US-Russia Peace Talks: यूक्रेन पर मॉस्को में हुई अहम वार्ता, पुतिन के सहयोगी बोले— ‘फायदेमंद, पर अभी बहुत काम बाकी’
यूक्रेन (Ukraine) के साथ जारी लगभग चार साल से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए शांति प्रयासों के तहत रूस (Russia) और अमेरिका (America) के बीच मॉस्को (Moscow) में अहम वार्ता हुई है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के विदेश नीति के सीनियर सहयोगी यूरी उशाकोव (Yuri Ushakov) ने इस वार्ता को ‘फायदेमंद’ बताया है, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया है कि ‘अभी भी बहुत काम बाकी है’। पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ (Steve Witkoff) और उनके दामाद जेरेड कुशनर (Jared Kushner) से क्रेमलिन (Kremlin) में मुलाकात की है। इस हाई-प्रोफाइल बातचीत ने दुनिया में यह उम्मीद जगाई है कि यूक्रेन संकट का समाधान अब कूटनीति के जरिए संभव हो सकता है। आखिर इस 5 घंटे चली वार्ता के मुख्य बिंदु क्या रहे, चलिए जानते हैं पूरा मामला विस्तार से…
कूटनीतिक प्रयास और 5 घंटे की गहन वार्ता की पृष्ठभूमि
यूक्रेन (Ukraine) में शांति स्थापित करने के लिए ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन (Trump Administration) की ओर से नए सिरे से की जा रही कोशिशों के तहत अमेरिका (America) और रूस (Russia) के बीच यह अहम वार्ता मंगलवार देर रात मॉस्को में शुरू हुई। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के सहयोगी यूरी उशाकोव (Yuri Ushakov) ने 5 घंटे की इस बातचीत को ‘काफी उपयोगी, कंस्ट्रक्टिव और ठोस’ बताते हुए इसके महत्व को रेखांकित किया। दोनों पक्ष बातचीत की मुख्य बातें तुरंत सार्वजनिक न करने पर सहमत हुए हैं। उशाकोव ने यह पुष्टि की है कि इस दौरान शांति प्रस्ताव के फ्रेमवर्क पर गहन चर्चा हुई है, जिससे यह पता चलता है कि दोनों महाशक्तियाँ युद्ध को समाप्त करने के लिए एक साझा मंच तलाश रही हैं। हालांकि, बातचीत की गोपनीयता और उशाकोव का ‘काम बाकी है’ वाला बयान यह दर्शाता है कि सहमति बनने में अभी भी कई अवरोध हैं।
रूस का आधिकारिक बयान: ‘कुछ प्रस्ताव ठीक लगे, पर काम जारी रहेगा’
रूसी राष्ट्रपति (Russian President) के सीनियर सलाहकार यूरी उशाकोव (Yuri Ushakov) ने वार्ता के संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘अभी तक, इलाकों (Territories) के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं हुआ है’। यह बयान स्पष्ट करता है कि डोनबास (Donbas) जैसे विवादित क्षेत्रों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद बरकरार हैं। उन्होंने आगे कहा कि ”कुछ अमेरिकी प्रस्ताव कुछ हद तक ठीक लगते हैं, लेकिन उन पर चर्चा करने की जरूरत है। हमें जो शब्द सुझाए गए थे, उनमें से कुछ हमें सूट नहीं करते। इसलिए, काम जारी रहेगा।” इस बयान से यह साफ है कि रूस (Russia) बातचीत की मेज पर मौजूद है, लेकिन वह हर शर्त मानने को तैयार नहीं है। उशाकोव ने असहमति के और भी बिंदुओं की ओर इशारा किया, हालांकि उन्होंने इस बारे में और अधिक जानकारी साझा नहीं की। यह दिखाता है कि दोनों पक्षों के बीच शब्दों और शर्तों को लेकर गहन मोलभाव चल रहा है।
बदला गया शांति प्रस्ताव का फ्रेमवर्क और कीव की अस्वीकृति
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का पीस प्लान (Peace Plan) पिछले महीने सामने आया था, जिसे लेकर कहा गया था कि यह मॉस्को (Moscow) के फेवर में है और इसे कीव (Kyiv) ने तुरंत खारिज कर दिया था। उस प्रपोजल में यूक्रेन (Ukraine) के डोनबास (Donbas) का पूरा पूर्वी इलाका रूस को सौंपना और उसके नाटो (NATO) में शामिल होने जैसी महत्वपूर्ण शर्तों को हटाना शामिल था। हालांकि, अब इस शांति वार्ता का फ्रेमवर्क बदल गया है, जिसे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky) ने पहले से बेहतर बताया है। फ्रेमवर्क में यह बदलाव दर्शाता है कि अमेरिका (America) ने अपनी पुरानी शर्तों से हटकर एक अधिक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है, ताकि कीव की आपत्तियों को कम किया जा सके और शांति वार्ता को आगे बढ़ाया जा सके।
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की का रुख: ‘नतीजे चाहिए, ट्रंप से मिलने को तैयार’
एक ओर विटकॉफ (Witkoff) रूस (Russia) की यात्रा पर हैं, तो वहीं दूसरी ओर यूक्रेन (Ukraine) के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky) इस समय आयरलैंड (Ireland) में हैं। जेलेंस्की यूरोप के उन देशों का दौरा कर रहे हैं, जिनसे रूस के हमले के खिलाफ उनके देश को जंग में मदद मिली है। इस बीच, जेलेंस्की ने शांति वार्ता पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ”बहुत बातचीत हो रही है, लेकिन हमें नतीजे चाहिए। हमारे लोग हर दिन मर रहे हैं।” उन्होंने यह कहकर शांति की आवश्यकता को रेखांकित किया है कि वह राष्ट्रपति ट्रंप (Donald Trump) से मिलने के लिए तैयार हैं। जेलेंस्की का यह रुख स्पष्ट करता है कि यूक्रेन अब केवल आश्वासनों पर नहीं, बल्कि युद्ध समाप्ति के लिए ठोस और समयबद्ध परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। यह शांति वार्ता पर दबाव बनाए रखने की उनकी रणनीति का हिस्सा है।