• February 11, 2026

प्रधानमंत्री मोदी के 97 मिनट के भाषण पर मल्लिकार्जुन खरगे का तीखा प्रहार: ‘सिर्फ पुरानी बातों का दोहराव, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर नहीं दिया एक भी जवाब’

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुरुवार शाम राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर दिए गए विस्तृत जवाब के बाद अब विपक्ष ने उन पर चौतरफा हमला बोल दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री के लगभग 97 मिनट लंबे संबोधन को ‘तथ्यहीन’ और ‘पुरानी बातों का पिटारा’ करार दिया है। खरगे ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि इतने लंबे भाषण में देश की ज्वलंत समस्याओं पर कोई ठोस बात नहीं की गई और न ही विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का कोई संतोषजनक उत्तर दिया गया। इस भाषण के दौरान सदन में भारी हंगामा भी देखने को मिला, जिसके परिणामस्वरूप विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री के संबोधन के बीच में ही सदन से वॉकआउट कर दिया।

मल्लिकार्जुन खरगे ने समाचार एजेंसी एएनआई से विशेष बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री की कार्यशैली और उनके भाषण की विषय-वस्तु पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि झूठी बातों को बार-बार दोहराना प्रधानमंत्री की पुरानी आदत रही है। खरगे के अनुसार, प्रधानमंत्री ने अपने 97 मिनट के भाषण में कोई भी नई बात नहीं कही, बल्कि वही बातें दोहराईं जो वह पिछले कई वर्षों से कह रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान जो महत्वपूर्ण विचार रखे थे और जो प्रश्न पूछे थे, प्रधानमंत्री ने उनमें से एक का भी जवाब देना जरूरी नहीं समझा। इसके बजाय, प्रधानमंत्री का पूरा ध्यान 75 साल और 100 साल के भविष्य के दावों पर टिका रहा, जबकि वर्तमान की चुनौतियों को उन्होंने पूरी तरह दरकिनार कर दिया।

कांग्रेस अध्यक्ष ने रक्षा क्षेत्र और चीन सीमा विवाद से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे (रिटायर्ड) की हालिया प्रकाशित पुस्तक का जिक्र करते हुए सरकार की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए। खरगे ने आश्चर्य व्यक्त किया कि जब विपक्ष को वह पुस्तक मिल गई है और वह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, तो रक्षा मंत्री यह कैसे कह सकते हैं कि किताब प्रकाशित ही नहीं हुई है। उन्होंने इस पर हैरानी जताई कि सरकार तथ्यों को छिपाने की कोशिश क्यों कर रही है। खरगे ने आगे कहा कि जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 2022 के चीन मुद्दे और सीमाओं की सुरक्षा का विषय उठाया, तो सत्ता पक्ष के लोग परेशान क्यों हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास विपक्ष के ठोस सवालों का कोई तथ्यात्मक जवाब नहीं है, इसलिए वे केवल व्यक्तिगत हमलों और गालियों का सहारा ले रहे हैं।

सिख समुदाय के अपमान को लेकर प्रधानमंत्री द्वारा लगाए गए आरोपों पर भी मल्लिकार्जुन खरगे ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी सिख समुदाय का दिल से सम्मान करती है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण डॉ. मनमोहन सिंह हैं। खरगे ने याद दिलाया कि कांग्रेस ने ही डॉ. मनमोहन सिंह जैसे प्रख्यात अर्थशास्त्री को दो बार वित्त मंत्री और फिर दो बार देश का प्रधानमंत्री नियुक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग हम पर अपमान का आरोप लगा रहे हैं, वे स्वयं दलितों सहित किसी भी वंचित वर्ग का वास्तविक सम्मान नहीं करते। उन्होंने पिछले 10 वर्षों के कार्यकाल का विश्लेषण करते हुए कहा कि इस दौरान भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री ने कांग्रेस को कोसने और गाली देने के अलावा देश के लिए कोई नया विजन पेश नहीं किया है।

प्रधानमंत्री का यह भाषण ऐसे समय में आया है जब बजट सत्र के दौरान विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार को लगातार घेर रहा है। 4 फरवरी को लोकसभा में प्रधानमंत्री का भाषण रद्द होने के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज थीं, लेकिन गुरुवार को राज्यसभा में उन्होंने जिस आक्रामक अंदाज में जवाब दिया, उसने विपक्ष को और अधिक मुखर कर दिया है। विपक्ष का तर्क है कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का उपयोग सदन को जवाबदेह बनाने के बजाय चुनावी रैली की तरह किया। वॉकआउट करने वाले सांसदों का कहना था कि जब उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा ही नहीं हो रही है, तो सदन में बैठने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने बयान के अंत में यह भी स्पष्ट किया कि विपक्ष संसद के भीतर अपनी आवाज उठाना जारी रखेगा और सरकार की ‘विफलता’ को जनता के सामने लाता रहेगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी सवालों के जवाब देना है, न कि विपक्ष के अतीत को खोदकर अपनी वर्तमान नाकामियों को छिपाना। बजट सत्र के आगामी दिनों में इस जुबानी जंग के और तेज होने के आसार हैं, क्योंकि विपक्ष अब रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री दोनों को डेटा और तथ्यों के आधार पर घेरने की रणनीति बना रहा है। कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री का 97 मिनट का भाषण समाधान देने के बजाय सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच की खाई को और चौड़ा कर गया है।

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