• February 26, 2026

वाशिंगटन: ट्रंप प्रशासन की ‘थर्ड कंट्री’ डिपोर्टेशन नीति को फेडरल जज ने गैरकानूनी ठहराया, 15 दिनों के लिए स्थगित; सुप्रीम कोर्ट में अंतिम फैसला संभावित

वाशिंगटन: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को इमिग्रेशन नीति पर एक और बड़ा झटका लगा है। मैसाचुसेट्स के यूएस डिस्ट्रिक्ट जज ब्रायन ई. मर्फी ने बुधवार (25 फरवरी 2026) को 81 पेज के फैसले में होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) की ‘थर्ड कंट्री’ रिमूवल पॉलिसी को अवैध घोषित कर दिया है। इस नीति के तहत बिना पर्याप्त नोटिस और आपत्ति का मौका दिए प्रवासियों को उनके मूल देश के अलावा किसी अन्य देश (थर्ड कंट्री) में निर्वासित किया जा सकता था, जहां उनका कोई संबंध नहीं होता।
जज मर्फी ने फैसले में कहा कि यह नीति अमेरिकी संविधान के ड्यू प्रोसेस (उचित प्रक्रिया) के सिद्धांत का उल्लंघन करती है। उन्होंने जोर दिया कि प्रवासियों को थर्ड कंट्री में भेजे जाने से पहले “अर्थपूर्ण नोटिस” (meaningful notice) और अपनी सुरक्षा संबंधी चिंताएं (जैसे यातना या उत्पीड़न का खतरा) उठाने का अवसर मिलना चाहिए। जज ने लिखा, “यह हमारे कानून हैं… और इस अदालत को गहन कृतज्ञता है कि अमेरिका में जन्म लेने की अविश्वसनीय किस्मत के कारण हम इन कानूनों और राष्ट्र के मूल सिद्धांत की पुष्टि करते हैं: कि इस देश में किसी भी ‘व्यक्ति’ को ‘कानून की उचित प्रक्रिया’ के बिना जीवन, स्वतंत्रता या संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।”फैसले की मुख्य बातें

  • सरकार को पहले प्रवासी को उसके मूल देश या इमिग्रेशन जज द्वारा निर्धारित देश में निर्वासित करने का प्रयास करना होगा।
  • उसके बाद ही थर्ड कंट्री में भेजने पर विचार हो, और तब भी प्रवासी को नोटिस देकर आपत्ति दर्ज करने का मौका मिले।
  • नीति “वैध चुनौतियों को समाप्त कर देती है” क्योंकि निर्वासन चुनौती उठाने से पहले ही लागू हो जाता है।
  • जज ने ट्रंप प्रशासन पर आरोप लगाया कि उसने बार-बार अदालत के आदेशों का उल्लंघन किया या करने की कोशिश की। उदाहरण: पिछले मार्च में कम से कम 6 क्लास सदस्यों को अल सल्वाडोर और मैक्सिको भेज दिया गया बिना आवश्यक प्रक्रिया के।

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, पहले भी फैसला आया थायह मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन के पक्ष में फैसला देते हुए जज मर्फी के पिछले अंतरिम आदेश पर रोक लगाई थी, जिससे दक्षिण सूडान (युद्धग्रस्त देश) में कई प्रवासियों की डिपोर्टेशन फ्लाइट पूरी हो सकी, जहां उनका कोई संबंध नहीं था।

जज मर्फी ने अपने नए फैसले को 15 दिनों के लिए स्थगित (स्टे) कर दिया है, ताकि ट्रंप प्रशासन को अपील करने और सुप्रीम कोर्ट जाने का समय मिल सके। प्रशासन ने कहा है कि वह अपील करेगा और मामला अंततः सुप्रीम कोर्ट में ही तय होगा।
ट्रंप प्रशासन की प्रतिक्रिया और नीति का संदर्भट्रंप प्रशासन ने तेजी से निर्वासन बढ़ाने के लिए यह नीति अपनाई थी, जिसमें अपराधी या अंतिम निर्वासन आदेश वाले प्रवासियों को दूर के देशों (जैसे एस्वातिनी, रवांडा, घाना, दक्षिण सूडान) में भेजा जाता था। ICE अधिकारियों ने कहा कि मई में दक्षिण सूडान भेजे गए 8 पुरुष अमेरिका में अपराधों के लिए दोषी थे।
जज मर्फी (जो जो बाइडेन द्वारा नामित हैं) ने कहा कि यह नीति उन प्रवासियों को निशाना बनाती है जिन्हें उनके मूल देश में यातना या उत्पीड़न से सुरक्षा मिली थी।यह फैसला ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी पर एक और कानूनी चुनौती है, जिससे निर्वासन की गति प्रभावित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला इस मामले में निर्णायक होगा।
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