• January 2, 2026

Silicon Valley’s Guru: स्टीव जॉब्स और मार्क ज़करबर्ग ने क्यों झुकाया नीम करौली बाबा के चरणों में सिर? रहस्य का खुलासा!

क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया के सबसे तेज दिमाग, जिनके फैसले अरबों की अर्थव्यवस्था बदल देते हैं, वे अचानक हिमालय की एक खामोश घाटी में क्यों सिर झुका देते हैं? क्या वजह है कि कोड की दुनिया के बादशाह, जब टूटते हैं, तो शक्ति की तलाश किसी टेक लैब में नहीं, बल्कि एक भारतीय संत के चरणों में करते हैं? ऐसा कौन था जो न टीवी पर दिखा, न मंचों पर बोला, न चमत्कारों का दावा किया, फिर भी करोड़ों लोग उसे भगवान का संदेशवाहक मान बैठे? ऐसा कौन सा रहस्य था, जिसने स्टीव जॉब्स (Steve Jobs) और मार्क ज़करबर्ग (Mark Zuckerberg) जैसे वैश्विक दिग्गजों की सोच की दिशा ही मोड़ दी? आज अटल टीवी पर हम आपको उसी रहस्य के दरवाज़े तक लेकर जा रहे हैं—एक ऐसे संत की कहानी, जो जितना साधारण था, उतना ही असाधारण। आखिर क्या है नीम करौली बाबा (Neem Karoli Baba) से जुड़ा वह रहस्य जिसने दुनिया बदल दी? तो चलिए जानते हैं पूरी खबर क्या है, जानते हैं विस्तार से…

लक्ष्मी नारायण शर्मा से ‘बाबा’ बनने का सफर

नीम करौली बाबा (Neem Karoli Baba) का जन्म उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अकबरपुर (Akbarpur) गाँव में करीब 1900 के आसपास माना जाता है। उनका असली नाम था लक्ष्मी नारायण शर्मा (Laxmi Narayan Sharma)। उनकी जन्मतिथि ठीक-ठीक दर्ज नहीं है, लेकिन उनकी उपस्थिति ने समय की सीमाओं को तोड़ दिया। उनका बचपन अत्यंत साधारण था, फिर भी उनके स्वभाव में एक अजीब सी गहराई और स्थिरता थी। यह बचपन से ही देखा गया कि वे कई बार बिना कुछ कहे लोगों के मन की बातें जान लेते थे, और उनकी कही गई बातें अक्सर भविष्य में सच साबित होती थीं। हालांकि, उन्होंने कभी भी अपनी किसी शक्ति का सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं किया। जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, उन्होंने सामान्य सांसारिक जीवन का त्याग कर दिया। बिना किसी पहचान, आश्रम या शिष्य मंडली के वह भारत की गलियों, गांवों और खेतों में घूमते रहे। जिन चंद लोगों ने उन्हें करीब से देखा, वे तत्काल समझ गए कि यह कोई साधारण साधु नहीं, बल्कि एक असाधारण विभूति है।

कैंची धाम की स्थापना और हनुमान जी की तपोभूमि

नीम करौली बाबा (Neem Karoli Baba) से जुड़ा कैंची धाम (Kainchi Dham) का ऐतिहासिक प्रसंग 1950 के दशक का है। उत्तराखंड (Uttarakhand) के अल्मोड़ा (Almora) के पास एक शांत और मनोरम घाटी में बाबा चुपचाप सड़क किनारे बैठे थे। तभी उन्होंने पहाड़ी पर खड़े एक युवक को नाम लेकर पुकारा—”पूरन (Puran), नीचे आओ।” पूरन अचंभित रह गया, क्योंकि बाबा उसे कभी मिले ही नहीं थे। इसके बाद बाबा ने उससे भोजन मंगवाया और 24 घरों के लिए चावल लाने को कहा। जब गांव के लोग इकट्ठा हुए, तो बाबा उन्हें जंगल की ओर ले गए और एक विशाल पत्थर की ओर इशारा करके कहा—”इसे हटाओ।” लोगों को यह हास्यास्पद लगा, लेकिन जैसे ही सबने मिलकर धक्का दिया, वह पत्थर आसानी से हट गया। उसके पीछे एक प्राचीन गुफा निकली, जिसमें धूनी जल रही थी। बाबा ने घोषणा की—यही हनुमान जी की तपोभूमि है। इसी पवित्र स्थान पर बाद में कैंची धाम की स्थापना हुई।

शेख मुजीब उर रहमान और असाधारण भविष्यवाणी

एक बार नीम करौली बाबा (Neem Karoli Baba) दिल्ली (Delhi) के बिरला मंदिर (Birla Mandir) में ठहरे हुए थे। वहीं एक युवक गहरे अवसाद और उदासी में उनके पास आया। युवक के कुछ बोलने से पहले ही बाबा ने उससे कहा—”तुम्हारा भाई जेल से निकलेगा और एक दिन देश का शासक बनेगा।” युवक रो पड़ा। उसने बताया कि बाबा, उसका भाई पाकिस्तान (Pakistan) की मियांवाली जेल (Mianwali Jail) में बंद है और उसे मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। बाबा ने सिर्फ हल्के से मुस्कुराया और कहा—”समय बदल चुका है।” कुछ समय बाद, भारत-पाक युद्ध हुआ, बांग्लादेश (Bangladesh) का निर्माण हुआ और वही युवक का भाई शेख मुजीब उर रहमान (Sheikh Mujibur Rahman) बांग्लादेश का पहला राष्ट्रपति बना। यह घटना बाबा की उस असाधारण शक्ति की झलक थी, जो समय, राजनीति और असंभव लगने वाली घटनाओं तक को चुनौती देती थी। इस घटना के बाद बाबा की प्रसिद्धि राष्ट्रीय सीमाओं से भी आगे निकल गई।

स्टीव जॉब्स से ज़करबर्ग तक, सिलिकॉन वैली में बाबा

बाबा की शक्ति का एक और गहरा उदाहरण उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फतेहगढ़ (Fatehgarh) से जुड़ा है, जहां एक भक्त दंपत्ति के यहां ठहरने के दौरान बाबा रात भर अदृश्य युद्ध में कराहते रहे। अगले दिन उन्होंने एक पुराना कंबल गंगा में प्रवाहित करने को कहा और भविष्यवाणी की कि उनका बेटा, जो बर्मा फ्रंट पर जापानी सेना से लड़ रहा था, लौट आएगा। ठीक एक महीने बाद बेटा सही सलामत लौटा और बताया कि उस रात अजीब तरह से एक भी गोली उसे नहीं लगी, जबकि उसके सभी साथी मारे गए थे। यह घटना भक्ति और शक्ति के अटूट संबंध को दर्शाती है। 1974 में, जीवन की दिशा खो चुके स्टीव जॉब्स (Steve Jobs) कैंची धाम पहुंचे और बाद में कहा कि उन्होंने अपने जीवन का अर्थ वहीं पाया। सालों बाद, जब फेसबुक (Facebook) के बुरे दौर में मार्क ज़करबर्ग (Mark Zuckerberg) परेशान थे, तो जॉब्स ने उन्हें भी बाबा के पास जाने की सलाह दी। आज सिलिकॉन वैली (Silicon Valley) के कई दिग्गजों के ऑफिस में बाबा की तस्वीरें दिखती हैं—वे मानते हैं कि बाबा कोड नहीं बनाते, पर कोड बनाने वालों का मन और उद्देश्य जरूर बदल देते हैं।

Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *