सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस ने उत्तरी बंगाल के अपने अभियान को तेज करते हुए भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार, 3 जनवरी को अलीपुरद्वार में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने बेहद कड़े शब्दों का प्रयोग किया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उत्तराधिकारी माने जाने वाले अभिषेक ने भाजपा की तुलना ‘जहरीले सांप’ से करते हुए जनता को आगाह किया। उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। अभिषेक बनर्जी का यह हमला केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके भाषण ने साफ कर दिया है कि आगामी चुनावों में टीएमसी किसी भी मोर्चे पर झुकने के मूड में नहीं है।

‘आंगन में सांप पालेंगे तो काटेंगे ही’: भाजपा के खिलाफ कड़े रूपकों का प्रयोग

अलीपुरद्वार की रैली में अभिषेक बनर्जी ने भाजपा को राज्य से उखाड़ फेंकने का आह्वान किया। उन्होंने पार्टी की तुलना सांप से करते हुए कहा कि भाजपा एक ऐसी शक्ति है जो अंततः विनाश ही लेकर आती है। बनर्जी ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा, “भाजपा एक सांप की तरह है। अगर आप अपने आंगन में एक सांप रखेंगे या अठारह सांप, इससे फर्क नहीं पड़ता; आखिर में वे आपको डसेंगे ही।” उनका इशारा भाजपा के उन 18 सांसदों की ओर भी माना जा रहा है जो 2019 के लोकसभा चुनाव में बंगाल से जीत कर आए थे। उन्होंने अलीपुरद्वार की जनता से अपील की कि वे इस बार के चुनावों में यह सुनिश्चित करें कि उनके क्षेत्र में एक भी ‘सांप’ यानी भाजपा का प्रतिनिधि न बचे। उन्होंने चेतावनी दी कि भाजपा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता या उन्हें मौका देना जनता के लिए आत्मघाती साबित होगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना: ज्ञानेश कुमार को बताया ‘वैनिश कुमार’

अभिषेक बनर्जी के भाषण का सबसे विवादित हिस्सा वह था जहाँ उन्होंने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर व्यक्तिगत हमला किया। पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर टीएमसी लगातार हमलावर रही है। अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जानबूझकर और मनमाने ढंग से उन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा रहा है जो टीएमसी के समर्थक हो सकते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नाम के साथ छेड़छाड़ करते हुए उन्हें ‘वैनिश कुमार’ (गायब करने वाला) करार दिया। बनर्जी ने तंज कसते हुए कहा, “क्या आप ज्ञानेश कुमार को जानते हैं? वह एक बड़े जादूगर हैं। उनके पास ऐसी जादुई शक्ति है कि वह जीवित और पात्र मतदाताओं को वोटर लिस्ट से गायब कर सकते हैं, जबकि मृत लोगों के नाम सूची में बने रहने देते हैं।”

एसआईआर की तुलना नोटबंदी से: केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप

मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को अभिषेक बनर्जी ने आम जनता के खिलाफ एक बड़ी साजिश बताया। उन्होंने इसकी तुलना 2016 की ‘नोटबंदी’ से करते हुए कहा कि जिस तरह नोटबंदी ने आम आदमी की कमर तोड़ दी थी और उन्हें कतारों में खड़ा कर दिया था, उसी तरह एसआईआर के माध्यम से लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीना जा रहा है। उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार संस्थाओं का उपयोग करके लोगों को गुमराह कर रही है और उनके वोट देने के अधिकार पर हमला कर रही है। अभिषेक ने कहा कि यह प्रक्रिया केवल तकनीकी नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी राजनीतिक मंशा छिपी है ताकि वास्तविक मतदाताओं को चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखा जा सके।

‘भाजपा से दस गुना ज्यादा जिद्दी हूँ’: शक्ति प्रदर्शन और संकल्प

चुनावों की तैयारियों के बीच अभिषेक बनर्जी ने खुद को एक सख्त और अडिग नेता के रूप में पेश किया। उन्होंने भाजपा की रणनीति पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर भाजपा को लगता है कि वे दबाव बनाकर टीएमसी को झुका सकते हैं, तो यह उनकी भूल है। बनर्जी ने दहाड़ते हुए कहा, “मैं भाजपा से दस गुना ज्यादा जिद्दी हूं। यह इतिहास रहा है कि भाजपा केवल उसी के सामने झुकती है जो डटकर मुकाबला करता है।” उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे आने वाले चुनाव में ईवीएम के जरिए भाजपा को करारा सबक सिखाएं। उन्होंने इस चुनाव को संविधान बचाने की लड़ाई करार दिया और कहा कि जो लोग देश के मूल ढांचे और संविधान को बदलना चाहते हैं, उन्हें सत्ता से बेदखल करना ही बंगाल की जनता का एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए।

उत्तर बंगाल का महत्व और 2026 की चुनावी बिसात

अलीपुरद्वार और उत्तर बंगाल का क्षेत्र पारंपरिक रूप से पिछले कुछ चुनावों में भाजपा का गढ़ रहा है। अभिषेक बनर्जी का यहाँ आकर इस तरह का आक्रामक रुख अपनाना यह दर्शाता है कि टीएमसी इस बार भाजपा के मजबूत किलों में सेंध लगाने की पूरी तैयारी कर चुकी है। बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 न केवल ममता बनर्जी की सत्ता को बचाने की लड़ाई है, बल्कि यह अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व कौशल की भी परीक्षा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘सांप’ और ‘वैनिश कुमार’ जैसे शब्दों का प्रयोग ध्रुवीकरण को बढ़ा सकता है, लेकिन यह टीएमसी के कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का काम भी कर रहा है। भाजपा ने फिलहाल इन बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे टीएमसी की हताशा का प्रतीक बताया है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, बंगाल की राजनीति में भाषा और हमलों का यह दौर और भी प्रखर होने की उम्मीद है।

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