संयुक्त राष्ट्र की पुष्टि: पहलगाम हमले के लिए TRF जिम्मेदार, लश्कर-ए-तैयबा का भी जिक्र
लखनऊ/ 30 जुलाई : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की निगरानी समिति ने अपनी ताजा रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) पर डाली है। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। UN ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि TRF ने इस हमले की दो बार जिम्मेदारी ली थी और यह संगठन पाकिस्तान समर्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का मुखौटा संगठन है। इस खुलासे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर TRF और लश्कर की आतंकी गतिविधियों पर फिर से सुर्खियां बटोरी हैं।
पहलगाम हमले का विवरण
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस हमले में पांच हथियारबंद आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें 26 लोग मारे गए, जिनमें 25 भारतीय पर्यटक, दो स्थानीय लोग और नेपाल व संयुक्त अरब अमीरात के दो विदेशी पर्यटक शामिल थे। हमलावरों ने खास तौर पर हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया और उनकी धार्मिक पहचान पूछकर गोलीबारी की। इस हमले में 17 से अधिक लोग घायल भी हुए थे।
हमले की जिम्मेदारी TRF ने उसी दिन ली थी, लेकिन बाद में 25 अप्रैल को संगठन ने यू-टर्न लेते हुए दावा किया कि उनका डिजिटल प्लेटफॉर्म हैक हुआ था और जिम्मेदारी का दावा भारतीय खुफिया एजेंसियों की साजिश थी। TRF ने इसे “कश्मीरी प्रतिरोध को बदनाम करने” का प्रयास बताया। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इस दावे को खारिज करते हुए TRF की संलिप्तता की पुष्टि की है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में क्या?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की निगरानी समिति ने अपनी हालिया रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि TRF ने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी दो बार ली थी। यह संगठन लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रॉक्सी संगठन है, जिसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और सैन्य समर्थन प्राप्त है। UNSC ने कहा कि TRF जम्मू-कश्मीर में गैर-कश्मीरियों, खासकर हिंदुओं और सिखों को निशाना बनाने की रणनीति पर काम करता है ताकि क्षेत्र में दहशत फैलाई जा सके।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि TRF का गठन 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद हुआ था, और इसका मकसद कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को एक “स्वदेशी प्रतिरोध” का रूप देना था। संगठन के प्रमुख शेख सज्जाद गुल, जो पाकिस्तान में बैठकर इसे संचालित करता है, को इस हमले का मास्टरमाइंड माना गया है।
लश्कर-ए-तैयबा और TRF का कनेक्शन
भारत और संयुक्त राष्ट्र दोनों ने TRF को लश्कर-ए-तैयबा का एक मुखौटा संगठन करार दिया है। लश्कर-ए-तैयबा, जिसे 2008 के मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है, पाकिस्तान में सक्रिय है और ISI के समर्थन से अपनी गतिविधियां चलाता है। TRF को 2019 में बनाया गया था ताकि लश्कर की गतिविधियों को एक नए नाम के तहत छिपाया जा सके और अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचा जा सके।
भारत सरकार ने 5 जनवरी 2023 को TRF को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आतंकी संगठन घोषित किया था। इसके अलावा, अमेरिका ने 18 जुलाई 2025 को TRF को विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (SDGT) की सूची में शामिल किया, जिसे भारत ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
भारत और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
पहलगाम हमले की निंदा भारत सहित कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने की थी। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे “कायरतापूर्ण और अमानवीय” कृत्य बताया, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि “आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका भारत के साथ मजबूती से खड़ा है।” भारत ने इस हमले के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों पर हमले किए गए, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंक प्रतिबंध समिति के सामने TRF के खिलाफ सबूत पेश किए, जिसके बाद UN ने इस संगठन की भूमिका को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया। विदेश मंत्रालय ने कहा, “TRF ने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी दो बार ली, और यह लश्कर-ए-तैयबा का प्रॉक्सी संगठन है। भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है।”
TRF की रणनीति और इतिहास
TRF का गठन 2019 में हुआ था, और यह जम्मू-कश्मीर में गैर-कश्मीरियों, खासकर हिंदुओं और सिखों को निशाना बनाने के लिए जाना जाता है। संगठन ने 2020 में भाजपा कार्यकर्ता फिदा हुसैन, उमर राशिद बेग और उमर हाजम की हत्या, 2022 में स्कूल शिक्षक रजनी बाला की हत्या, और 2023 में कश्मीरी पंडित संजय शर्मा की हत्या की जिम्मेदारी ली थी। TRF सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे टेलीग्राम और व्हाट्सएप का इस्तेमाल युवाओं को भर्ती करने और प्रचार के लिए करता है।
सर्च ऑपरेशन और जांच
पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, और CRPF ने बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 23 अप्रैल को घटनास्थल का दौरा किया और जांच शुरू की। पुलिस ने तीन आतंकियों के स्केच जारी किए, जिनकी पहचान आसिफ फौजी, सुलेमान शाह और अबू तल्हा के रूप में हुई। इनमें से कम से कम दो विदेशी नागरिक हैं और ये पुंछ क्षेत्र में पहले की आतंकी गतिविधियों से भी जुड़े हैं।