• January 2, 2026

The Real ‘Dhurandhar’: आतंकियों के बीच दो हफ़्ते बिताने वाले मेजर मोहित शर्मा की ख़ौफ़नाक अंडरकवर कहानी!

रणवीर सिंह (Ranveer Singh) अभिनीत नई फिल्म ‘धुरंधर’ के 5 दिसंबर 2025 को रिलीज होने के बाद, दर्शक इसके एक्शन और देशप्रेम से भरे प्लॉट की ज़ोरदार चर्चा कर रहे हैं। हर कोई जानना चाहता है कि क्या यह कहानी वास्तविक जीवन के किसी बेमिसाल फौजी अफसर से प्रेरित है? इस प्रश्न के उत्तर में भारतीय सेना (Indian Army) के स्पेशल फोर्स के शहीद कमांडो मेजर मोहित शर्मा (Major Mohit Sharma) का नाम शीर्ष पर है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से लेकर रक्षा और सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच, उनके रहस्यमय अंडरकवर मिशन की असाधारण बहादुरी के किस्से सुनाए जा रहे हैं। मेजर मोहित शर्मा ने कथित तौर पर आतंकियों के बीच एक आतंकवादी बनकर ऐसा खुफिया मिशन अंजाम दिया, जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। वह कितने दिन मौत को चुनौती देते रहे? तो चलिए जानते हैं इस रियल लाइफ ‘धुरंधर’ की पूरी कहानी क्या है, जानते हैं विस्तार से…

भारतीय सेना के सबसे गोपनीय विंग के जांबाज अफसर

मेजर मोहित शर्मा (Major Mohit Sharma) का जन्म हरियाणा (Haryana) के रोहतक (Rohtak) में हुआ था, जहां से उन्होंने बचपन में ही देश की सेवा का संकल्प लिया। उन्होंने नेशनल डिफेंस अकादमी (National Defence Academy – NDA) और इंडियन मिलिट्री अकादमी (Indian Military Academy – IMA) से अत्यंत कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया। सेना में प्रवेश के बाद, उन्होंने भारतीय सेना (Indian Army) की सबसे खतरनाक मानी जाने वाली यूनिट, 1 पैरा स्पेशल फोर्स (1 Para Special Forces), को चुना। मेजर शर्मा अपनी तीव्र रणनीतिक बुद्धि, निर्णायक साहस और अपनी टीम का नेतृत्व करने की अद्वितीय क्षमता के लिए प्रसिद्ध थे। वे जल्द ही यूनिट के सबसे भरोसेमंद और कुशल अधिकारियों में शुमार हो गए। उनकी विशेषज्ञता दुश्मन के इलाके में छिपकर घुसना और अचूक ऑपरेशन को अंजाम देना थी, जिसके कारण उन्हें केवल सबसे उच्च-जोखिम वाले मिशन ही सौंपे जाते थे।

‘इफ्तिखार भट्ट’ का भेष और दो हफ्ते का खतरनाक मिशन

साल 2004 में, मेजर मोहित शर्मा (Major Mohit Sharma) को जम्मू-कश्मीर (Jammu & Kashmir) के शोपियां (Shopian) क्षेत्र में एक असाधारण रूप से खतरनाक अंडरकवर ऑपरेशन की जिम्मेदारी दी गई। इस मिशन के लिए उन्होंने अपनी पहचान पूरी तरह से बदल ली और खुद को ‘इफ्तिखार भट्ट’ नाम के व्यक्ति के रूप में स्थापित किया, जो सेना से अपने काल्पनिक भाई की मौत का बदला लेने का इरादा रखता था। उन्होंने अपने रूप (लंबे बाल, दाढ़ी) के साथ-साथ अपनी आवाज और व्यवहार तक में परिवर्तन कर लिया। इस भेस में, वह लगभग दो हफ्तों तक हिजबुल मुजाहिदीन (Hizbul Mujahideen) के कट्टर आतंकियों के बीच रहे। इस दौरान, उन्होंने दुश्मनों के ठिकानों, उनकी गतिविधियों, हथियार और गोला-बारूद के सप्लाई चेन और आगामी योजनाओं से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी एकत्रित की। हर पल, उनकी पहचान उजागर होने का खतरा था, जो सीधे उनकी जान ले सकता था।

जब भेद खुलने पर मेजर ने खुद संभाला मोर्चा

करीब दो सप्ताह के जोखिम भरे अंडरकवर ऑपरेशन के बाद, एक निर्णायक मोड़ आया जब आतंकियों के सामने मेजर मोहित शर्मा (Major Mohit Sharma) की असली पहचान खुल गई। दुश्मन द्वारा चारों ओर से घेर लिए जाने के बावजूद, मेजर शर्मा ने अद्भुत संयम और शौर्य का प्रदर्शन किया। उन्होंने अकेले ही आतंकियों से लोहा लिया और ताबड़तोड़ फायरिंग में हिजबुल के दो कुख्यात आतंकी—अबू तोरारा (Abu Torara) और अबू सब्जार (Abu Sabzar)—को मौके पर ही मार गिराया। इस कार्रवाई के बाद, भारतीय सेना (Indian Army) की बैकअप टीम ने तेजी से इलाके को सुरक्षित किया और ऑपरेशन को सफल बनाया। सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां इस मिशन को भारतीय इतिहास के सबसे साहसी जासूसी अभियानों में से एक मानती हैं, जिसने घाटी में आतंकी नेटवर्क की कमर तोड़ दी थी। यह निस्संदेह मेजर शर्मा के अद्भुत साहस का प्रमाण था।

2009 की शहादत और बहादुरी का सर्वोच्च सम्मान

मार्च 2009 में, मेजर मोहित शर्मा (Major Mohit Sharma) को जम्मू-कश्मीर (Jammu & Kashmir) के कुपवाड़ा (Kupwara) जिले के घने जंगलों में एक और बड़े ऑपरेशन का नेतृत्व करने का आदेश मिला। यह इलाका आतंकवादियों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना माना जाता था। मुठभेड़ के दौरान, भारी गोलीबारी में मेजर शर्मा को कई गोलियां लगीं। प्राणघातक चोटें लगने के बावजूद, उन्होंने पीछे हटने से साफ मना कर दिया और अपनी टुकड़ी का नेतृत्व जारी रखा। उनकी प्रेरणा और मार्गदर्शन में, भारतीय सेना (Indian Army) ने चार आतंकवादियों को मार गिराया। दुर्भाग्यवश, मेजर शर्मा अपनी चोटों के कारण शहीद हो गए। देश के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान और अद्वितीय वीरता को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत सम्मानित किया गया। आज, ‘धुरंधर’ फिल्म के माध्यम से, देश एक बार फिर इस रियल लाइफ हीरो, मेजर मोहित शर्मा, के शौर्य और देशभक्ति को गर्व के साथ याद कर रहा है।

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