• January 20, 2026

Sim Binding Rule Explained: WhatsApp–Telegram यूज़र्स सावधान! बिना सिम वेरीफिकेशन अब नहीं खुलेगा आपका चैटिंग ऐप।

भारत सरकार (Government of India) ने देश के डिजिटल सुरक्षा (Digital Security) ढांचे में एक अभूतपूर्व बदलाव की घोषणा की है। मैसेजिंग ऐप्स (Messaging Apps) पर लागू किया गया नया ‘सिम बाइंडिंग’ (Sim Binding) नियम अब व्हाट्सएप (WhatsApp), टेलीग्राम (Telegram) और सिग्नल (Signal) जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म के संचालन के तरीके को पूरी तरह से बदल देगा। दूरसंचार विभाग (DOT) ने साफ कर दिया है कि अगले 90 दिनों में यह नियम प्रभावी हो जाएगा, जिसके बाद मैसेजिंग ऐप केवल उसी डिवाइस (Device) में काम करेंगे जिसमें रजिस्टर्ड सिम कार्ड (SIM Card) मौजूद होगा। साइबर अपराधों (Cyber Crime) और अंतरराष्ट्रीय डिजिटल फ्रॉड (Digital Fraud) के बढ़ते मामलों के जवाब में उठाया गया यह कदम भारत की साइबर सुरक्षा (Cyber Security) को एक नई ऊँचाई पर ले जाने का लक्ष्य रखता है। यह नियम उपयोगकर्ताओं की ऑनलाइन आदतों और मल्टी-डिवाइस लॉगिन (Multi-Device Login) मॉडल को प्रभावित कर सकता है। तो चलिए, जानते हैं सिम बाइंडिंग नियम क्या है और इसका पूरा मामला विस्तार से…

डिजिटल फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए क्यों आया यह नियम?

‘सिम बाइंडिंग’ (Sim Binding) नियम को लाने का मुख्य कारण भारत (India) में साइबर अपराधों (Cyber Crime) की बढ़ती संख्या और उनसे होने वाला वित्तीय नुकसान (Financial Loss) है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2024 में ही देश को डिजिटल धोखाधड़ी (Digital Fraud) के कारण लगभग 22,800 करोड़ रुपये का बड़ा नुकसान हुआ। सीमा पार बैठे साइबर अपराधी (Cyber Criminals) भारतीय उपभोक्ताओं को टारगेट करने के लिए अक्सर मैसेजिंग ऐप्स (Messaging Apps) का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें फर्जी प्रोफाइल और क्लोन किए गए नंबरों (Cloned Numbers) का उपयोग होता है। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए, दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications) ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए यह नियम अनिवार्य किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे की प्रोफाइल (Profile) को अलग डिवाइस (Device) में लॉग इन (Log In) न कर सके। ‘एक सिम—एक डिवाइस—एक लॉगिन’ की यह अवधारणा डिजिटल अपराधों पर नियंत्रण के लिए एक मजबूत दीवार का काम करेगी।

90 दिन बाद बिना सिम बंद होंगे व्हाट्सएप और टेलीग्राम

दूरसंचार विभाग (DOT) द्वारा 28 नवंबर को जारी नोटिस ने इस नियम के कड़े प्रावधानों को स्पष्ट किया है। ‘सिम बाइंडिंग’ (Sim Binding) नियम लागू होने के बाद, यदि सिम कार्ड (SIM Card) को फोन से निकाल दिया जाता है, तो मैसेजिंग ऐप (Messaging App) कुछ समय बाद ऑटोमैटिक लॉग आउट (Automatic Log Out) हो जाएंगे और काम करना बंद कर देंगे। इससे मल्टी-डिवाइस (Multi-Device) या डेस्कटॉप लॉगिन (Desktop Login) की वर्तमान सुविधा प्रभावित हो सकती है। सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव यह होगा कि 90 दिन पूरे होने के बाद, सभी मैसेजिंग ऐप हर 6 घंटे में अपने आप री-लॉगिन प्रक्रिया (Re-Login Process) शुरू करेंगे। यह ऑटो-चेक (Auto-Check) सिस्टम यह सत्यापित करेगा कि डिवाइस में वही रजिस्टर्ड सिम (Registered SIM) मौजूद है या नहीं। इस नियम का सीधा प्रभाव व्हाट्सएप (WhatsApp), टेलीग्राम (Telegram), सिग्नल (Signal), जियोचैट (JioChat) और स्नैपचैट (Snapchat) सहित सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म (Messaging Platforms) पर पड़ेगा।

कंपनियों को 120 दिनों में तकनीकी रिपोर्ट देने का आदेश

‘सिम बाइंडिंग’ (Sim Binding) नियम के सख्त अनुपालन के लिए, भारत सरकार (Government of India) ने सभी मैसेजिंग सर्विस प्रदाताओं (Service Providers) को निर्देश दिया है कि वे नए नियमों के अनुसार 120 दिनों के भीतर अपने सिस्टम में तकनीकी बदलाव (Technical Changes) पूरा करें। इसके साथ ही उन्हें अपनी प्रगति की विस्तृत रिपोर्ट (Detailed Report) दूरसंचार विभाग (DOT) को प्रस्तुत करनी होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दिशानिर्देशों का पालन न करने वाली कंपनियों के खिलाफ दूरसंचार अधिनियम 2023 और साइबर सुरक्षा नियमों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, कुछ कंपनियों ने इस बड़े तकनीकी बदलाव से जुड़ी प्राइवेसी (Privacy) और तकनीकी चुनौतियों (Technical Challenges) पर सवाल उठाए हैं, लेकिन सरकार का रुख स्पष्ट है। साइबर विशेषज्ञों (Cyber Experts) का मानना है कि सिम बाइंडिंग (Sim Binding) से चोरी किए गए प्रोफाइल (Stolen Profiles), क्लोन किए गए नंबर और वीपीएन (VPN) आधारित लोकेशन (Location) से फर्जी अकाउंट चलाने वाले धोखेबाज़ों पर बड़ी रोक लगेगी।

डिजिटल सुरक्षा ढांचे में बड़ा बदलाव और उपयोगकर्ताओं की स्वतंत्रता

नए ‘सिम बाइंडिंग’ (Sim Binding) नियम लागू होने के बाद देश में डिजिटल सुरक्षा (Digital Security) व्यवस्था अधिक केंद्रीकृत (Centralized) और मजबूत होने की उम्मीद है। अब उपयोगकर्ताओं (Users) को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका सिम (SIM) हमेशा उसी फोन (Phone) में मौजूद रहे, जिसमें मैसेजिंग ऐप (Messaging App) लॉगिन (Login) किया गया है। ऐप कंपनियाँ बैकएंड (Backend) में लगातार सिम–डिवाइस मेल (SIM-Device Match) की निगरानी के लिए सिस्टम तैयार कर रही हैं। यह कदम डिजिटल फ्रॉड (Digital Fraud) पर एक बड़ी चोट साबित हो सकता है, लेकिन इसका सीधा असर यूजर्स की स्वतंत्रता (Freedom) और मल्टी-डिवाइस लॉगिन (Multi-Device Login) की सुविधा पर पड़ेगा। सरकार आने वाले महीनों में साइबर सुरक्षा से जुड़े और कई सुधार लागू कर सकती है, जिनमें एंड-टू-एंड इंटेलिजेंस मॉनिटरिंग (End-to-End Intelligence Monitoring) शामिल हो सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह नियम भारत के डिजिटल इकोसिस्टम (Digital Ecosystem) को एक नई दिशा देगा।

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