• February 19, 2026

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार: मुफ्त योजनाओं के बंटवारे से देश का आर्थिक विकास बाधित हो रहा, सभी राज्यों को चेतावनी

नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने देश के सभी राज्यों में राजनीतिक दलों द्वारा दी जा रही मुफ्त योजनाओं (फ्रीबीज) की कड़ी आलोचना की है और कहा है कि इससे सार्वजनिक वित्त पर भारी बोझ पड़ रहा है तथा आर्थिक विकास की राह में बाधा उत्पन्न हो रही है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि यह समस्या किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के सभी राज्यों में देखी जा रही है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत का बयान
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा, “इस तरह की फिजूलखर्ची से देश का आर्थिक विकास बाधित होगा। हां, यह राज्य का कर्तव्य है कि वह संसाधन उपलब्ध कराए। लेकिन जो लोग मुफ्त योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं… क्या इस पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है?”
उन्होंने आगे कहा, “राज्य घाटे में चल रहे हैं, फिर भी मुफ्त योजनाएं दे रहे हैं। देखिए, आप एक वर्ष में जो राजस्व एकत्र करते हैं उसका 25 प्रतिशत राज्य के विकास के लिए क्यों नहीं इस्तेमाल किया जा सकता?”
न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने उठाया सवाल
न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने टिप्पणी की, “हम किसी एक राज्य की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि सभी राज्यों की बात कर रहे हैं। यह नियोजित व्यय है। आप बजट प्रस्ताव क्यों नहीं पेश करते और यह स्पष्टीकरण क्यों नहीं देते कि यह बेरोजगारी से जूझ रहे लोगों पर मेरा व्यय है?”
चुनावी फ्रीबीज पर तमिलनाडु सरकार को फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने खास तौर पर तमिलनाडु सरकार को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि चुनाव से पहले मुफ्त योजनाओं का अंधाधुंध वितरण एक खतरनाक कल्चर पैदा कर रहा है, जिसमें काम न करने वालों को इनाम मिल रहा है। मुख्य न्यायाधीश ने तमिलनाडु सरकार से सवाल किया, “अगर आप फ्री खाना, फ्री बिजली और फ्री साइकिल देने की शुरुआत करते हैं… तो आप किस तरह का कल्चर बना रहे हैं?”
कोर्ट ने चेतावनी दी कि ऐसे मामलों में दूसरे राज्यों को भी कड़ा संदेश दिया जाएगा। न्यायालय का कहना है कि राजनीतिक पार्टियों को मुफ्त योजनाओं के माध्यम से वोट बैंक मजबूत करने के बजाय ऐसी सुनियोजित नीतियां बनानी चाहिए जो लोगों के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार ला सकें, जैसे बेरोजगारी भत्ता या कौशल विकास योजनाएं।
सुनवाई का संदर्भ
यह टिप्पणियां तमिलनाडु सरकार की मुफ्त योजनाओं से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान आईं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुफ्त योजनाओं का वितरण उन लोगों तक भी पहुंच रहा है जो यूटिलिटीज और सेवाओं के लिए भुगतान करने में सक्षम हैं, जो आर्थिक रूप से असंतुलन पैदा कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से अपील की है कि वे बजट में पारदर्शिता लाएं और विकास पर फोकस करें, न कि अल्पकालिक लोकलुभावन योजनाओं पर। यह फैसला आने वाले दिनों में कई राज्यों की नीतियों पर असर डाल सकता है।
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