• January 8, 2026

उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाओं का शंखनाद: 21 फरवरी से शुरू होंगी 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं, 2 लाख से अधिक छात्र देंगे इम्तिहान

देहरादून: उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा परिषद (UBSE) से जुड़े लाखों छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों का इंतजार अब समाप्त हो गया है। शिक्षा विभाग ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं के आधिकारिक कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने मंगलवार को परीक्षा की समय-सारणी जारी करते हुए बताया कि बोर्ड परीक्षाएं 21 फरवरी 2026 से शुरू होकर 20 मार्च 2026 तक संचालित की जाएंगी। इस घोषणा के साथ ही प्रदेश भर के स्कूलों में शैक्षणिक हलचल तेज हो गई है और छात्र अपनी अंतिम दौर की तैयारी में जुट गए हैं।

परीक्षा तिथियों का विस्तृत ब्यौरा और समय-सारणी

शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षाएं लगभग एक महीने तक चलेंगी। 21 फरवरी से शुरू होने वाला यह ‘परीक्षा उत्सव’ 20 मार्च को अपने समापन की ओर बढ़ेगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने स्पष्ट किया कि समय-सारणी इस तरह से तैयार की गई है कि छात्रों को मुख्य विषयों के बीच तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके। परीक्षाओं का आयोजन दो पालियों में किए जाने की संभावना है, जिसमें हाईस्कूल की परीक्षाएं सुबह की पाली में और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं दोपहर की पाली में आयोजित की जा सकती हैं। विस्तृत विषयवार कार्यक्रम बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड किया जा रहा है, ताकि छात्र और शिक्षक अपनी योजना उसी के अनुरूप बना सकें।

2 लाख से अधिक परीक्षार्थियों का भविष्य दांव पर

इस वर्ष उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षाओं में परीक्षार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। डॉ. मुकुल कुमार सती के अनुसार, इस साल प्रदेश भर से 2 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं परीक्षा में सम्मिलित होंगे। इनमें हाईस्कूल के करीब 1.15 लाख और इंटरमीडिएट के लगभग 95 हजार छात्र शामिल हैं। इन परीक्षार्थियों के लिए यह परीक्षा उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है, क्योंकि बोर्ड परीक्षा के अंक ही यह तय करेंगे कि वे उच्च शिक्षा के लिए किस दिशा में कदम बढ़ाएंगे। विशेष रूप से 12वीं के छात्रों के लिए ये परीक्षाएं राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं जैसे CUET, JEE और NEET की तैयारी के साथ-साथ एक बड़ा मनोवैज्ञानिक और शैक्षणिक आधार प्रदान करती हैं।

परीक्षाओं के सुचारू संचालन के लिए प्रशासनिक तैयारियां

माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने मीडिया से बातचीत में आश्वस्त किया कि परीक्षाओं को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए विभाग ने अभी से कमर कस ली है। डॉ. सती ने बताया कि प्रदेश के सभी 13 जिलों में परीक्षा केंद्रों का निर्धारण अंतिम चरण में है। संवेदनशील और अति-संवेदनशील केंद्रों की पहचान की जा रही है, जहां सीसीटीवी कैमरों और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी। विभाग का मुख्य लक्ष्य ‘नकल विहीन’ परीक्षा कराना है। इसके लिए उड़न दस्तों (Flying Squads) का गठन किया गया है जो परीक्षा के दौरान केंद्रों का औचक निरीक्षण करेंगे। साथ ही, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए थानों और कोषागारों में कड़े प्रबंध किए गए हैं।

निष्पक्षता और सुरक्षा पर बोर्ड का विशेष जोर

उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षा परिषद इस बार परीक्षाओं की शुचिता को लेकर बेहद गंभीर है। डॉ. मुकुल कुमार सती ने बताया कि परीक्षा केंद्रों पर किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, मोबाइल फोन या ब्लूटूथ डिवाइस का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा। शिक्षकों और पर्यवेक्षकों को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे ड्यूटी के दौरान नियमों का कड़ाई से पालन करें। बोर्ड का मानना है कि पारदर्शी परीक्षा प्रणाली ही छात्रों की वास्तविक योग्यता का मूल्यांकन कर सकती है। इसके लिए उत्तरपुस्तिकाओं के कोडिंग और बारकोडिंग की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान गोपनीयता बनी रहे।

छात्रों के लिए शिक्षा निदेशक का संदेश और सलाह

परीक्षा तिथियों की घोषणा के साथ ही डॉ. मुकुल कुमार सती ने प्रदेश के छात्र-छात्राओं को विशेष संदेश दिया है। उन्होंने छात्रों से अपील की है कि वे परीक्षा को लेकर किसी भी प्रकार के तनाव या दबाव में न आएं। उन्होंने कहा, “परीक्षा केवल आपकी साल भर की मेहनत का एक मूल्यांकन है, यह जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं है। छात्र शांतचित्त होकर अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें, समय का सही प्रबंधन करें और नियमित रूप से रिवीजन करें।” शिक्षा निदेशक ने अभिभावकों से भी आग्रह किया है कि वे घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखें ताकि बच्चे पूरी एकाग्रता के साथ अपनी तैयारी को अंतिम रूप दे सकें।

उच्च शिक्षा की राह और भविष्य की चुनौतियां

उत्तराखंड बोर्ड की ये परीक्षाएं न केवल अंकों का खेल हैं, बल्कि यह छात्रों के भविष्य की नींव भी हैं। 20 मार्च को परीक्षाएं समाप्त होने के बाद, बोर्ड का लक्ष्य रिकॉर्ड समय में मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी कर अप्रैल के अंत या मई के प्रथम सप्ताह तक परिणाम घोषित करने का है। समय पर परिणाम आने से छात्रों को देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया में शामिल होने में आसानी होगी। इस वर्ष बोर्ड ने पाठ्यक्रम को समय पर पूरा करने और प्री-बोर्ड परीक्षाओं के माध्यम से छात्रों का अभ्यास कराने पर भी जोर दिया है, ताकि मुख्य परीक्षाओं में छात्र उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें।

निष्कर्ष: परीक्षा की घड़ी और अंतिम प्रयास

उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में फैले हजारों स्कूलों में अब केवल एक ही चर्चा है—21 फरवरी की सुबह। छात्रों के बीच जहां एक ओर उत्साह है, वहीं दूसरी ओर घबराहट भी। लेकिन शिक्षा विभाग की पुख्ता तैयारियों और निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती के भरोसे ने छात्रों के मनोबल को बढ़ाने का काम किया है। अब यह छात्रों की मेहनत और उनके शिक्षकों के मार्गदर्शन पर निर्भर करेगा कि उत्तराखंड बोर्ड इस वर्ष सफलता के कितने नए कीर्तिमान स्थापित करता है।

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